
#देवघर #आजीविका_मेला : डीसी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक—सरस मेले की व्यवस्थाओं को लेकर दिए गए अहम निर्देश।
देवघर में आयोजित होने वाले पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 9 जनवरी 2026 को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में आयोजन की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में 25 से 31 जनवरी तक प्रस्तावित मेले की व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा कर संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए। यह मेला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों के लिए आजीविका संवर्धन का बड़ा मंच माना जा रहा है।
- 25 से 31 जनवरी 2026 तक देवघर में आयोजित होगा पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला।
- डीसी नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में समीक्षा बैठक।
- मेले में 100 से अधिक स्टॉल लगाए जाने की योजना।
- आयोजन को सुचारु बनाने के लिए विभिन्न जिला स्तरीय कोषांगों का गठन।
- स्वयं सहायता समूहों की दीदियां और स्थानीय कारीगर अपने उत्पादों का करेंगे प्रदर्शन।
देवघर जिले में पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला के आयोजन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। 9 जनवरी 2026 को समाहरणालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने मेले की तैयारियों की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया, ताकि यह आयोजन सुव्यवस्थित और सफल रूप से संपन्न हो सके। बैठक में स्पष्ट किया गया कि यह मेला ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
25 से 31 जनवरी तक चलेगा सरस मेला
बैठक में जानकारी दी गई कि पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला का आयोजन 25 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक देवघर में किया जाएगा। सात दिनों तक चलने वाले इस मेले में जिले सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, स्थानीय कामगार और हुनरमंद कारीगर भाग लेंगे।
मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना, स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाना और उनकी पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करना है।
100 से अधिक स्टॉल होंगे स्थापित
उपायुक्त ने जानकारी दी कि सरस मेले में 100 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉलों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की दीदियां, स्थानीय कामगार और हुनरमंद समूह अपने हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे।
इनमें हस्तशिल्प, हथकरघा, पारंपरिक खाद्य उत्पाद, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और अन्य ग्रामीण उत्पाद शामिल होंगे। इससे न केवल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
आयोजन को लेकर विभिन्न कोषांगों का गठन
बैठक के दौरान उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने मेले से जुड़ी व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए विभिन्न जिला स्तरीय कोषांगों के गठन की जानकारी दी। इन कोषांगों में शामिल हैं:
- जिला स्तरीय कोर कमेटी
- वित्त प्रबंधन कोषांग
- आवासन एवं परिवहन कोषांग
- स्वच्छता एवं पेयजल कोषांग
- प्रचार-प्रसार कोषांग
- स्वास्थ्य कोषांग
- उद्घाटन एवं समापन समारोह कोषांग
- स्टॉल प्रबंधन कोषांग
- सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रबंधन कोषांग
- भंडारण, कंट्रोल रूम एवं विद्युत व्यवस्था कोषांग
इन सभी कोषांगों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि मेले के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो और आगंतुकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
सुविधाओं और व्यवस्थाओं पर विशेष जोर
बैठक में स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि मेला स्थल पर साफ-सफाई, पर्याप्त पेयजल, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही परिवहन और आवासन की व्यवस्था भी समय रहते दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया, ताकि बाहर से आने वाले प्रतिभागियों और आगंतुकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे आकर्षण का केंद्र
सरस मेले में केवल उत्पादों की बिक्री ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र होंगे। स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक दलों द्वारा पारंपरिक नृत्य, संगीत और लोक कला की प्रस्तुति की योजना बनाई गई है।
इससे मेले को उत्सव का स्वरूप मिलेगा और आगंतुकों को झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का अवसर प्राप्त होगा।
स्वयं सहायता समूहों के लिए बड़ा अवसर
पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला स्वयं सहायता समूहों की दीदियों के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। इस मंच के माध्यम से वे अपने उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकेंगी।
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और उन्हें बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी।
न्यूज़ देखो: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की ठोस पहल
यह खबर बताती है कि जिला प्रशासन ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण को लेकर गंभीर है। पलाश आजीविकोत्सव सरस मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ग्रामीण उत्पादों और हुनर को पहचान दिलाने का सशक्त मंच है। उपायुक्त की अध्यक्षता में तैयारियों की समीक्षा यह सुनिश्चित करती है कि आयोजन व्यवस्थित और प्रभावी होगा। अब यह देखना अहम होगा कि मेले से स्वयं सहायता समूहों की आय और बाजार पहुंच में कितना ठोस बदलाव आता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जब गांव का हुनर चमके, तभी मजबूत बनेगा आत्मनिर्भर भारत
ग्रामीण उत्पादों को सम्मान और बाजार मिलना समय की आवश्यकता है। ऐसे मेलों से गांव की मेहनत को नई पहचान मिलती है।
हर नागरिक का दायित्व है कि वह स्थानीय उत्पादों को अपनाए और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करे।
आप भी सरस मेले में शामिल होकर स्थानीय दीदियों और कारीगरों का उत्साह बढ़ाएं।
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