
#दुमका #राजनीतिक_विवाद : अस्पताल में करोड़ों के उपकरण चोरी मामले पर मंत्री इरफान अंसारी और विधायक प्रदीप यादव के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज
- हंसडीहा हॉस्पिटल के उपकरण चोरी का मुद्दा विधानसभा में गूंजा।
- विधायक प्रदीप यादव ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया।
- स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा—चोरी करीब एक करोड़ की, गलत आंकड़ों पर माफी मांगे।
- मंत्री का बयान—विधायक को सदन में उठाने से पहले बात करनी चाहिए थी।
- आरोप–प्रत्यारोप से मामले पर सियासी गर्मी बढ़ी।
हंसडीहा हॉस्पिटल में हुए बड़े पैमाने पर उपकरण चोरी का मामला अब सियासी रंग ले चुका है। दुमका से उठी यह घटना सोमवार को विधानसभा सदन तक पहुंच गई, जहाँ विपक्ष के वरिष्ठ विधायक प्रदीप यादव ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे “लापरवाही और मिलीभगत का मामला” बताया। उन्होंने कहा कि अगर अस्पताल का संचालन समय पर शुरू कर दिया गया होता, तो इतनी बड़ी चोरी संभव ही नहीं थी। उनके अनुसार जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से सरकारी संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है और दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।
मंत्री–विधायक में तकरार, आंकड़ों पर विवाद
विधानसभा में लगे आरोपों का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने विधायक प्रदीप यादव पर “गलत और बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश करने” का आरोप लगाया। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि चोरी हुई सामानों की कीमत लगभग एक करोड़ रुपये है, जबकि सदन में 25 करोड़ रुपये बताकर भ्रम फैलाया गया।
मंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदीप यादव को आंकड़े सही करने चाहिए और यदि गलत जानकारी दी है तो सदन में माफी मांगनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि होने के नाते प्रदीप यादव की भी ज़िम्मेदारी बनती है कि वे स्थानीय स्तर पर निगरानी में सहयोग करें।
“पहले बात करते तो बेहतर होता”—स्वास्थ्य मंत्री
इरफान अंसारी ने यह भी कहा कि विधायक को सदन में मुद्दा उठाने से पहले सीधे उनसे बातचीत करनी चाहिए थी। उनके अनुसार, गलत सूचनाओं के आधार पर सरकार की छवि खराब करना ठीक नहीं। उन्होंने दावा किया कि घटना की जांच जारी है और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विधायक का आरोप—प्रशासन की भारी लापरवाही
दूसरी ओर विधायक प्रदीप यादव का कहना है कि अस्पताल वर्षों से तैयार है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अब तक इसे कार्यरत नहीं किया। यही कारण है कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त होती चली गई और चोरों ने मौका पाकर महंगे उपकरण उड़ा लिए। उन्होंने सवाल उठाया कि रात के समय सुरक्षा कैसे फेल हो गई और कौन लोग इस पूरे मामले में शामिल हैं।
ग्रामीणों में भी घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। उनका मानना है कि यदि अस्पताल चालू होता तो क्षेत्र को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलती और चोरी जैसी घटनाएँ नहीं होतीं।
जांच पर उठ रहे सवाल
अस्पताल से चोरी हुए उपकरणों की बरामदगी अब तक नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ चोरी का मामला नहीं, बल्कि योजनाओं में लापरवाही और भ्रष्टाचार की परतों को दर्शाता है। वहीं विपक्ष सरकार पर गंभीर आरोप लगा रहा है कि करोड़ों की परियोजनाएँ बिना उपयोग के धूल फांक रही हैं।
न्यूज़ देखो: अस्पताल सुरक्षा पर बड़ा सवाल
हंसडीहा हॉस्पिटल चोरी कांड ने यह साफ कर दिया कि निर्माण पूरा होने के बाद भी अस्पतालों को वर्षों तक बंद रखना कितना बड़ा जोखिम है। मंत्री–विधायक विवाद से हटकर प्रशासन को तत्काल जिम्मेदारों की पहचान कर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता सबसे अहम है।
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