
#गिरिडीह #ट्रैफिक_जाम : प्रशासन की पहल से 24 घंटे में समाधान संभव — राजेश सिन्हा।
गिरिडीह में बढ़ती ट्रैफिक जाम की समस्या को लेकर माले नेता राजेश सिन्हा ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए तो 24 घंटे के भीतर जाम की समस्या का समाधान किया जा सकता है। एक साल पहले हुई बैठक में दिए गए सुझावों को अब तक लागू नहीं किया गया। शहर में अव्यवस्थित यातायात और अधूरे विकास कार्यों से आम जनता परेशान है।
- माले नेता राजेश सिन्हा ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।
- 24 घंटे में जाम समस्या समाधान संभव — प्रशासन की पहल जरूरी।
- एक साल पहले बैठक में टोटो-ऑटो के लिए चार जोन बनाने का सुझाव दिया गया था।
- नगर निगम पर सुझावों को लागू नहीं करने का आरोप।
- बड़ा चौक फोर लेन पर अवैध जाम और नियंत्रण की कमी।
- अधूरा फोर लेन निर्माण और रिंग रोड की आवश्यकता पर जोर।
गिरिडीह शहर में लगातार बढ़ती जाम की समस्या को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर आवाज उठने लगी है। माले नेता राजेश सिन्हा ने इस मुद्दे पर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि समस्या का समाधान पूरी तरह प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर निर्भर है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में दिए गए सुझावों को नजरअंदाज करना स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
प्रशासन की पहल से ही संभव समाधान
राजेश सिन्हा ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जिला प्रशासन ठान ले तो जाम की समस्या को 24 घंटे के भीतर नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी को मुख्य कारण बताया।
राजेश सिन्हा ने कहा: “प्रशासन ने चाह लिया तो 24 घंटे में गिरिडीह का जाम सिस्टम पूरी तरह ठीक हो सकता है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर अपेक्षित ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे शहर की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।
टोटो-ऑटो के लिए जोन व्यवस्था का प्रस्ताव
राजेश सिन्हा ने एक साल पहले हुई एक महत्वपूर्ण बैठक का जिक्र किया, जिसमें अनुमंडल पदाधिकारी, तीन डीएसपी, एक एसडीपीओ, तीन थाना प्रभारी और ट्रैफिक इंचार्ज सहित विभिन्न दलों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
उस बैठक में उन्होंने टोटो और ऑटो संचालन के लिए चार अलग-अलग जोन बनाने का सुझाव दिया था:
- पचंबा जोन
- बरवाडीह जोन
- मधुबन होटल जोन
- बस स्टैंड जोन
उन्होंने प्रस्ताव रखा था कि हर जोन के वाहनों को अलग रंग के स्टीकर और नंबर दिए जाएं, ताकि वे अपने निर्धारित क्षेत्र में ही चलें और दूसरे जोन में प्रवेश न करें।
लेकिन, उनके अनुसार नगर निगम की सुस्ती के कारण यह व्यवस्था आज तक लागू नहीं हो सकी, जिससे शहर में अव्यवस्था बनी हुई है।
बड़ा चौक और फोर लेन पर अव्यवस्था
राजेश सिन्हा ने बड़ा चौक फोर लेन पर लगने वाले जाम को भी गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि यहां बिना किसी अधिकार के सड़क को जाम किया जाता है और इसमें जनप्रतिनिधियों के तालमेल की भी भूमिका होती है।
राजेश सिन्हा ने कहा: “बड़ा चौक फोर लेन को जाम करना गलत है, लेकिन इस पर भी प्रशासन सुस्त नजर आता है।”
उन्होंने कहा कि प्रशासन की निष्क्रियता और जनता की उदासीनता के कारण गिरिडीह की स्थिति लगातार खराब हो रही है।
अधूरे फोर लेन निर्माण पर सवाल
फोर लेन सड़क निर्माण कार्य को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना है कि एक साल में पूरा होने वाला काम ढाई साल में भी अधूरा है।
विशेष रूप से उन्होंने भंडारीडीह के पास पूजा के समय सड़क में गड्ढा किए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि यह कार्य समय रहते पूरा किया जा सकता था।
उन्होंने प्रशासन से इस मामले में भी संज्ञान लेने की मांग की और निर्माण कार्य में तेजी लाने पर जोर दिया।
रिंग रोड की जरूरत पर जोर
राजेश सिन्हा ने गिरिडीह में रिंग रोड निर्माण की आवश्यकता को भी प्रमुखता से उठाया। उनका मानना है कि शहर के बाहर से आने वाले भारी वाहनों को यदि रिंग रोड के माध्यम से डायवर्ट किया जाए, तो शहर के अंदर जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि जनप्रतिनिधि इस दिशा में जल्द पहल करेंगे और शहर को जाम की समस्या से राहत मिलेगी।
न्यूज़ देखो: जाम से जूझता गिरिडीह और प्रशासन की चुनौती
गिरिडीह में ट्रैफिक जाम की समस्या केवल यातायात का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रबंधन की बड़ी परीक्षा बन चुकी है। राजेश सिन्हा द्वारा उठाए गए मुद्दे यह दर्शाते हैं कि समाधान के लिए स्पष्ट योजना और सख्त क्रियान्वयन की जरूरत है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन सुझावों को अमल में लाएगा और शहर को राहत दिला पाएगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक बनें और अपने शहर के लिए आवाज उठाएं
जाम की समस्या केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की भी भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
सही दिशा में वाहन चलाना, नियमों का पालन करना और गलत गतिविधियों का विरोध करना जरूरी है।
अपने शहर की समस्याओं पर चुप न रहें, बल्कि समाधान के लिए आवाज उठाएं और दूसरों को भी जागरूक करें।
अपनी राय कमेंट में जरूर दें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें और मिलकर गिरिडीह को बेहतर बनाने की पहल करें।


