
#कोलेबिरा #वार्षिक_परीक्षा : विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर लचरागढ़ में शांतिपूर्ण और अनुशासित परीक्षा के लिए तैयारी पूरी।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड स्थित लचरागढ़ के विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में 9 मार्च 2026 से वार्षिक परीक्षा प्रारंभ हो गई है। विद्यालय प्रशासन ने परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और अनुशासित वातावरण में संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। परीक्षा संचालन के लिए आचार्यों और कर्मचारियों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। विद्यालय प्रबंधन ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से सहयोग और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की अपील की है।
- विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय, लचरागढ़ में 9 मार्च 2026 से वार्षिक परीक्षा शुरू।
- परीक्षा संचालन के लिए विद्यालय प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कीं।
- प्रधानाचार्य राजेन्द्र प्रसाद ने परीक्षा को पारदर्शी और अनुशासित वातावरण में कराने की जानकारी दी।
- विद्यार्थियों के बैठने, कक्ष निरीक्षण और प्रश्नपत्र की गोपनीयता के लिए विशेष व्यवस्था।
- विद्यार्थियों से आत्मविश्वास, एकाग्रता और ईमानदारी के साथ परीक्षा में शामिल होने का आह्वान।
- अभिभावकों से बच्चों को समय पर विद्यालय भेजने और सकारात्मक माहौल देने की अपील।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत लचरागढ़ स्थित विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में शैक्षणिक सत्र की वार्षिक परीक्षा 9 मार्च 2026 से प्रारंभ हो गई है। विद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षा को सफल, शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई थीं। परीक्षा के पहले दिन विद्यालय परिसर में अनुशासन और व्यवस्था का माहौल देखने को मिला, जहां विद्यार्थी निर्धारित समय पर पहुंचकर परीक्षा में शामिल हुए।
वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षिक इकाई के अंतर्गत संचालित विद्यालय
लचरागढ़ का विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखंड द्वारा संचालित किया जाता है। यह विद्यालय क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से कार्य कर रहा है।
विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए वार्षिक परीक्षा शैक्षणिक मूल्यांकन का महत्वपूर्ण चरण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विद्यालय प्रशासन ने परीक्षा के आयोजन को लेकर सभी व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित कर ली थीं।
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि परीक्षा केवल विद्यार्थियों के ज्ञान का परीक्षण नहीं बल्कि पूरे वर्ष किए गए अध्ययन, अनुशासन और मेहनत का परिणाम भी होती है।
परीक्षा को पारदर्शी और अनुशासित बनाने की विशेष व्यवस्था
विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि परीक्षा को पारदर्शी और अनुशासित वातावरण में संपन्न कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। विद्यार्थियों के बैठने की उचित व्यवस्था की गई है ताकि सभी परीक्षार्थी शांतिपूर्वक परीक्षा दे सकें।
प्रधानाचार्य राजेन्द्र प्रसाद ने कहा:
“परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और अनुशासित वातावरण में संपन्न कराने के लिए विद्यालय प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। आचार्यों और कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।”
उन्होंने बताया कि प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने, कक्ष निरीक्षण की व्यवस्था और परीक्षा के समयबद्ध संचालन के लिए सभी आचार्यों और कर्मचारियों को अलग-अलग दायित्व दिए गए हैं।
विद्यालय प्रशासन का मानना है कि यदि परीक्षा सुव्यवस्थित वातावरण में आयोजित होती है तो विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है।
विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने की प्रेरणा
विद्यालय के प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वे पूरे आत्मविश्वास और एकाग्रता के साथ परीक्षा में शामिल हों। उन्होंने कहा कि परीक्षा किसी भी विद्यार्थी के जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है, इसलिए इसे सकारात्मक सोच के साथ देना चाहिए।
प्रधानाचार्य राजेन्द्र प्रसाद ने कहा:
“वर्षभर की मेहनत, अनुशासन और नियमित अध्ययन ही विद्यार्थियों की सफलता का आधार बनता है। यदि छात्र-छात्राएं पूरे मन से परीक्षा देंगे तो निश्चित रूप से उन्हें अच्छे परिणाम मिलेंगे।”
विद्यालय के आचार्यों ने भी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान शांत और एकाग्र रहने की सलाह दी।
अभिभावकों से सहयोग की अपील
विद्यालय प्रशासन ने अभिभावकों से भी सहयोग की अपील की है। प्रबंधन का कहना है कि बच्चों की सफलता में अभिभावकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
अभिभावकों से आग्रह किया गया है कि वे अपने बच्चों को समय पर विद्यालय भेजें और उन्हें घर पर पढ़ाई के लिए सकारात्मक वातावरण प्रदान करें। इससे विद्यार्थी बिना किसी तनाव के परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
विद्यालय परिवार का मानना है कि जब विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक तीनों मिलकर सहयोग करते हैं, तभी शिक्षा का उद्देश्य सफल होता है।
बेहतर परिणाम की उम्मीद
विद्यालय प्रशासन को विश्वास है कि विद्यार्थियों की मेहनत, आचार्यों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग से इस वर्ष की वार्षिक परीक्षा बेहतर परिणाम लेकर आएगी।
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि शिक्षा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और भविष्य की नींव तैयार करने का माध्यम भी है।
इसी उद्देश्य के साथ विद्यालय निरंतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुशासन पर बल देता रहा है।
न्यूज़ देखो: शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन का महत्वपूर्ण उदाहरण
लचरागढ़ के विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में वार्षिक परीक्षा की सुव्यवस्थित तैयारी शिक्षा व्यवस्था के प्रति गंभीरता को दर्शाती है। जब विद्यालय प्रशासन पारदर्शिता, अनुशासन और बेहतर व्यवस्था पर ध्यान देता है, तो इससे विद्यार्थियों को सकारात्मक और प्रेरक माहौल मिलता है।
ऐसे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे न केवल विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस वर्ष के परीक्षा परिणाम किस तरह विद्यार्थियों के भविष्य की नई दिशा तय करते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव
हर विद्यार्थी के जीवन में परीक्षा केवल एक मूल्यांकन नहीं बल्कि मेहनत और सपनों की परीक्षा भी होती है। यदि छात्र-छात्राएं लगन, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें तो सफलता निश्चित होती है।
शिक्षा समाज को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी शक्ति है। इसलिए विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को मिलकर शिक्षा के इस सफर को और मजबूत बनाना चाहिए।
आपके आसपास भी शिक्षा से जुड़ी सकारात्मक पहल हो रही है, तो उसे जरूर साझा करें ताकि प्रेरणा की यह कहानी और लोगों तक पहुंचे।






