
#विश्रामपुर #वार्षिकोत्सव_समारोह : संत जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल के 11वें वार्षिकोत्सव में शिक्षा और चरित्र निर्माण पर जोर।
विश्रामपुर नगर परिषद स्थित संत जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल के 11वें वार्षिकोत्सव में पलामू प्रमंडल के डीआईजी किशोर कौशल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा से बड़ी कोई पूंजी नहीं होती और रूढ़िवादी सोच से मुक्त होकर समाज को महानता की ओर बढ़ना चाहिए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं।
- मुख्य अतिथि डीआईजी किशोर कौशल ने शिक्षा को बताया सर्वोच्च पूंजी।
- आयोजन स्थल – संत जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल, विश्रामपुर नगर परिषद।
- विद्यालय के निदेशक एन के तिवारी ने तकनीकी शिक्षा पर दिया जोर।
- छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्वागत गान की प्रस्तुति।
- अभिभावकों को बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की दी गई सलाह।
पलामू। विश्रामपुर नगर परिषद स्थित संत जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल में 11वां वार्षिकोत्सव समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में पलामू प्रमंडल के डीआईजी किशोर कौशल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ कई गणमान्य अतिथि भी समारोह में शामिल हुए।
शिक्षा ही जीवन की असली पूंजी
समारोह को संबोधित करते हुए डीआईजी किशोर कौशल ने कहा:
शिक्षा का दर्जा संसार में सबसे उत्तम है। शिक्षा के बिना जीवन अधूरा है। रूढ़िवादी सोच एवं परंपराओं से आगे बढ़कर शिक्षा को सर्वोपरि मानना ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
उन्होंने समाज के नवनिर्माण में शिक्षा और चरित्र निर्माण को आवश्यक बताते हुए कहा कि बच्चों को अनुशासन, संस्कार और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ाना समय की मांग है। उन्होंने विद्यालय के निदेशक एन के तिवारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में विद्यालय का बेहतर संचालन सराहनीय है।
मोबाइल से दूरी और संस्कार पर जोर
डीआईजी ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों की सराहना की। बच्चों ने फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, गूगल और शिव तांडव पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
उन्होंने अभिभावकों को सलाह देते हुए कहा कि बच्चों को अनावश्यक मोबाइल उपयोग से दूर रखना चाहिए, ताकि वे पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों पर अधिक ध्यान दे सकें।
एन के तिवारी ने तकनीकी शिक्षा पर रखा फोकस
विद्यालय के निदेशक एन के तिवारी ने कहा:
शिक्षा से बड़ी कोई पूंजी नहीं है। मैंने ताउम्र शिक्षा को ही प्राथमिकता दी है।
उन्होंने विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए इंटर के बाद ऐसी शिक्षा चुनने पर जोर दिया, जिससे तकनीकी ज्ञान बढ़े और रोजगार के अवसर उपलब्ध हों। उन्होंने बताया कि विद्यालय में अनुशासन और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के माध्यम से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण किया जा रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत “सांसों की सरगम गाएं सुस्वागतम” स्वागत गीत से हुई। विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों का शॉल और बुके देकर स्वागत किया गया।
गणमान्य लोग रहे उपस्थित
समारोह में कार्यपालक पदाधिकारी विश्रामपुर जयपाल सिंह, विश्रामपुर थाना प्रभारी ऋषिकेश दुबे, रेहला थाना प्रभारी गुलशन बिरुआ, कांग्रेसी नेता प्रभात दुबे, गांधी विचार मंच के रविन्द्र उपाध्याय, समाजसेवी विजय पांडेय, प्राचार्य आर के सिंह, सतीश चौबे सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं और सैकड़ों अभिभावक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश दिया।

न्यूज़ देखो: शिक्षा से ही बदलेगा समाज का भविष्य
विश्रामपुर में आयोजित यह वार्षिकोत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि शिक्षा के महत्व को पुनः रेखांकित करने का मंच बना। जब प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षाविद एक साथ शिक्षा पर जोर देते हैं, तो यह समाज के लिए सकारात्मक संकेत है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा ही है असली विरासत
धन-दौलत से बड़ी पूंजी है शिक्षा।
बच्चों को संस्कार, अनुशासन और तकनीकी ज्ञान दें।
मोबाइल से अधिक किताबों को महत्व दें।
हर माता-पिता का कर्तव्य है बच्चों के भविष्य को सही दिशा देना।
अपने क्षेत्र के शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग लें और शिक्षा को बढ़ावा दें।
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