ग्रामीणों के विरोध में स्थगित हुई पत्थर खदान की जन सुनवाई

ग्रामीणों के विरोध में स्थगित हुई पत्थर खदान की जन सुनवाई

author Saroj Verma
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#दुमका #जन_सुनवाई : शिकारीपाड़ा प्रखंड के बैनागड़िया मौजा में पत्थर खदान के लिए होने वाली जन सुनवाई में ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया
  • दुमका के शिकारीपाड़ा प्रखंड के बैनागड़िया मौजा में पत्थर खदान के लिए जन सुनवाई आयोजित की गई थी।
  • सुनवाई चिरापाथर में शुरू की गई, जिसे लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया।
  • सीओ कपिल देव ठाकुर ने हंगामे के बाद सुनवाई को स्थगित कर नई तिथि तय करने की घोषणा की।
  • अधिकारी और संबंधित टीम बैरंग लौट गई, और मामला फिलहाल स्थगित हो गया।
  • ग्रामीणों का कहना है कि खदान से उनके जीवन और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है, इसलिए वे जन सुनवाई में भाग लेने और अपनी आवाज़ उठाने के लिए जुटे।

शिकारीपाड़ा प्रखंड के बैनागड़िया मौजा में पत्थर खदान के लिए नियोजित जन सुनवाई का विरोध स्थानीय ग्रामीणों ने जोरदार तरीके से किया। सुनवाई चिरापाथर में शुरू होते ही ग्रामीणों ने यह कहते हुए विरोध किया कि खदान परियोजना से उनके जीवन, कृषि और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विरोध प्रदर्शन के बाद सीओ कपिल देव ठाकुर ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए सुनवाई स्थगित कर दी और नई तिथि पर पुनः आयोजन करने का आश्वासन दिया। अधिकारियों की टीम को वापस लौटना पड़ा।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पत्थर खदान परियोजना के चलते उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित होगी। पानी, खेत और आसपास का पर्यावरण खतरों में पड़ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी अनुमति और सहभागिता के बिना कोई भी परियोजना शुरू नहीं होनी चाहिए।

ग्रामीण प्रतिनिधि ने कहा: “हम अपनी जमीन और पर्यावरण के लिए खड़े हैं। बिना हमारी सहमति के कोई खदान नहीं चल सकती।”

प्रशासन की भूमिका और आगे की कार्रवाई

सीओ कपिल देव ठाकुर ने कहा कि जन सुनवाई को स्थगित करना ही उचित निर्णय था। उन्होंने आश्वस्त किया कि नई तिथि पर सभी पक्षों को आमंत्रित किया जाएगा और सभी ग्रामीणों की आवाज़ सुनने के बाद ही परियोजना से संबंधित निर्णय लिया जाएगा।

न्यूज़ देखो: ग्रामीणों ने अपनी आवाज़ बुलंद कर प्रशासन को सतर्क किया

यह घटना दिखाती है कि जब जनता अपने हक और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एकजुट होती है, तो प्रशासन को भी सुनवाई स्थगित करनी पड़ती है और पुनः विचार करना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों ने स्पष्ट संदेश दिया कि परियोजना में उनकी सहमति और सहभागिता अनिवार्य है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

ग्रामीणों की भागीदारी और जागरूकता से पर्यावरण की रक्षा

स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी यह सिद्ध करती है कि समाज में जागरूकता और सहभागिता से ही योजनाओं को जिम्मेदारीपूर्वक लागू किया जा सकता है। अपनी राय साझा करें, इस खबर को मित्रों और परिवार के साथ साझा करें और स्थानीय परियोजनाओं में सचेत नागरिक बनें।

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Written by

दुमका/देवघर

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