Giridih

रिम्स-2 जमीन विवाद पर गरमाई राजनीति नगड़ी में बैरिकेडिंग तोड़ किसानों से मिले डुमरी विधायक जयराम महतो

#रांची #रिम्स2विवाद : नगड़ी में रैयतों के विरोध के बीच विधायक जयराम महतो ने भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद किसानों से मुलाकात कर सुनी समस्याएं
  • रांची के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना को लेकर विवाद गहराया।
  • प्रशासन ने इलाके में भारी बैरिकेडिंग और पुलिस बल तैनात किया।
  • डुमरी विधायक जयराम महतो किसानों और रैयतों से सीधे मिलने पहुँचे।
  • किसानों ने कहा – खेती योग्य जमीन छीनने से आजीविका पर संकट।
  • संघर्ष समिति ने हल जोतने और रोपनी आंदोलन की घोषणा की।
  • सरकार का दावा – निर्धारित स्थल पर ही बनेगा 700 बेड का अस्पताल

रांची जिले के नगड़ी प्रखंड में रिम्स-2 के लिए भूमि अधिग्रहण विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर प्रशासन ने विरोध की आशंका में क्षेत्र को छावनी में बदल दिया है, वहीं दूसरी ओर डुमरी विधायक जयराम महतो बैरिकेडिंग और पुलिस घेराबंदी के बीच किसानों से मिलने पहुँचे। किसानों और आदिवासी संगठनों का आरोप है कि कृषि योग्य उपजाऊ भूमि पर अस्पताल परियोजना लागू करना उनकी आजीविका पर सीधा हमला है। इस बीच नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है।

रिम्स-2 परियोजना की पृष्ठभूमि

राज्य सरकार ने रांची में रिम्स-2 अस्पताल बनाने का निर्णय लिया है। योजना के तहत लगभग 110 से 122 एकड़ भूमि पर 700 बेड का आधुनिक अस्पताल और मेडिकल शिक्षा से जुड़ी सीटों का प्रावधान शामिल है। स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि यह अस्पताल झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देगा और रांची सहित आसपास जिलों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी।

किसानों और रैयतों की आपत्ति

नगड़ी के स्थानीय किसानों और रैयतों ने जमीन अधिग्रहण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह उनकी उपजाऊ भूमि है। उनका तर्क है कि खेती योग्य जमीन पर अस्पताल बनाने से हजारों लोगों की आजीविका पर संकट आएगा। किसानों का कहना है कि अस्पताल जरूरी है, लेकिन इसके लिए वैकल्पिक गैर-कृषि भूमि का चयन किया जाना चाहिए।

एक रैयत ने कहा: “हम अपने खेतों को पीढ़ियों से जोत रहे हैं। यह हमारी रोटी और पहचान है। इसे हम किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।”

संघर्ष समिति का आंदोलन

नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति लगातार किसानों को संगठित कर रही है। समिति ने खेतों में हल जोतने और रोपनी कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है ताकि संदेश दिया जा सके कि यह भूमि केवल खेती के लिए ही है। संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और किसान लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएंगे।

प्रशासनिक तैयारी और कानून-व्यवस्था

प्रशासन ने संभावित तनाव को देखते हुए इलाके में भारी बैरिकेडिंग कर दी है और पुलिस बल की तैनाती की गई है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि परियोजना को निर्धारित स्थान पर ही आगे बढ़ाया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा: “झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने के लिए रिम्स-2 आवश्यक है। परियोजना अपने तय स्थल पर ही लागू की जाएगी।”

डुमरी विधायक जयराम महतो का हस्तक्षेप

विवाद के बीच डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो किसानों और रैयतों से मिलने नगड़ी पहुँचे। भारी सुरक्षा और बैरिकेडिंग के बावजूद उन्होंने किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। विधायक ने किसानों की बात सरकार तक पहुँचाने का भरोसा दिलाया।

जयराम महतो ने कहा: “रैयतों की आवाज दबाई नहीं जानी चाहिए। सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए और संवाद के जरिए समाधान निकालना होगा।”

राजनीतिक सरगर्मी और विपक्ष की भूमिका

इस विवाद पर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कई नेताओं ने सुझाव दिया है कि अस्पताल परियोजना को गैर-कृषि भूमि पर स्थानांतरित किया जाए ताकि विकास और आजीविका दोनों का संतुलन बना रहे। राजनीतिक हलचल से स्पष्ट है कि नगड़ी विवाद आने वाले दिनों में और भी तूल पकड़ सकता है।

न्यूज़ देखो: विकास बनाम जमीन की जंग

रिम्स-2 अस्पताल परियोजना झारखंड के लिए स्वास्थ्य सुविधा का बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन इसका विरोध यह दिखाता है कि विकास और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन बनाना कितना कठिन है। किसानों की पीड़ा और सरकार की जिद, दोनों ही स्थितियों को नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है। यह संघर्ष हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या विकास योजनाओं में प्रभावित समुदायों को पर्याप्त सम्मान और विकल्प मिलते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

समाधान संवाद से ही संभव

नगड़ी विवाद ने यह साबित कर दिया है कि विकास परियोजनाओं का समाधान केवल प्रशासनिक आदेशों से नहीं, बल्कि संवाद और सहमति से ही संभव है। अब समय है कि सरकार और किसान मिलकर ऐसा रास्ता खोजें जिससे स्वास्थ्य सेवा भी मजबूत हो और किसानों की जमीन व आजीविका भी सुरक्षित रहे। अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को साझा करें और अधिक से अधिक लोगों को चर्चा में शामिल करें।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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