रविंद्र कुमार महतो बने ICCSTWE के झारखंड राज्य महासचिव, महिला उद्यमिता और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा

रविंद्र कुमार महतो बने ICCSTWE के झारखंड राज्य महासचिव, महिला उद्यमिता और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा

author News देखो Team
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#गिरिडीह #महिला_उद्यमिता : सामाजिक सशक्तिकरण और स्वरोजगार को नई दिशा देने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

भारतीय वाणिज्य मंडल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला उद्यमियों (ICCSTWE) ने गिरिडीह के सामाजिक कार्यकर्ता रविंद्र कुमार महतो को झारखंड राज्य महासचिव नियुक्त किया है। संगठन ने यह जिम्मेदारी उन्हें महिला उद्यमिता, ग्रामीण विकास और स्वरोजगार के क्षेत्र में सक्रिय योगदान को देखते हुए सौंपी है। नियुक्ति के बाद संगठन ने उम्मीद जताई है कि झारखंड में महिलाओं और वंचित समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएंगे। इस नियुक्ति की सूचना MSME मंत्रालय समेत संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों को भी भेजी गई है।

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  • रविंद्र कुमार महतो बने ICCSTWE के झारखंड राज्य महासचिव।
  • संगठन ने महिला उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की जताई उम्मीद।
  • डुमरी प्रखंड के लक्ष्मणटुंडा गांव के निवासी हैं रविंद्र कुमार महतो।
  • ग्रामीण विकास और सामाजिक कार्यों में लंबे समय से हैं सक्रिय।
  • राष्ट्रीय महासचिव हेमा एक्का ने जारी किया नियुक्ति आदेश।
  • नियुक्ति की सूचना MSME मंत्रालय को भी भेजी गई।

भारतीय वाणिज्य मंडल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला उद्यमियों (ICCSTWE) ने झारखंड में संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गिरिडीह जिले के सामाजिक कार्यकर्ता एवं उद्यमिता प्रोत्साहक रविंद्र कुमार महतो को झारखंड राज्य महासचिव नियुक्त किया है। संगठन द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह नियुक्ति महिला उद्यमिता, स्वरोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके सक्रिय योगदान को देखते हुए की गई है। नियुक्ति के बाद क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक विकास को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं।

सामाजिक कार्यों में रहा सक्रिय योगदान

रविंद्र कुमार महतो गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत लक्ष्मणटुंडा गांव के निवासी हैं। वे लंबे समय से सामाजिक कार्यों, ग्रामीण विकास और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों और समाज के वंचित वर्गों के बीच कार्य करने के अनुभव को देखते हुए संगठन ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उनके कार्यों को ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक पहल के रूप में देखा जाता रहा है।

महिला उद्यमिता को मजबूत करने पर रहेगा फोकस

ICCSTWE द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रविंद्र कुमार महतो झारखंड में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में विशेष अभियान चलाएंगे।

संगठन के अनुसार ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार, छोटे व्यवसाय और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही छोटे उद्यमों को विकसित कर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

संगठन ने जताया भरोसा

संगठन की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती हेमा एक्का ने नियुक्ति आदेश जारी करते हुए कहा कि झारखंड जैसे राज्य में जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले नेतृत्व की बेहद जरूरत है।

श्रीमती हेमा एक्का ने कहा: “हमें विश्वास है कि रविंद्र कुमार महतो के नेतृत्व में संगठन नई ऊर्जा के साथ कार्य करेगा और अधिक से अधिक महिलाओं तथा वंचित समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने में सफलता मिलेगी।”

उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना है।

MSME मंत्रालय को भेजी गई सूचना

संगठन द्वारा जारी नियुक्ति आदेश की प्रतिलिपि राष्ट्रीय अध्यक्ष, सलाहकार समिति और भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) को भी भेजी गई है।

संगठन के अनुसार यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है और जल्द ही राज्यभर में संगठनात्मक गतिविधियों को और विस्तार दिया जाएगा।

युवाओं और महिलाओं के लिए नए अवसर

झारखंड जैसे ग्रामीण और संसाधन आधारित राज्य में महिला उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देना सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेतृत्व को संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलने से युवाओं और महिलाओं को नए अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि गांव स्तर तक योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पहुंचाया जाए तो बड़ी संख्या में लोग आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

न्यूज़ देखो: जमीनी नेतृत्व से मजबूत होगी महिला उद्यमिता की पहल

झारखंड में महिला उद्यमिता और स्वरोजगार को लेकर लगातार नई पहलें देखने को मिल रही हैं। ऐसे में जमीनी स्तर पर सक्रिय लोगों को संगठनात्मक जिम्मेदारी देना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और युवाओं को यदि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिले तो रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खुल सकते हैं। अब देखने वाली बात होगी कि संगठन राज्यभर में किस तरह अपने अभियान को आगे बढ़ाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आत्मनिर्भर समाज की शुरुआत जागरूकता और अवसर से होती है

जब गांव और छोटे कस्बों के लोग रोजगार और उद्यमिता से जुड़ते हैं तो समाज की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। खासकर महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना विकास की सबसे मजबूत नींव माना जाता है।

जरूरी है कि सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी हर जरूरतमंद तक पहुंचे। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों की भूमिका इसमें बेहद महत्वपूर्ण होती है।

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