
#लावालौंग #चतरा #अवैध_अफीम : सघन अभियान में सैकड़ों एकड़ खेती नष्ट, नशा कारोबारियों पर कसा शिकंजा।
चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड में पुलिस ने अवैध अफीम खेती के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सघन अभियान के तहत 874 एकड़ भूमि में लगी अफीम की फसल नष्ट की गई है। इस कार्रवाई में 70 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई, जबकि तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। अभियान का नेतृत्व थाना प्रभारी स्वयं कर रहे हैं, जिससे नशा कारोबारियों में दहशत का माहौल है।
- लावालौंग प्रखंड में पुलिस का व्यापक अफीम विनष्टीकरण अभियान।
- अब तक 874 एकड़ में लगी अफीम की खेती पूरी तरह नष्ट।
- अवैध खेती में संलिप्त 70 व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज।
- 3 आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए।
- दर्जनों गांवों में चला अभियान, पुलिस प्रशासन एक्शन मोड में।
चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड क्षेत्र में अवैध अफीम (पोस्ता) की खेती के खिलाफ पुलिस का सख्त रुख साफ नजर आ रहा है। लगातार चल रहे सघन अभियान के कारण नशा कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस प्रशासन का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि क्षेत्र को नशामुक्त बनाना है।
पुलिस की इस कार्रवाई को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सैकड़ों एकड़ भूमि में फैली अवैध खेती को नष्ट किया गया है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में अभियान को और तेज किया जाएगा।
दर्जनों गांवों में चला व्यापक अभियान
लावालौंग थाना प्रभारी प्रशांत मिश्रा ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यह अभियान प्रखंड के कई दुर्गम और संवेदनशील इलाकों में चलाया गया। उन्होंने बताया कि भूसाड़, आरसेलटाड़, बरहेद, होसीर, चनों, हरदीपुर, गरहे, सुलमा, कोलकोले, टिकुलिया, नावाडीह, कोटारी, हेडुम, बड़की बरहेद, पसंगम, बिसनपुर, ईचाहर, सांभे मड़वा, सिलदाग, खनगड़ा, सीकरी, सेरका समेत दर्जनों गांवों में अफीम की खेती को चिन्हित कर पूरी तरह विनष्ट किया गया।
इन सभी क्षेत्रों में पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर फसलों को नष्ट किया और संबंधित लोगों की पहचान की। पुलिस के अनुसार, अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती गई।
874 एकड़ में अफीम की खेती विनष्ट
पुलिस प्रशासन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अब तक कुल लगभग 874 एकड़ भूमि में लगी अफीम की खेती को नष्ट किया जा चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि क्षेत्र में अवैध खेती कितने बड़े पैमाने पर फैली हुई थी।
थाना प्रभारी प्रशांत मिश्रा ने कहा:
प्रशांत मिश्रा ने कहा: “अफीम की खेती किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसे जड़ से खत्म करना ही हमारा लक्ष्य है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस का यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक क्षेत्र से अफीम की खेती पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती।
70 लोगों पर एफआईआर, 3 आरोपी जेल भेजे गए
पुलिस द्वारा केवल फसल नष्ट करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी गई है। अवैध खेती में संलिप्त लोगों को चिन्हित कर अब तक लगभग 70 व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
इसके साथ ही कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। जेल भेजे गए आरोपियों में—
- समत गंझु, पिता कैलाश गंझु, निवासी सिकनी
- सरजू गंझु, पिता कैलाश गंझु, निवासी सिकनी
- छठू गंझु, पिता नेट गंझु, निवासी बिशनपुर
शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
कार्रवाई के साथ जागरूकता पर भी जोर
पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह अभियान केवल दंडात्मक नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास है। थाना प्रभारी प्रशांत मिश्रा स्वयं अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं और ग्रामीणों से संवाद कर रहे हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की:
प्रशांत मिश्रा ने कहा: “यदि कहीं अफीम की खेती लगी हो, तो लोग स्वयं उसे विनष्ट कर दें। अन्यथा पुलिस चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई करेगी।”
पुलिस का मानना है कि स्थानीय लोगों के सहयोग से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
इधर, कुछ ग्रामीणों ने पत्रकारों के माध्यम से वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की भूमि पर अब भी बड़े पैमाने पर अफीम की खेती लहलहा रही है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई गरीब या सामान्य व्यक्ति वन भूमि पर झोपड़ी बनाता है या सब्जी की खेती करता है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई होती है। लेकिन अफीम की खेती करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती—यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है।
हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि उनकी कार्रवाई लगातार जारी है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बख्शा नहीं जाएगा।

न्यूज़ देखो: लावालौंग में पुलिस का सख्त संदेश
लावालौंग में 874 एकड़ अफीम खेती का विनष्टीकरण यह दर्शाता है कि पुलिस अब नशे के खिलाफ निर्णायक मोड में है। इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई के बावजूद वन भूमि से जुड़े सवाल प्रशासनिक समन्वय की कमी को उजागर करते हैं। अब जरूरी है कि पुलिस और वन विभाग मिलकर संयुक्त रणनीति अपनाएं। आने वाले दिनों की कार्रवाई यह तय करेगी कि यह अभियान कितनी स्थायी सफलता हासिल कर पाता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नशामुक्त समाज की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी
अवैध अफीम की खेती केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए खतरा है। पुलिस की कार्रवाई तभी सफल होगी, जब समाज भी इसमें अपनी जिम्मेदारी निभाए। जागरूकता, सहयोग और समय पर सूचना देकर इस बुराई को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
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