
#गुमला #राज्यकीय_मेला : ककड़ोलता आदिवासी धार्मिक स्थल पर 23 जनवरी को होने वाले मेले की तैयारी को लेकर बैठक हुई।
गुमला जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत ककड़ोलता आदिवासी धार्मिक स्थल पर 23 जनवरी को आयोजित होने वाले राज्यकीय मेले की तैयारियों को लेकर टांगरडीह ग्राम में बैठक आयोजित की गई। बैठक में मेले को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। आयोजन में सभी गांवों की सहभागिता और सामूहिक जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया गया। यह मेला आदिवासी आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक माना जाता है।
- ककड़ोलता आदिवासी धार्मिक स्थल पर 23 जनवरी को राज्यकीय मेला।
- टांगरडीह ग्राम में तैयारी को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित।
- वरिष्ठ अगुवा जगरनाथ भगत ने की बैठक की अध्यक्षता।
- मोहरलाल उरांव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
- सभी गांवों को जिम्मेदारी सौंपने का सर्वसम्मत निर्णय।
गुमला जिले के डुमरी प्रखंड में स्थित ककड़ोलता आदिवासी धार्मिक स्थल पर आयोजित होने वाला राज्यकीय मेला आदिवासी समाज के लिए आस्था और गौरव का विषय माना जाता है। इसी को लेकर शनिवार को टांगरडीह ग्राम स्थित झखरकुंबा भवन परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मेले की तैयारियों को अंतिम रूप देने पर चर्चा की गई।
वरिष्ठ अगुवा जगरनाथ भगत की अध्यक्षता में बैठक
बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ अगुवा जगरनाथ भगत ने की। उन्होंने कहा कि ककड़ोलता राज्यकीय मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और सामूहिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने सभी से अपील की कि इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए एकजुट होकर कार्य करें।
कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा
बैठक में मुख्य रूप से मोहरलाल उरांव ने आगामी राज्यकीय मेले की कार्यक्रम रूपरेखा पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मेले को पहले से अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और अनुशासित तरीके से आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
मोहरलाल उरांव ने कहा:
“ककड़ोलता आदिवासी धार्मिक स्थल पर लगने वाला यह राज्यकीय मेला हम सभी आदिवासियों के लिए गौरव और आस्था का विषय है। इसे सफल बनाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने बताया कि मेले को लेकर धार्मिक स्थल की विशेष सजावट, साफ-सफाई, आवागमन व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सभी गांवों की होगी अहम भूमिका
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्यकीय मेले की सफलता में प्रखंड क्षेत्र के सभी गांवों की सक्रिय भूमिका होगी। मेले में आने वाले अतिथियों और श्रद्धालुओं के स्वागत की जिम्मेदारी अलग-अलग गांवों को सौंपी जाएगी, ताकि सभी लोग इस आयोजन से सीधे तौर पर जुड़ सकें।
ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से भरोसा दिलाया कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, वे उसे पूरी निष्ठा, अनुशासन और उत्साह के साथ निभाएंगे।
23 जनवरी को होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी
बैठक में 23 जनवरी को आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की भी विस्तृत जानकारी साझा की गई।
इनमें प्रमुख रूप से:
- धार्मिक अनुष्ठान
- पारंपरिक पूजा-पाठ
- सांस्कृतिक कार्यक्रम
- सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन
इन सभी कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
आदिवासी संस्कृति और एकता का पर्व
वरिष्ठ अगुवा जगरनाथ भगत ने कहा कि यह राज्यकीय मेला आदिवासी समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और आपसी एकता को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि सभी लोग मिलकर यदि जिम्मेदारी निभाएं, तो यह मेला न केवल सफल बल्कि ऐतिहासिक भी बनेगा।
बड़ी संख्या में सरना समाज के लोग रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण बैठक में सरना समाज के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
मौके पर जितिया उरांव, अकलू भगत, बीरेंद्र भगत, पदुमन भगत, सुनील उरांव, रामेश उरांव, वासुदेव भगत, मीना देवी, ममता देवी, लीलावती देवी, अनुपा खलखो, आजाद भारत, धनेश्वर भगत, सतेंद्र भगत, सुमित्रा कुमारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और समाज के सदस्य मौजूद थे।
सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में राज्यकीय मेले को सफल बनाने का संकल्प लिया।
तैयारियों को लेकर दिखा उत्साह
बैठक के दौरान ग्रामीणों में आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। लोगों ने कहा कि ककड़ोलता मेला उनकी आस्था से जुड़ा है और इसमें सेवा करना गर्व की बात है। बैठक के अंत में आयोजन से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर आगे की रणनीति तय करने पर भी सहमति बनी।
न्यूज़ देखो: परंपरा और सहभागिता से मजबूत होता समाज
ककड़ोलता राज्यकीय मेला आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक चेतना का प्रतीक है। डुमरी में हुई यह बैठक दर्शाती है कि समाज अपने आयोजनों को लेकर सजग और संगठित है। यदि सभी गांव इसी तरह सहयोग करें, तो यह मेला एक आदर्श राज्यकीय आयोजन के रूप में उभरेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सामूहिक प्रयास से बनेगा ऐतिहासिक आयोजन
राज्यकीय मेला केवल आयोजन नहीं, बल्कि संस्कृति और एकता का उत्सव होता है।
ककड़ोलता मेला आदिवासी समाज की आस्था और परंपरा को नई ऊर्जा देने जा रहा है।
आप भी इस आयोजन से जुड़ें और इसकी सफलता में अपनी भूमिका निभाएं।
खबर को साझा करें ताकि अधिक से अधिक लोग इस सांस्कृतिक पर्व से जुड़ सकें और सामूहिक सहभागिता को मजबूती मिले।





