
#मैकलुस्कीगंज #मुंडा_समाज : असम से नागालैंड तक से पहुंचे आगंतुकों ने पर्यटन स्थलों और एंग्लो-इंडियन विरासत को देखा।
रांची जिले के खलारी प्रखंड स्थित मैकलुस्कीगंज में देश के विभिन्न राज्यों से आए मुंडा समाज के लोगों ने ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। आगंतुकों ने एंग्लो-इंडियन विरासत, पुराने बंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से देखा तथा स्थानीय समाज के साथ संवाद कर सांस्कृतिक इतिहास की जानकारी ली।
- असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और नागालैंड से पहुंचे मुंडा समाज के प्रतिनिधि।
- ऐतिहासिक नगरी मैकलुस्कीगंज के पर्यटन स्थलों का किया भ्रमण।
- दुल्ली स्थित सर्वधर्म स्थल, नकटा पहाड़ और जागृति विहार का दौरा।
- एंग्लो-इंडियन कालीन पुराने बंगलों में दिखाई विशेष रुचि।
- शशि मुंडा ने क्षेत्र के इतिहास और बसावट की दी जानकारी।
रांची जिले के खलारी प्रखंड अंतर्गत स्थित ऐतिहासिक एवं पर्यटन नगरी मैकलुस्कीगंज में देश के विभिन्न हिस्सों से आए मुंडा समाज के प्रतिनिधियों का आगमन हुआ। असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और नागालैंड से पहुंचे आगंतुकों ने क्षेत्र के प्रमुख स्थलों का भ्रमण कर यहां की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को करीब से जाना।
एंग्लो-इंडियन विरासत से परिचय
मैकलुस्कीगंज को एशिया के सबसे बड़े एंग्लो-इंडियन गांवों में गिना जाता है। यहां आज भी एंग्लो-इंडियन समुदाय की सांस्कृतिक विरासत, पुराने अंग्रेजी शैली के बंगले और विशिष्ट जीवनशैली इसकी अलग पहचान बनाते हैं। आगंतुकों ने अंग्रेजों के समय के बने ऐतिहासिक बंगलों को देखा और उनके स्थापत्य एवं इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त की।
आगंतुकों का कहना था कि इस तरह की विरासत देश के अन्य हिस्सों में दुर्लभ है और इसे संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है।
सामाजिक-सांस्कृतिक संवाद
भ्रमण के दौरान मुंडा समाज के प्रतिनिधियों ने स्थानीय मुंडा समाज के लोगों से मुलाकात कर हाल-चाल जाना। इस अवसर पर सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर चर्चा हुई तथा क्षेत्र के इतिहास, परंपराओं और वर्तमान चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
युवा नेता शशि मुंडा ने आगंतुकों को मैकलुस्कीगंज के इतिहास, एंग्लो-इंडियन बसावट की पृष्ठभूमि तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम है।
प्रमुख स्थलों का किया भ्रमण
आगंतुकों ने दुल्ली स्थित सर्वधर्म स्थल दुल्ली, नकटा पहाड़ तथा जागृति विहार सहित अन्य पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। प्राकृतिक हरियाली और शांत वातावरण ने सभी को आकर्षित किया। नकटा पहाड़ से दिखाई देने वाला मनोरम दृश्य आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
पर्यटन की अपार संभावनाएं
आगंतुकों ने कहा कि मैकलुस्कीगंज की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक पहचान और प्राकृतिक सौंदर्य इसे देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान दिलाता है। यदि यहां आधारभूत सुविधाओं का और विस्तार किया जाए तो यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से उभर सकता है।
इस अवसर पर तरुण मुंडा, सुकु मुंडा, मनीष मुंडा, योगेश मुंडा, राहुल मुंडा, विजय मुंडा, सत्येंद्र मुंडा, राजेश मुंडा, वीरेंद्र मुंडा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

न्यूज़ देखो: सांस्कृतिक जुड़ाव से मजबूत होता सामाजिक ताना-बाना
देश के विभिन्न राज्यों से आए मुंडा समाज के प्रतिनिधियों का यह भ्रमण सांस्कृतिक एकता का उदाहरण है। मैकलुस्कीगंज जैसी ऐतिहासिक धरोहरें केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद और विरासत संरक्षण के केंद्र भी हैं। ऐसे प्रयासों से समाज के बीच आपसी जुड़ाव और समझ बढ़ती है।
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विरासत को जानें, पहचानें और सहेजें
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पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को बचाना भी जरूरी है।
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