
#दुमका #शोक_समाचार : सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद रविशंकर जायसवाल के निधन से क्षेत्र शोकाकुल।
दुमका जिले के हंसडीहा निवासी समाजसेवी एवं शिक्षाविद रविशंकर जायसवाल का ब्रेन ट्यूमर के कारण गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे और इलाजरत थे। शिक्षा, सामाजिक सेवा और सार्वजनिक जीवन में उनका योगदान क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनके निधन से हंसडीहा सहित पूरे संताल परगना क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।
- हंसडीहा निवासी रविशंकर जायसवाल का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन।
- लंबे समय से ब्रेन ट्यूमर से थे पीड़ित।
- बेचू राउत इंटर कॉलेज की स्थापना में रहा अहम योगदान।
- वर्ष 2017 तक प्राचार्य पद पर दी सेवाएं।
- भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता एवं सांसद प्रतिनिधि रहे।
- सरल स्वभाव और सामाजिक सरोकारों के लिए थे विशेष रूप से जाने जाते।
दुमका जिले के हंसडीहा क्षेत्र ने शुक्रवार देर रात एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया, जिनका जीवन समाज, शिक्षा और जनसेवा के लिए समर्पित रहा। हंसडीहा निवासी रविशंकर जायसवाल के निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके चाहने वालों, शुभचिंतकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरा दुख व्याप्त है। एक संवेदनशील मार्गदर्शक, शिक्षाविद और समाजसेवी के रूप में उनकी पहचान वर्षों से बनी हुई थी।
लंबे इलाज के बाद हुआ निधन
रविशंकर जायसवाल लंबे समय से गंभीर बीमारी ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित थे। बेहतर इलाज के लिए उन्हें गुरुग्राम स्थित प्रतिष्ठित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था। शुक्रवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही यह सूचना उनके पैतृक क्षेत्र हंसडीहा पहुंची, माहौल गमगीन हो गया।
शिक्षा के क्षेत्र में अमिट योगदान
रविशंकर जायसवाल का नाम क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। वर्ष 2005 में बेचू राउत इंटर कॉलेज की स्थापना में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने न केवल इस शिक्षण संस्थान को आकार दिया, बल्कि उसे क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए एक मजबूत शैक्षणिक आधार भी प्रदान किया।
प्राचार्य के रूप में निभाई अहम भूमिका
कॉलेज की स्थापना के बाद वे वर्ष 2017 तक प्राचार्य पद पर कार्यरत रहे। इस दौरान उन्होंने शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुशासन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में कॉलेज ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई। विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच उनका व्यवहार सदैव प्रेरणादायक और मार्गदर्शक रहा।
राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय भूमिका
रविशंकर जायसवाल केवल शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता भी थे। वे भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे और पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे। इसके साथ ही वे स्थानीय सांसद निशिकांत दुबे के सांसद प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य कर चुके थे।
जनसेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य
सांसद प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ उठाया। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों में वे हमेशा सक्रिय रहते थे। लोगों की समस्याओं को सुनना और समाधान के लिए प्रयास करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उनके लिए राजनीति सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा का जरिया थी।
सरल स्वभाव और मृदुभाषी व्यक्तित्व
रविशंकर जायसवाल की सबसे बड़ी पहचान उनका सरल स्वभाव, मृदुभाषी व्यवहार और मिलनसार व्यक्तित्व था। वे हर वर्ग के लोगों से सहजता से संवाद करते थे। चाहे विद्यार्थी हों, शिक्षक हों, जनप्रतिनिधि हों या आम ग्रामीण—हर कोई उनसे आसानी से जुड़ जाता था। यही कारण था कि वे समाज के हर वर्ग में प्रिय थे।
क्षेत्र को हुई अपूरणीय क्षति
उनके निधन से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा हंसडीहा और आसपास का क्षेत्र शोक में डूबा है। सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय लोगों का मानना है कि रविशंकर जायसवाल का जाना एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है। उन्होंने जिस निष्ठा और ईमानदारी से समाज की सेवा की, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
स्मृतियां बनेंगी मार्गदर्शन
उनकी स्मृतियां, उनके विचार और उनका कार्य आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। शिक्षा को लेकर उनकी सोच, समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जनसेवा की भावना लंबे समय तक लोगों को मार्गदर्शन देती रहेगी।
न्यूज़ देखो: एक युग का शांत समापन
रविशंकर जायसवाल का जीवन यह दर्शाता है कि शिक्षा और समाजसेवा के माध्यम से भी गहरा और स्थायी प्रभाव छोड़ा जा सकता है। उनका निधन क्षेत्र के लिए चेतावनी भी है कि ऐसे संवेदनशील और समर्पित व्यक्तित्वों को सहेजना और उनके कार्यों को आगे बढ़ाना समाज की जिम्मेदारी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संवेदनशीलता और सेवा की विरासत को आगे बढ़ाएं
रविशंकर जायसवाल जैसे व्यक्तित्व हमें यह सिखाते हैं कि सच्ची पहचान पद से नहीं, सेवा से बनती है। समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस खबर को साझा करें, अपने विचार व्यक्त करें और बताएं कि आप ऐसे समाजसेवियों की भूमिका को कैसे देखते हैं।





