
#सिमडेगा #जेएसएलपीएस_समीक्षा : केलाघाघ दीदी कैफेटेरिया में आयोजित बैठक में प्रखंडों की रैंकिंग घोषित।
सिमडेगा के केलाघाघ स्थित दीदी कैफेटेरिया सभागार में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी की जिला स्तरीय समीक्षा सह रैंकिंग बैठक आयोजित हुई। जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री शांति मार्डी की अध्यक्षता में सभी प्रखंडों की प्रगति रिपोर्ट पर चर्चा की गई। निर्धारित मानकों के आधार पर पाकरटांड़ को प्रथम, केरसई को द्वितीय और सिमडेगा सदर को तृतीय स्थान मिला। बैठक में गुणवत्ता, पारदर्शिता और लक्ष्य आधारित कार्यशैली पर विशेष जोर दिया गया।
- केलाघाघ दीदी कैफेटेरिया, सिमडेगा में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक।
- अध्यक्षता जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री शांति मार्डी ने की।
- विभिन्न डोमेन—सोशल डेवलपमेंट, फाइनेंशियल इंक्लूजन, फार्म व नन-फार्म गतिविधियों की समीक्षा।
- रैंकिंग में पाकरटांड़ प्रथम, केरसई द्वितीय, सिमडेगा सदर तृतीय।
- उत्कृष्ट प्रखंडों की बीएमएमयू टीम को सम्मानित किया गया।
सिमडेगा जिले में ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों की प्रगति को लेकर गंभीर पहल करते हुए केलाघाघ स्थित दीदी कैफेटेरिया के सभागार में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी की समीक्षा सह रैंकिंग बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री शांति मार्डी ने की। इसमें जिले के सभी प्रखंडों के प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक, बीएमएमयू टीम के कर्मी तथा संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
यह बैठक केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि विभिन्न डोमेन में कार्यों की गुणवत्ता, लक्ष्य प्राप्ति और नवाचारों का समग्र मूल्यांकन किया गया।
विभिन्न डोमेन की विस्तृत समीक्षा
बैठक के दौरान जेएसएलपीएस के अंतर्गत संचालित प्रमुख क्षेत्रों—सोशल डेवलपमेंट, फाइनेंशियल इंक्लूजन, सोशल मोबिलाइजेशन एवं इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग, फार्म लाइवलीहुड और नन-फार्म गतिविधियों—की विस्तार से समीक्षा की गई।
प्रत्येक प्रखंड द्वारा अपने-अपने कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में लक्ष्यों की प्राप्ति, नवाचारों की पहल, सामुदायिक संस्थाओं की मजबूती तथा क्षेत्रीय चुनौतियों का विश्लेषण शामिल था। अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन की गुणवत्ता और जमीनी स्तर पर प्रभाव का भी मूल्यांकन किया।
प्रखंडों की रैंकिंग घोषित
समीक्षा के बाद पूर्व निर्धारित मानकों के आधार पर प्रखंडों की रैंकिंग की घोषणा की गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पाकरटांड़ प्रखंड ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
द्वितीय स्थान केरसई प्रखंड को मिला, जबकि तृतीय स्थान सिमडेगा सदर प्रखंड ने हासिल किया।
इन प्रखंडों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें जिला कार्यक्रम प्रबंधक द्वारा संबंधित प्रखंडों की पूरी बीएमएमयू टीम को सम्मानित किया गया। यह सम्मान टीम के सामूहिक प्रयास और लक्ष्य आधारित कार्यशैली की सराहना के रूप में दिया गया।
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष बल
बैठक को संबोधित करते हुए जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री शांति मार्डी ने कहा:
सुश्री शांति मार्डी ने कहा: “सभी प्रखंड विभिन्न क्षेत्रों में प्रगतिशील कार्य कर रहे हैं। अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता युक्त कार्य निष्पादन और सामुदायिक संस्थाओं को सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है।”
उन्होंने टीम वर्क, पारदर्शिता और लक्ष्य आधारित कार्यशैली अपनाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि ग्रामीण आजीविका संवर्धन का उद्देश्य तभी प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सकता है, जब सभी प्रखंड समन्वित प्रयासों के साथ कार्य करें।
भविष्य की कार्ययोजना पर मंथन
बैठक के अंतिम चरण में आगामी कार्ययोजना और लक्ष्य निर्धारण पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने आगामी महीनों में निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का संकल्प लिया।
साथ ही यह भी सुनिश्चित करने की बात कही गई कि योजनाओं का लाभ अधिकतम संख्या में ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे। समन्वित प्रयासों और नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से कार्यों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चल रहे कार्यक्रमों का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों और सामुदायिक संस्थाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। ऐसे में इस तरह की समीक्षा बैठकें योजनाओं की प्रगति को गति देने में अहम भूमिका निभाती हैं।
न्यूज़ देखो: प्रतिस्पर्धा से बढ़ेगी कार्यक्षमता और पारदर्शिता
सिमडेगा में आयोजित यह समीक्षा बैठक दिखाती है कि योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और रैंकिंग व्यवस्था से कार्यक्षमता बढ़ती है। जब प्रखंडों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होती है, तो परिणाम बेहतर आते हैं। अब जरूरी है कि घोषित रैंकिंग केवल पुरस्कार तक सीमित न रहे, बल्कि अन्य प्रखंड भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों। क्या भविष्य में इन प्रखंडों की सफलता के मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा? यह देखना महत्वपूर्ण होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम
जब प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा, पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता दी जाती है, तो विकास की रफ्तार स्वतः तेज हो जाती है। ग्रामीण आजीविका से जुड़ी योजनाएं तभी सफल होंगी, जब समुदाय की भागीदारी और टीम वर्क मजबूत हो।
सिमडेगा की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बन सकती है। जरूरत है कि हर स्तर पर जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।






