
#बरवाडीह #पीडीएस_राशन : खराब चावल मिलने की शिकायत — लाभुकों ने जांच और कार्रवाई की उठाई मांग।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले चावल की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कई राशन दुकानों पर लाभुकों को कीड़े लगे और बदबूदार चावल मिलने की शिकायत सामने आई है। खराब गुणवत्ता के कारण कई कार्डधारी चावल लेने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
- बरवाडीह प्रखंड में पीडीएस के चावल की गुणवत्ता पर उठे सवाल।
- कई राशन दुकानों पर कीड़े लगे और बदबूदार चावल मिलने की शिकायत।
- एफसीआई गोदाम से भेजे गए चावल की गुणवत्ता खराब होने का आरोप।
- राशन डीलरों ने भी चावल की गुणवत्ता ठीक नहीं होने की बात कही।
- ग्रामीणों और लाभुकों ने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड में इस बार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले चावल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रखंड क्षेत्र के कई जनवितरण प्रणाली (राशन) दुकानों पर लाभुकों को खराब और कीड़े लगे चावल मिलने की शिकायत सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गरीबों और जरूरतमंदों के लिए सस्ता और गुणवत्ता वाला अनाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था करती है, लेकिन इस बार जो चावल वितरित किया जा रहा है, उसकी स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है।
एफसीआई गोदाम से खराब चावल भेजे जाने का आरोप
बताया जा रहा है कि बरवाडीह आपूर्ति विभाग की ओर से एफसीआई गोदाम से प्रखंड के कई राशन डीलरों को जो चावल उपलब्ध कराया गया है, उसकी गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है।
लाभुकों का कहना है कि चावल में कीड़े लगे हुए हैं और उसमें बदबू भी आ रही है, जिससे इसे खाना मुश्किल हो रहा है। इस कारण कई कार्डधारी चावल लेने से भी कतरा रहे हैं।
राशन डीलरों ने भी जताई असहजता
कुछ राशन डीलरों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इस बार गोदाम से जो चावल उन्हें मिला है, उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं है। उनका कहना है कि वे खुद भी लाभुकों को ऐसा चावल देने में असहज महसूस कर रहे हैं।
हालांकि डीलरों का कहना है कि गोदाम से जो अनाज उपलब्ध कराया जाता है, वही उन्हें वितरण करना पड़ता है, इसलिए वे मजबूरी में वही चावल कार्डधारियों को दे रहे हैं।
लाभुकों में नाराजगी, कई लोगों ने चावल लेने से किया इनकार
खराब चावल मिलने से क्षेत्र के लाभुकों में नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि जो चावल दिया जा रहा है, वह खाने योग्य नहीं है।
कुछ कार्डधारियों ने तो राशन दुकानों से चावल लेने से ही परहेज करना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गरीबों के लिए अनाज भेजती है, लेकिन यदि वही अनाज खराब हालत में पहुंचे तो इसका कोई लाभ नहीं रह जाता।
प्रशासन से जांच की मांग
ग्रामीणों और लाभुकों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गोदाम से लेकर राशन दुकानों तक चावल की गुणवत्ता की जांच की जानी चाहिए।
लोगों ने मांग की है कि यदि कहीं भी लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों को सही और खाने योग्य राशन मिल सके।
न्यूज़ देखो विशेष: गरीबों के हक के राशन की गुणवत्ता जरूरी
सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए जीवन रेखा की तरह है। ऐसे में राशन की गुणवत्ता खराब होना गंभीर चिंता का विषय है। यदि अनाज ही खाने योग्य नहीं होगा तो योजना का उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा। इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वितरण से पहले गुणवत्ता की कड़ी जांच सुनिश्चित करे।
गरीबों के अधिकार की रक्षा जरूरी
सरकारी योजनाएं तभी सफल मानी जाती हैं जब उनका लाभ सही रूप में लोगों तक पहुंचे। राशन जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही गरीबों के अधिकारों के साथ अन्याय के समान है।
जरूरी है कि समाज और प्रशासन मिलकर ऐसी समस्याओं को समय रहते सामने लाएं और समाधान सुनिश्चित करें। यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी समस्या है तो उसकी जानकारी जरूर साझा करें।
अपनी राय कमेंट में लिखें और खबर को अधिक से अधिक लोगों तक जरूर पहुंचाएं।






