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गिरिडीह में जंगली हाथियों की मौजूदगी से सतर्कता बढ़ी, ग्रामीणों को दिए गए महत्वपूर्ण सुरक्षा निर्देश

#गिरिडीह #जंगली_हाथी : क्षेत्र में हाथियों का दल सक्रिय, एक सदस्य के घायल होने से बढ़ी सतर्कता—ग्रामीणों को घरों में रहने और सावधानी बरतने की अपील
  • गिरिडीह क्षेत्र में जंगली हाथियों का दल सक्रिय।
  • दल का एक हाथी घायल, बाकी सदस्य उसके पास रुके रहने की आशंका।
  • ग्रामीणों को घर व सुरक्षित स्थान में रहने की हिदायत।
  • हाथियों को तनाव में डालने, सेल्फी-वीडियो बनाने से मना किया गया।
  • वन विभाग ने दूरी बनाए रखने, सूचना साझा करने और जमावड़ा न लगाने की अपील की।

गिरिडीह जिले के कई क्षेत्रों में इन दिनों जंगली हाथियों का एक बड़ा दल सक्रिय है। सूचना के अनुसार, झुंड का एक सदस्य घायल है, जिसके कारण पूरा दल लंबे समय तक आसपास के इलाकों में रुक सकता है। इसी स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि वे पूरी सावधानी बरतें, घरों में रहें और हाथियों को किसी भी प्रकार से तनाव में न डालें। हाल के वर्षों में मनुष्य—वन्यजीव टकराव की घटनाएँ बढ़ी हैं, जिनमें अक्सर ग्रामीणों की असावधानी बड़ा कारण बनती है। विभाग ने स्पष्ट कहा है कि हाथियों के पास जाना, भीड़ लगाना या वीडियो बनाने जैसी हरकतें दुर्घटना को आमंत्रण देती हैं।

हाथी दल के सक्रिय होने पर वन विभाग की प्रमुख अपील

वन विभाग ने कहा कि हाथियों के दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी वन कर्मी को सूचना दें। उन्होंने ग्रामीणों से यह भी अनुरोध किया कि वे हाथियों को देखने की जिज्ञासा में उनके पास न जाएँ और किसी भी परिस्थिति में उनके रास्ते को न रोकें। विभाग का कहना है कि कम से कम 100 मीटर दूरी बनाए रखना ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। कई मामलों में देखा गया है कि लोगों द्वारा हाथियों को भगाने या जंगल में उनका पीछा किए जाने पर वे बेचैन और आक्रामक हो जाते हैं।

खेत–खलिहान और घरों के आसपास बरती जाए अतिरिक्त सावधानी

जंगल से लगे गांवों में खलिहान न बनाने तथा रात में वहां न सोने की सलाह दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि हाथी अक्सर अनाज की गंध से आकर्षित होकर गांवों की ओर आते हैं, और ऐसे समय में यदि उन्हें छेड़ा जाए तो दुर्घटना हो सकती है। हाथी यदि खेत या घर के पास खड़ा हो जाए और भोजन खा रहा हो, तो उसे रोकने का प्रयास बिल्कुल नहीं करना चाहिए। विभाग ने आश्वासन दिया है कि नुकसान की स्थिति में उचित मुआवजा दिया जाएगा, इसलिए किसी भी घटना की तुरंत सूचना अधिकारी को दें।

हाथियों को न छेड़ें, पत्थर या जलते पदार्थ फेंकना खतरनाक

ग्रामीणों से यह भी अपील की गई है कि हाथियों के आसपास भीड़ न लगाएँ और उन्हें किसी भी वस्तु से चोट पहुँचाने का प्रयास न करें। विशेषकर पत्थर, गुलेल, तीर या जलता हुआ टायर फेंकने की घटनाएँ हाथियों को अत्यधिक हिंसक बना सकती हैं। यह व्यवहार न केवल पंचायत क्षेत्रों बल्कि आसपास के गांवों के निवासियों के लिए भी खतरा बन जाता है।

शराब का भंडारण न करें, क्योंकि हाथी उसकी गंध से आकर्षित होते हैं

वन विभाग ने चेतावनी दी है कि जिस क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी हो, वहां हड़िया या देशी शराब का निर्माण और भंडारण तुरंत बंद किया जाए। हाथी इन चीजों की गंध से गांवों में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।

रोशनी, मिर्च और विशेष रस्सी का उपयोग

बिजली वाले गांवों से कहा गया है कि वे घरों और खंभों पर तेज रोशनी वाले बल्ब लगाएं, ताकि हाथी अंधेरे का लाभ लेकर गांव में प्रवेश न कर सकें। हाथियों की तेज सूँघने की शक्ति को ध्यान में रखते हुए हवा की दिशा देखकर मिर्च का धुआँ करना प्रभावी तरीका बताया गया है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे मिर्च पाउडर को जले हुए मोबिल या ग्रीस में मिलाकर मोटी रस्सी में लपेटें और इसे अनाज संग्रहण स्थल या गांव के प्रवेश मार्ग पर बांधें। रस्सी पर लाल या सफेद कपड़े की पट्टी लगाने से भी हाथियों के आने की संभावना कम होती है।

वन प्रबंधन समिति को सतर्क रहने का निर्देश

वन प्रबंधन समिति और इको विकास समिति की टीमों को निर्देश दिया गया है कि वे रात में शिविर लगाकर हाथियों की गतिविधियों की निगरानी करें और समय–समय पर ग्रामीणों को सतर्क करते रहें। विभाग का कहना है कि सामुदायिक भागीदारी से ही हाथी–मानव संघर्ष को कम किया जा सकता है।

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न्यूज़ देखो: सतर्कता ही सुरक्षा, मानव–वन्यजीव संतुलन जरूरी

जंगली हाथियों की बढ़ती गतिविधि उन क्षेत्रों के लिए प्राकृतिक चुनौती है जहाँ जंगल और आबादी आमने-सामने हैं। प्रशासन और ग्रामीण दोनों की जिम्मेदारी है कि सतर्कता और समझदारी से दुर्घटनाओं को रोका जाए। यह निर्देश केवल सुरक्षा उपाय नहीं, बल्कि मानव–वन्यजीव सहअस्तित्व का आधार हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सावधानी अपनाएँ, संघर्ष नहीं—सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी

हाथियों से जुड़ी दुर्घटनाएँ अक्सर असावधानी के कारण होती हैं, इसलिए आज जरूरत है कि हर ग्रामीण जागरूकता और संयम का पालन करे। अपने गांव, परिवार और प्राकृतिक वन्यजीवों की सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। अपनी राय कमेंट करें, यह खबर साझा करें और आसपास के लोगों को भी सचेत करें—ताकि सुरक्षा हर घर तक पहुंच सके।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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