बीएनएस लॉ कॉलेज में पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को समझाई आपराधिक न्याय प्रणाली, साइबर अपराध और पुलिस जांच की प्रक्रिया

बीएनएस लॉ कॉलेज में पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को समझाई आपराधिक न्याय प्रणाली, साइबर अपराध और पुलिस जांच की प्रक्रिया

author Akram Ansari
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#बरवाडीह #विधि_प्रशिक्षण : पुलिस अधिकारियों ने कानून के व्यवहारिक पक्ष से विद्यार्थियों को कराया परिचित।

बरवाडीह के भुसड़िया स्थित भीष्म नारायण सिंह विधि महाविद्यालय में आयोजित व्यवहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को आपराधिक न्याय प्रशासन और पुलिस कार्यप्रणाली की जानकारी दी। एसडीपीओ बिरेंद्र कुमार राम और थाना प्रभारी अनुराग कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, साइबर अपराध और पुलिस जांच प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य विधि छात्रों को कानून के व्यवहारिक पक्ष से जोड़ना और न्याय प्रणाली की समझ विकसित करना था।

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  • भीष्म नारायण सिंह विधि महाविद्यालय, भुसड़िया में आयोजित हुआ व्यवहारिक प्रशिक्षण सत्र।
  • एसडीपीओ बिरेंद्र कुमार राम और थाना प्रभारी अनुराग कुमार ने छात्रों को दी कानूनी जानकारी।
  • BNSS 2023, साइबर अपराध और पुलिस जांच प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा।
  • विद्यार्थियों ने अधिकारियों से पूछे कानून और न्याय व्यवस्था से जुड़े सवाल।
  • महाविद्यालय प्राचार्य पंकज कुमार ने व्यवहारिक शिक्षा को बताया जरूरी।
  • सैकड़ों विद्यार्थियों ने सत्र को उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।

बरवाडीह के भुसड़िया स्थित भीष्म नारायण सिंह विधि महाविद्यालय में आयोजित व्यवहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन विद्यार्थियों को आपराधिक न्याय प्रणाली और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया। इस अवसर पर बरवाडीह के एसडीपीओ बिरेंद्र कुमार राम और थाना प्रभारी अनुराग कुमार ने गेस्ट लेक्चरर के रूप में भाग लेकर विधि छात्रों को कानून के व्यवहारिक पहलुओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023, साइबर अपराध, मोटर वाहन अपराध और विभिन्न आपराधिक मामलों में पुलिस की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों ने भी अधिकारियों से कई सवाल पूछे, जिनका सरल और व्यावहारिक तरीके से उत्तर दिया गया।

पुलिस अधिकारियों ने साझा किया व्यवहारिक अनुभव

प्रशिक्षण सत्र के दौरान एसडीपीओ बिरेंद्र कुमार राम ने छात्रों को बताया कि कानून केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका सही उपयोग और क्रियान्वयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने पुलिस जांच प्रक्रिया, अपराध नियंत्रण और आपराधिक मामलों में साक्ष्य संकलन की भूमिका को विस्तार से समझाया। साथ ही विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किसी भी आपराधिक मामले में समयबद्ध जांच और कानूनी प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण होती है।

एसडीपीओ बिरेंद्र कुमार राम ने कहा: “विधि के विद्यार्थियों को न्याय प्रणाली के व्यवहारिक पक्ष को समझना बेहद जरूरी है, ताकि वे भविष्य में बेहतर कानूनी पेशेवर बन सकें।”

BNSS 2023 के प्रावधानों पर हुई विस्तृत चर्चा

कार्यक्रम में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के विभिन्न प्रावधानों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि नई कानूनी व्यवस्था में जांच प्रक्रिया, गिरफ्तारी, आरोप पत्र और सुनवाई से संबंधित कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

छात्रों को जांच की समय-सीमा, प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया और डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई।

साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा पर जागरूकता

सत्र के दौरान साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया, ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर ठगी और डिजिटल अपराध आज बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की सलाह दी गई।

