
#सिमडेगा #धार्मिक_आयोजन : मंदिर प्रांगण में हुई बैठक में दो दिवसीय पूजा मेला को शांतिपूर्ण और भव्य बनाने पर सहमति।
सिमडेगा में भैरव बाबा विकास समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक मंदिर प्रांगण में आयोजित की गई, जिसमें इस वर्ष प्रस्तावित दो दिवसीय पूजा मेला कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में समिति के संरक्षक, पदाधिकारी और ग्रामीणों ने भाग लिया। आयोजन को शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और श्रद्धालु-हितैषी बनाने के लिए विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारियां तय की गईं। समिति ने आपसी समन्वय और सहयोग से धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
- भैरव बाबा विकास समिति की अहम बैठक मंदिर प्रांगण में आयोजित।
- दो दिवसीय पूजा मेला की तैयारियों की समीक्षा की गई।
- संरक्षक, पदाधिकारी और ग्रामीणों की रही सक्रिय भागीदारी।
- व्यवस्था, अनुशासन और शांति पर विशेष जोर दिया गया।
- विभिन्न कार्यों के लिए जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
सिमडेगा जिले में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने की दिशा में भैरव बाबा विकास समिति ने इस वर्ष भी सक्रिय पहल शुरू कर दी है। इसी क्रम में मंदिर प्रांगण में समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी दो दिवसीय भैरव बाबा पूजा मेला कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य केवल आयोजन की रूपरेखा तैयार करना ही नहीं, बल्कि इसे श्रद्धा, अनुशासन और सामाजिक सहभागिता के साथ सफल बनाना रहा।
बैठक में समिति के संरक्षक गण, पदाधिकारी गण के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में यह बात कही कि भैरव बाबा पूजा मेला केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गांव और क्षेत्र की सामूहिक आस्था, एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
दो दिवसीय पूजा मेला की रूपरेखा पर मंथन
बैठक के दौरान इस वर्ष आयोजित होने वाले दो दिवसीय पूजा मेला कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई। पूजा, आरती, भोग, प्रसाद वितरण, श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वच्छता, सुरक्षा और अनुशासन जैसे विषयों पर गंभीरता से चर्चा हुई। समिति के सदस्यों ने पिछले वर्षों के अनुभव साझा किए और यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि इस बार व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो।
सदस्यों ने कहा कि पूजा मेला में दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में उनकी सुविधा और सुरक्षा समिति की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मंदिर परिसर और आसपास साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष योजना बनाने का निर्णय लिया गया।
जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा
बैठक का एक अहम बिंदु विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारियां तय करना रहा। समिति ने पूजा संचालन, मेला व्यवस्था, प्रसाद वितरण, सुरक्षा समन्वय, स्वच्छता व्यवस्था और ग्रामीण समन्वय जैसे अलग-अलग दायित्वों के लिए सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी।
समिति के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि जब जिम्मेदारी स्पष्ट होती है, तो कार्य भी बेहतर तरीके से संपन्न होता है। सभी पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों से अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन करेंगे।
शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण आयोजन पर जोर
बैठक में विशेष रूप से इस बात पर सहमति बनी कि पूजा मेला पूरी तरह शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हो। समिति ने सभी ग्रामीणों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह, अव्यवस्था या विवाद से दूर रहें और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करें।
सदस्यों ने कहा कि भैरव बाबा की पूजा आस्था और अनुशासन का संगम है, इसलिए किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस से भी समन्वय बनाए रखने पर सहमति बनी।
ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने भी अपने सुझाव रखे। कई ग्रामीणों ने कहा कि पूजा मेला गांव के युवाओं को सामाजिक सेवा से जोड़ने का एक अच्छा अवसर है। युवाओं की टीम बनाकर उन्हें व्यवस्था और मार्गदर्शन की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव भी रखा गया।
ग्रामीणों ने भरोसा दिलाया कि वे समिति के हर निर्णय में साथ खड़े रहेंगे और भैरव बाबा पूजा मेला को सफल बनाने के लिए तन-मन-धन से सहयोग करेंगे। बैठक में यह भावना स्पष्ट दिखी कि यह आयोजन किसी एक समिति का नहीं, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र का सामूहिक उत्सव है।
धार्मिक परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक
भैरव बाबा पूजा मेला वर्षों से क्षेत्र में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता का भी प्रतीक रहा है। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं।
समिति ने यह भी निर्णय लिया कि पूजा मेला के दौरान स्वच्छता, अनुशासन और सामाजिक मर्यादा का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं के मन में सकारात्मक संदेश जाए।
न्यूज़ देखो: आस्था के साथ व्यवस्था की मिसाल
भैरव बाबा विकास समिति की यह बैठक दिखाती है कि धार्मिक आयोजनों को यदि योजना, जिम्मेदारी और सामूहिक सहभागिता के साथ किया जाए, तो वे समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। यह पहल न केवल आस्था को मजबूत करती है, बल्कि सामाजिक एकता और अनुशासन का भी संदेश देती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मिलजुल कर निभाएं जिम्मेदारी, परंपरा को दें मजबूती
भैरव बाबा पूजा मेला हम सभी की साझा आस्था और पहचान है। इसे सफल बनाना सिर्फ समिति की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। अपने विचार साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और इस धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण व भव्य बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।






