#गढ़वा | रामनवमी की तैयारियों को मिला पूर्व मंत्री का समर्थन, बोले- अखाड़ों के साथ हूं कंधे से कंधा मिलाकर :
- रामनवमी को लेकर गढ़वा जिले में उमंग और उत्साह का माहौल
- पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने पर्व को लेकर जनता को दी शुभकामनाएं
- कहा – सभी अखाड़ा समितियों के साथ खड़ा हूं, हर संभव सहयोग दूंगा
- रामनवमी को बताया सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
- जिला प्रशासन से सुरक्षा, सफाई और बिजली व्यवस्था दुरुस्त रखने की अपील
रामनवमी पर उत्सव का माहौल, पूर्व मंत्री ने जताई भावनाएं
गढ़वा जिले में रामनवमी पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजारों में रौनक है, मंदिरों में भजन-कीर्तन की ध्वनि गूंज रही है और युवाओं की टोली अभ्यास में व्यस्त नजर आ रही है।
इसी बीच पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने रामनवमी की तैयारियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि:
“रामनवमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।”
अखाड़ा समितियों को दिया भरोसा
पूर्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे सभी अखाड़ा समितियों के साथ मजबूती से खड़े हैं और पर्व को शांतिपूर्ण एवं भव्य बनाने में हर संभव सहयोग देने को तैयार हैं।
“गढ़वा की जनता धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत है। रामनवमी के अवसर पर अखाड़ों के जो परंपरागत जुलूस निकलते हैं, वह हमारी संस्कृति की पहचान हैं। हम इनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।”
— मिथिलेश कुमार ठाकुर, पूर्व मंत्री
प्रशासन से की विशेष अपील
मंत्री श्री ठाकुर ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से विशेष तैयारी सुनिश्चित करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि जुलूस मार्गों की सफाई, रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए ताकि कोई असुविधा या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
नगर में दिख रही रामनवमी की भव्यता
रामनवमी को लेकर गढ़वा नगर पूरी तरह भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आ रहा है। मंदिरों में पूजा-पाठ और रात्रि भजन-कीर्तन का दौर चल रहा है। जगह-जगह भगवा ध्वज, तोरण द्वार और सजावट ने माहौल को पूरी तरह त्योहारी बना दिया है।
युवाओं की टोली में जोश और अनुशासन दोनों देखने को मिल रहे हैं। माता-पिता भी बच्चों को पारंपरिक अभ्यासों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। रामनवमी अब आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक बन गई है।
‘न्यूज़ देखो’ की तत्पर रिपोर्टिंग
गढ़वा में जब-जब पर्व आते हैं, तब-तब अखाड़ों की ललकार और जनता की भागीदारी इस शहर को एक संस्कृति और ऊर्जा का केंद्र बना देती है। ‘न्यूज़ देखो’ आपके विश्वास और परंपरा को समझते हुए हर पर्व और हर पहल को पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से कवर करता है, ताकि आपकी भावनाओं तक सही खबर तुरंत पहुंचे।
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