
#लातेहार #राशन_वितरण : पीडीएस दुकान पर लाभुकों का आक्रोश, डीलर पर अनाज रोकने का गंभीर आरोप।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत चपरी गांव में जन वितरण प्रणाली के तहत राशन वितरण को लेकर शनिवार को तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। कार्डधारियों ने आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 का खाद्यान्न उठाव होने के बावजूद उन्हें अब तक राशन नहीं दिया गया। लाभुकों के विरोध और हंगामे के बाद मामले की जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
- चपरी गांव में पीडीएस दुकान पर कार्डधारियों का हंगामा।
- डीलर नागेश्वर राम पर दिसंबर 2025 का राशन नहीं बांटने का आरोप।
- कई दिनों से सर्वर समस्या का हवाला देकर राशन वितरण टालने की शिकायत।
- पर्ची कटने के बावजूद खाद्यान्न से वंचित रहने का आरोप।
- जनवरी 2026 का राशन स्वयं सहायता समूह को देने पर सवाल।
- प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग।
बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के चपरी गांव में जन वितरण प्रणाली की दुकान उस समय विवाद का केंद्र बन गई, जब दर्जनों कार्डधारी राशन नहीं मिलने से आक्रोशित होकर दुकान पर पहुंच गए। लाभुकों का आरोप है कि माह दिसंबर 2025 का खाद्यान्न आवंटन और उठाव हो जाने के बावजूद डीलर द्वारा उन्हें अनाज नहीं दिया गया, जिससे गरीब परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कार्डधारियों का आरोप: बहाने बनाकर रोका गया राशन
आक्रोशित कार्डधारियों ने बताया कि वे कई दिनों से राशन लेने के लिए पीडीएस दुकान का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार डीलर नागेश्वर राम द्वारा कभी सर्वर डाउन तो कभी अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया जाता है। लाभुकों का कहना है कि पर्ची कटवाने के बाद भी उन्हें खाद्यान्न नहीं दिया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि राशन नहीं मिलने से उनके घरों में खाने-पीने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। दिहाड़ी मजदूरी और सीमित आय पर निर्भर परिवारों के लिए सरकारी राशन ही मुख्य सहारा है, लेकिन उसे भी रोके जाने से हालात और बिगड़ गए हैं।
दिसंबर का बकाया, जनवरी का राशन कैसे वितरित हुआ?
कार्डधारियों ने एक और गंभीर सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) के निर्देश पर माह जनवरी 2026 का राशन झांसी स्वयं सहायता समूह को दे दिया गया है, जबकि दिसंबर 2025 का राशन अब तक लाभुकों को नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि जब पिछला माह बकाया है, तो अगले माह का राशन किस आधार पर दूसरे समूह को दिया गया।
लाभुकों ने इसे सुनियोजित अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गरीब परिवारों को लंबे समय तक भूखे रहने की नौबत आ सकती है।
ग्रामीणों की भीड़ और जांच की मांग
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण भी मौके पर जुट गए। देखते ही देखते पीडीएस दुकान के बाहर लोगों की भीड़ लग गई और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की गई। ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह की लापरवाही और अनियमितता पहले भी देखने को मिलती रही है, लेकिन हर बार मामला दबा दिया जाता है।
ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की कि डीलर के स्टॉक, वितरण पंजी और ऑनलाइन रिकॉर्ड की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
डीलर से संपर्क नहीं हो सका
इस मामले में डीलर नागेश्वर राम से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। डीलर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आने से संदेह और गहराता जा रहा है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
लाभुकों ने प्रशासन से मांग की है कि लंबित दिसंबर माह का राशन अविलंब वितरित कराया जाए और दोषी पाए जाने पर डीलर के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि जन वितरण प्रणाली गरीबों के लिए बनाई गई है, लेकिन इसमें हो रही अनियमितताएं इसकी मूल भावना को कमजोर कर रही हैं।

न्यूज़ देखो: सवालों के घेरे में पीडीएस व्यवस्था
चपरी गांव की यह घटना जन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और निगरानी की कमी को उजागर करती है। जब आवंटित राशन लाभुकों तक नहीं पहुंचता, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
राशन अधिकार है, एहसान नहीं
गरीब और जरूरतमंद परिवारों का हक छीनना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
जन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही हम सभी की जिम्मेदारी है।
यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी अनियमितता हो रही है, तो आवाज उठाएं।
अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और जागरूकता फैलाकर बदलाव का हिस्सा बनें।






