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बानो हनुमान पहाड़ी मंदिर निर्माण में रेलवे कर्मियों का श्रमदान, जय बजरंग बली के जयघोष से गूंजा पहाड़

#बानो #सिमडेगा #धार्मिक_निर्माण : हनुमान मंदिर निर्माण में सामूहिक श्रमदान।

सिमडेगा जिले के बानो मुख्यालय स्थित हनुमान पहाड़ी पर वर्षों से निर्माणाधीन मंदिर में गुरुवार को सामूहिक श्रमदान किया गया। रेलवे के दोहरीकरण कार्य में पहुंचे लगभग 100 कर्मियों ने निर्माण सामग्री पहाड़ी पर चढ़ाने में सहयोग किया। रेल टेल कंपनी और जीआरपी कर्मियों ने भी भागीदारी निभाई। मंदिर समिति ने सभी सहयोगियों के लिए भंडारा आयोजित किया।

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  • हनुमान पहाड़ी, बानो में वर्षों से मंदिर निर्माण जारी।
  • रेलवे दोहरीकरण कार्य से पहुंचे लगभग 100 कर्मियों ने दिया श्रमदान।
  • टीपी मनोहरन की पहल पर मिली सहयोग की सहमति।
  • रेल टेल कंपनी और बानो जीआरपी कर्मियों की भागीदारी।
  • मंदिर समिति ने सहयोगियों के लिए भंडारा कराया।

सिमडेगा जिले के बानो मुख्यालय स्थित हनुमान पहाड़ी पर हनुमान मंदिर का निर्माण कार्य कई वर्षों से चल रहा है। स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का निर्माण चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। पिछले वर्षों में एक समिति का गठन कर निर्माण कार्य में गति लाई गई, जिसके बाद समय-समय पर श्रमदान कर ईंट, बालू, छड़ और अन्य आवश्यक सामग्रियां ऊंची पहाड़ी पर चढ़ाई जाती रही हैं।

इसी क्रम में इस बार दक्षिण पूर्व रेलवे के बानो सेक्शन में रेल लाइन के दोहरीकरण कार्य के सिलसिले में लगभग 100 रेलवे कर्मी बानो पहुंचे। मंदिर निर्माण की जानकारी मिलने पर रेलवे कर्मियों ने सहयोग की इच्छा जताई।

जानकारी से सहयोग तक की पहल

बताया गया कि रेलवे कर्मी टीपी मनोहरन को मंदिर निर्माण कार्य के बारे में जानकारी दी गई। निर्माण कार्य और श्रमदान की परंपरा से अवगत होने के बाद उन्होंने अन्य कर्मियों से चर्चा की। इसके बाद रेलवे कर्मियों ने सामूहिक रूप से सहयोग करने का निर्णय लिया।

गुरुवार की दोपहर बाद सभी रेलवे कर्मी जयघोष के साथ हनुमान पहाड़ी पहुंचे। “जय बजरंग बली” और “जय श्री राम” के नारों से पहाड़ी क्षेत्र गूंज उठा। इसके बाद सभी ने हाथों-हाथ निर्माण सामग्री को पहाड़ी पर चढ़ाने में योगदान दिया।

रेल टेल कंपनी और जीआरपी की भागीदारी

रेलवे कर्मियों के साथ-साथ रेल टेल कंपनी के कर्मचारियों ने भी उत्साहपूर्वक श्रमदान किया। कार्य के दौरान सामूहिक सहयोग और समन्वय का भाव स्पष्ट दिखाई दिया।

मंदिर निर्माण में सहयोग की जानकारी मिलने पर बानो जीआरपी (Government Railway Police) के कर्मचारियों ने भी मौके पर पहुंचकर सहयोग किया। सभी ने मिलकर ईंट, बालू और अन्य आवश्यक सामग्री पहाड़ी के ऊपरी हिस्से तक पहुंचाई।

मंदिर समिति के एक सदस्य ने कहा:

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“वर्षों से यह मंदिर निर्माणाधीन है। स्थानीय लोगों के साथ अब बाहर से आए रेलवे कर्मियों का सहयोग मिलना हमारे लिए प्रेरणादायक है। इससे निर्माण कार्य को और गति मिलेगी।”

वर्षों से जारी है सामूहिक प्रयास

हनुमान पहाड़ी पर मंदिर निर्माण का कार्य स्थानीय आस्था और सामूहिक प्रयास का परिणाम है। पहाड़ी की ऊंचाई के कारण निर्माण सामग्री ऊपर पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन ग्रामीण और श्रद्धालु समय-समय पर श्रमदान कर इस कार्य को आगे बढ़ाते रहे हैं।

समिति के सदस्यों के अनुसार, मंदिर निर्माण के लिए पहले भी कई बार सामूहिक श्रमदान किया गया है। ईंट, बालू, छड़ समेत अन्य सामग्री लोगों ने अपने कंधों पर ढोकर पहाड़ी पर पहुंचाई है। रेलवे कर्मियों की भागीदारी ने इस अभियान को नई ऊर्जा दी है।

भंडारा का आयोजन

मंदिर समिति की ओर से सभी सहयोगी रेलवे कर्मियों और अन्य श्रद्धालुओं के लिए भंडारा का आयोजन किया गया। श्रमदान के बाद सभी ने प्रसाद ग्रहण किया और सामूहिक रूप से मंदिर निर्माण कार्य की सफलता की कामना की।

मौके पर प्रेमानन्द उपाध्याय, टीपी मनोहरन, विवेक झा, अमित साहू, शिव शंकर साहू, कृपाल सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा। सभी ने मिलकर निर्माण कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई।

न्यूज़ देखो: आस्था और सहभागिता का संगम

हनुमान पहाड़ी पर मंदिर निर्माण में रेलवे कर्मियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि सामुदायिक सहयोग से कठिन से कठिन कार्य भी संभव हो सकते हैं। धार्मिक आस्था के साथ श्रमदान की परंपरा समाज को जोड़ने का माध्यम बनती है। क्या ऐसे सामूहिक प्रयास अन्य विकास कार्यों में भी मिसाल बन सकते हैं? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मिलकर करें निर्माण, आस्था के साथ जिम्मेदारी भी निभाएं

सामूहिक श्रमदान केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है।
जब अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक उद्देश्य से जुड़ते हैं, तो सकारात्मक बदलाव संभव होता है।

अपने क्षेत्र में चल रहे जनहित कार्यों में भाग लें।
यदि आपके गांव या शहर में भी ऐसा प्रेरक प्रयास हो रहा है, तो हमें बताएं।
अपनी राय साझा करें और खबर को आगे बढ़ाएं, ताकि सहयोग और सहभागिता की यह भावना और मजबूत हो सके।

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Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

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