
#देवघर #साइबर_अपराध : फर्जी योजनाओं और कस्टमर केयर बनकर ठगी करने वाले आरोपी पर कार्रवाई।
देवघर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत देवीपुर थाना क्षेत्र से एक नामजद साइबर ठग को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 31 जनवरी 2026 को पुलिस अधीक्षक सौरभ के आदेश और पुलिस उपाधीक्षक राजा कुमार मित्रा के निर्देश में की गई। आरोपी पर फर्जी योजनाओं, नकली कस्टमर केयर और डिजिटल भुगतान माध्यमों के जरिए लोगों से ठगी करने के गंभीर आरोप हैं। मामले को जिले में बढ़ते साइबर अपराध के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
- देवीपुर थाना क्षेत्र से साइबर ठगी के एक नामजद आरोपी की गिरफ्तारी।
- अभिषेक कुमार दास पर फर्जी योजनाओं और कस्टमर केयर बनकर ठगी का आरोप।
- आरोपी के पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड जब्त।
- जांच में फर्जी लिंक और एपीके फाइल के जरिए ठगी के साक्ष्य मिले।
- 31 जनवरी 2026 को पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कार्रवाई।
देवघर जिले में साइबर अपराध के मामलों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही है। इसी क्रम में देवीपुर थाना क्षेत्र में एक नामजद अभियुक्त की गिरफ्तारी की गई है। आरोपी पर लंबे समय से डिजिटल माध्यमों से लोगों को गुमराह कर आर्थिक ठगी करने के आरोप थे। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
कैसे हुई आरोपी की गिरफ्तारी
देवीपुर थाना कांड संख्या 168/24, दिनांक 23 नवंबर 2024 में नामजद अभियुक्त अभिषेक कुमार दास, पिता गुणेश्वर दास, निवासी गिदहिया, थाना देवीपुर की तलाश पुलिस को थी। पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी अपने घर पर मौजूद है। इसके बाद पुलिस टीम ने उसके घर पर छापेमारी कर उसे पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के परिजनों द्वारा जमानत आदेश प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद पुलिस ने विधिसम्मत तरीके से आरोपी के पास मौजूद डिजिटल उपकरणों की जांच की।
मोबाइल और सिम से मिले साइबर ठगी के साक्ष्य
जांच के दौरान आरोपी के पास से बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की तकनीकी पड़ताल की गई। इस जांच में साइबर अपराध से जुड़े कई अहम साक्ष्य सामने आए। पुलिस के अनुसार, इन साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर आम लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था।
इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ अलग से साइबर अपराध का मामला दर्ज किया गया और उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।
किन तरीकों से करता था ठगी
पुलिस जांच में यह सामने आया कि आरोपी अलग-अलग तरीकों से लोगों को जाल में फंसाता था। वह
फर्जी एपीके फाइल बनाकर उन्हें बेचने,
प्रधानमंत्री किसान योजना के नाम पर फर्जी लिंक भेजने,
खुद को वित्तीय संस्थान का अधिकारी बताकर लोन दिलाने का झांसा देने,
डिजिटल भुगतान ऐप्स के कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर कैशबैक या गिफ्ट कार्ड के नाम पर ठगी करने जैसी गतिविधियों में संलिप्त था।
इन तरीकों से वह लोगों से निजी जानकारी और पैसे दोनों हासिल करता था।
पुलिस अधिकारियों की भूमिका
इस पूरी कार्रवाई को पुलिस अधीक्षक सौरभ के आदेशानुसार और पुलिस उपाधीक्षक राजा कुमार मित्रा के निर्देशन में अंजाम दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध के मामलों में तकनीकी साक्ष्य बेहद अहम होते हैं और इसी आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।
पुलिस का कहना है कि जिले में साइबर ठगी के मामलों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया
आरोपी से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसके नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उसने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया और ठगी की राशि कहां-कहां ट्रांसफर की गई।
जांच पूरी होने के बाद आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा।
न्यूज़ देखो: साइबर अपराध पर सख्त संदेश
देवघर पुलिस की यह कार्रवाई दिखाती है कि साइबर अपराध को अब हल्के में नहीं लिया जा रहा। डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर ठगी करने वालों पर तकनीकी जांच के जरिए शिकंजा कसा जा रहा है। यह मामला आम नागरिकों के लिए भी चेतावनी है कि किसी भी फर्जी लिंक या कस्टमर केयर कॉल से सतर्क रहें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सजग डिजिटल नागरिक बनना आज की जरूरत
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी योजना, लिंक या कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई जांचें। अपनी निजी जानकारी और ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।
आपकी जागरूकता ही ऐसे अपराधियों को रोकने में सबसे बड़ा हथियार है। इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे दूसरों तक पहुंचाएं और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।



