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मालहन पंचायत के गनियारी गांव में सड़क और पेयजल संकट गहराया, 78 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण

#चंदवा #मूलभूतसुविधासंकट : गनियारी के जावाखाड़ और जपुवाटांड़ टोला में सड़क व पानी की गंभीर समस्या उजागर।

चंदवा प्रखंड के मालहन पंचायत अंतर्गत गनियारी गांव में सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव सामने आया है। भीम आर्मी झारखंड प्रदेश महासचिव वीरेंद्र कुमार ने गांव के जावाखाड़ और जपुवाटांड़ टोला की समस्याओं को उठाया। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग की है।

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  • गनियारी गांव के जावाखाड़ व जपुवाटांड़ टोला में सड़क और पानी का अभाव।
  • भीम आर्मी प्रदेश महासचिव वीरेंद्र कुमार ने उठाई समस्या।
  • ग्रामीणों ने प्रसव और बीमार मरीजों को अस्पताल ले जाने में कठिनाई बताई।
  • वर्षों पुराना कुआं धंसा, गर्मी से पहले पेयजल संकट गहराने की आशंका।
  • सोलर जलमीनार में बोरिंग के बदले पैसे मांगने का आरोप।

चंदवा प्रखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर पूर्व दिशा में स्थित मालहन पंचायत का गनियारी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। ग्राम लोहरसी से दक्षिणी छोर पर बसे इस गांव के जावाखाड़ और जपुवाटांड़ टोला में सड़क और स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी यहां विकास की रोशनी पूरी तरह नहीं पहुंच सकी है।

भीम आर्मी ने उठाई आवाज

भीम आर्मी झारखंड प्रदेश महासचिव वीरेंद्र कुमार ने गांव का दौरा कर स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई बार विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान प्रतिनिधियों ने विकास के बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं दिखा।

वीरेंद्र कुमार ने कहा:

“गनियारी गांव के जावाखाड़ और जपुवाटांड़ टोला आज भी सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि तत्काल सर्वे कर इन टोलों को सड़क और पेयजल योजना से जोड़ा जाए।

ग्रामीणों की रोजमर्रा की कठिनाइयां

ग्रामीणों के अनुसार, गांव के आसपास के इलाकों में सड़क और पानी की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन उनके टोला-मोहल्ला तक यह सुविधा नहीं पहुंची। इससे दैनिक जीवन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में कच्चे रास्ते दलदल में बदल जाते हैं, जबकि गर्मी के मौसम में पानी की समस्या गंभीर रूप ले लेती है।

यदि किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो पक्की सड़क के अभाव में समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मरीजों को खाट या अस्थायी साधनों से मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।

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पेयजल संकट और धंसा हुआ कुआं

जावाखाड़ टोला के ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों पुराना कुआं अब धंस चुका है। इससे जल स्रोत पूरी तरह समाप्त हो गया है। लोग नदी-नाला, ढोंढा और चुवाड़ी जैसे अस्थायी स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं। गर्मी का मौसम नजदीक होने से चिंता और बढ़ गई है।

ग्रामीण राजेश गंझू, बिपिन गंझू, सुभाष गंझू और दसवां गंझू ने संयुक्त रूप से प्रखंड प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द सड़क और स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जाए।

सोलर जलमीनार में अनियमितता का आरोप

कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दो-तीन वर्ष पूर्व जब क्षेत्र में सोलर जलमीनार लगाने की योजना चली थी, तब उन्होंने अपने टोला में भी बोरिंग कराने का अनुरोध किया। ग्रामीणों के अनुसार, ठेकेदार के प्रतिनिधि द्वारा बोरिंग के बदले पैसे की मांग की गई।

हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि उस समय पारदर्शिता से काम होता, तो आज यह स्थिति नहीं होती।

विकास के दावों पर सवाल

सरकार द्वारा हर गांव तक सड़क, बिजली और पानी पहुंचाने के दावे किए जाते हैं। ऐसे में प्रखंड मुख्यालय से महज 10–12 किलोमीटर दूर स्थित गांव में अब तक बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंचना कई सवाल खड़े करता है। विशेष रूप से आदिवासी समुदाय के टोला-मोहल्लों में विकास की रफ्तार धीमी रहने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि विकास का लाभ समान रूप से हर बस्ती तक पहुंचे, तभी वास्तविक समावेशी विकास संभव है।

न्यूज़ देखो: जमीनी हकीकत बनाम विकास के दावे

गनियारी गांव की स्थिति यह संकेत देती है कि योजनाओं की घोषणा और जमीनी क्रियान्वयन के बीच अभी भी दूरी है। यदि प्रखंड मुख्यालय के निकट बसे गांव में यह हाल है, तो दूरस्थ क्षेत्रों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। प्रशासन को चाहिए कि तत्काल सर्वे कर प्राथमिकता के आधार पर सड़क और पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

विकास की रोशनी हर टोला तक पहुंचे

सड़क और पानी केवल सुविधा नहीं, बल्कि बुनियादी अधिकार हैं।
गांव का हर बच्चा, हर बुजुर्ग और हर परिवार सम्मानजनक जीवन का हकदार है।
समावेशी विकास तभी संभव है जब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजना पहुंचे।

आप भी अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाएं, जिम्मेदार अधिकारियों तक आवाज पहुंचाएं।
खबर को साझा करें और अपनी राय कमेंट में जरूर दें, ताकि बदलाव की पहल मजबूत हो सके।

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Ravikant Kumar Thakur

चंदवा, लातेहार

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