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रांची में बच्चों ने विकसित भारत 2047 के रंगों और कल्पनाशक्ति से दिखाई उज्ज्वल भविष्य की झलक

#रांची #चित्रकला_प्रतियोगिता : DPS रांची में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में बच्चों ने भारत के उज्ज्वल भविष्य को अपनी चित्रकला के माध्यम से दर्शाया
  • संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन।
  • कार्यक्रम का उद्घाटन रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने किया।
  • प्रमुख अतिथि के रूप में पद्मश्री मुकुंद नायक, पद्मश्री महावीर नायक, डॉ० कुमार संजय झा, डॉ० कमल बोस, संतोष कुमार सिंह, आलोक पाठक उपस्थित।
  • प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों की कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता को विकसित भारत 2047 से जोड़ना।
  • बच्चों ने चित्रों में विज्ञान, तकनीक, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, संस्कृति और आधुनिक उद्योग को चित्रित किया।

रांची के DPS में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की चित्रकला प्रतियोगिता में देशभर के बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की पहल से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने किया। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बच्चों की कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ना है। इस दौरान कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि पद्मश्री मुकुंद नायक, पद्मश्री महावीर नायक, डॉ० कुमार संजय झा, डॉ० कमल बोस, संतोष कुमार सिंह, आलोक पाठक समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

बच्चों ने प्रस्तुत किए भारत के उज्ज्वल भविष्य के चित्र

प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी सोच और सपनों को कागज़ पर उतारा। कई बच्चों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र को चित्रित किया, तो कई ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ भारत की परिकल्पना को चित्रों में उकेरा। इसके साथ ही बच्चों ने भारत की समृद्ध संस्कृति, आधुनिक उद्योग, स्टार्टअप्स और स्थानीय नवाचार को भी प्रस्तुत किया। इस प्रकार यह केवल कला का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि आने वाले भारत की झलक के रूप में सामने आया।

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा: “बच्चों की रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति ही हमारे देश का उज्ज्वल भविष्य तय करेगी। ऐसे कार्यक्रम उन्हें प्रेरित करते हैं और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं।”

कार्यक्रम की विशेषताएँ और उद्देश्य

“विकसित भारत 2047 के रंग, कला के संग” कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि को साकार करने का प्रयास है। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत जैसी पहलों के प्रति जागरूकता विकसित की जा रही है। इस प्रतियोगिता से बच्चों को अपने विचारों और सपनों को व्यक्त करने का अवसर मिलता है और उन्हें यह समझ में आता है कि उनका योगदान राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण है।

पद्मश्री मुकुंद नायक ने कहा: “यह प्रतियोगिता केवल चित्रकला तक सीमित नहीं है, यह बच्चों में भविष्य के लिए सोचने और सपने देखने की क्षमता विकसित करती है।”

इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों ने बच्चों की रचनात्मकता की सराहना की और उन्हें भविष्य के भारत के ब्रांड एंबेसडर बताया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चे अपनी कल्पनाशक्ति के माध्यम से यह संदेश दे रहे हैं कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना अब केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर बच्चे, परिवार और समाज का साझा संकल्प बन चुका है।

न्यूज़ देखो: बच्चों की कला में दिखाई दे रहा भारत का उज्ज्वल भविष्य

यह कार्यक्रम दर्शाता है कि बच्चों की प्रतिभा और सृजनशीलता ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। उनकी कल्पनाशक्ति में भारत को विकसित बनाने की दिशा की स्पष्ट झलक है। ऐसे आयोजन बच्चों को प्रेरित करने और समाज में रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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बच्चों की कल्पनाशक्ति से बनाएं मजबूत भविष्य

बच्चों की प्रतिभा और रचनात्मक सोच से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। उनके सपनों और रचनाओं में समाहित विचार हमारे राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं। आइए हम सभी बच्चों की इस प्रतिभा को सराहें, उन्हें उत्साहित करें और समाज में सृजनशीलता को प्रोत्साहित करें। इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें और इसे साझा करें ताकि और लोग भी बच्चों की प्रतिभा और भविष्य निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित हों।

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Braj Snehi

रांची

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