थाना प्रभारी अनुराग कुमार ने कहा: “साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। कानून के विद्यार्थियों को डिजिटल अपराधों और उनसे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक है।”

मोटर वाहन अपराधों और पुलिस दायित्वों की जानकारी

प्रशिक्षण सत्र में मोटर वाहन अधिनियम और सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन और यातायात कानूनों की समझ समाज के लिए बेहद जरूरी है।

इसके अलावा पुलिस के अधिकार, जिम्मेदारियां और कानून व्यवस्था बनाए रखने में उनकी भूमिका को भी विस्तार से समझाया गया।

छात्रों ने पूछे कई महत्वपूर्ण सवाल

इंटरैक्टिव सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने पुलिस जांच, साइबर अपराध, गिरफ्तारी प्रक्रिया, अदालत में साक्ष्यों की भूमिका और कानून के व्यवहारिक उपयोग से जुड़े कई सवाल पूछे।

अधिकारियों ने छात्रों की जिज्ञासाओं का सरल भाषा में समाधान करते हुए उन्हें वास्तविक मामलों के उदाहरण भी दिए। इससे विद्यार्थियों को न्याय प्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला।

प्राचार्य ने व्यवहारिक शिक्षा पर दिया जोर

महाविद्यालय के प्राचार्य पंकज कुमार ने कहा कि विधि शिक्षा को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। विद्यार्थियों को व्यवहारिक अनुभव और न्याय प्रणाली की वास्तविक कार्यप्रणाली से परिचित कराना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का उद्देश्य छात्रों को कानून के व्यावहारिक पक्ष से जोड़ना और उन्हें सक्षम कानूनी पेशेवर के रूप में तैयार करना है।

प्राचार्य पंकज कुमार ने कहा: “कानून की पढ़ाई तभी सार्थक होगी जब विद्यार्थी न्याय प्रणाली को व्यवहारिक रूप से समझेंगे।”

सैकड़ों विद्यार्थियों की रही भागीदारी

कार्यक्रम में श्यामली शर्मा, सोनम कुमारी, संध्या कुमारी, संदीप कुमार ठाकुर, प्रभात कुमार, उत्तम कुमार सहित सैकड़ों विद्यार्थियों ने भाग लिया।

विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण सत्र को बेहद उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम उन्हें किताबों से बाहर निकलकर कानून की वास्तविक दुनिया को समझने का अवसर देते हैं। छात्रों ने भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की।

व्यवहारिक प्रशिक्षण से बढ़ी कानूनी समझ

महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों के आत्मविश्वास और कानूनी समझ को मजबूत करते हैं। पुलिस अधिकारियों और विधि छात्रों के बीच सीधे संवाद से न्याय प्रणाली की जमीनी हकीकत को समझने में मदद मिलती है।

कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और सहभागिता को लेकर भी विद्यार्थियों की सराहना की गई।

न्यूज़ देखो: कानून की पढ़ाई को व्यवहारिक बनाना समय की जरूरत

विधि शिक्षा केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जब छात्रों को न्याय व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और कानूनी प्रक्रिया का व्यवहारिक अनुभव मिलता है, तभी वे बेहतर वकील, न्यायविद और जिम्मेदार नागरिक बन पाते हैं। बीएनएस लॉ कॉलेज की यह पहल शिक्षा और व्यवहारिक प्रशिक्षण के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को कानून की वास्तविक समझ देने के साथ न्याय व्यवस्था के प्रति जागरूक भी बनाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक कानून विद्यार्थी ही मजबूत न्याय व्यवस्था की नींव

कानून की सही समझ समाज को न्याय और जिम्मेदारी की दिशा देती है।

युवाओं को केवल डिग्री नहीं, बल्कि संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनने की भी जरूरत है।

यदि आप भी मानते हैं कि व्यवहारिक शिक्षा युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाती है, तो इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और शिक्षा से जुड़ी सकारात्मक पहलों को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।

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Written by

बरवाडीह, लातेहार

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