सड़क पर गुलाब और माला का संदेश, गुमला में गांधीगिरी से परिवहन विभाग ने बदली चालकों की सोच

सड़क पर गुलाब और माला का संदेश, गुमला में गांधीगिरी से परिवहन विभाग ने बदली चालकों की सोच

author Dindayal Ram
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#गुमला #सड़क_सुरक्षा : राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 में परिवहन विभाग ने दंड नहीं, समझदारी से दिया यातायात नियमों का संदेश।

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत गुमला में शनिवार को परिवहन विभाग और जिला प्रशासन ने अनोखा जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान हेलमेट पहनकर वाहन चलाने वालों को गुलाब का फूल देकर सम्मानित किया गया, जबकि बिना हेलमेट चलने वालों को प्रतीकात्मक रूप से माला पहनाकर नियमों का महत्व समझाया गया। अभियान का उद्देश्य चालान काटना नहीं, बल्कि चालकों में सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी पैदा करना रहा। इस पहल ने सड़क सुरक्षा को लेकर आम लोगों के बीच सकारात्मक चर्चा को जन्म दिया।

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  • राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत विशेष अभियान।
  • हेलमेट पहनने वालों को गुलाब देकर किया सम्मान।
  • बिना हेलमेट चालकों को पहनाई गई प्रतीकात्मक माला।
  • मोटर यान निरीक्षक रॉबिन अजय सिंह ने दी सुरक्षा की सीख।
  • डीटीओ ज्ञान शंकर जायसवाल के मार्गदर्शन में चला अभियान।

गुमला जिले की सड़कों पर शनिवार को एक अलग ही नज़ारा देखने को मिला। आमतौर पर जहां परिवहन विभाग का नाम सुनते ही चालकों को चालान और जुर्माने का ख्याल आता है, वहीं राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत जिला प्रशासन और परिवहन विभाग ने गांधीगिरी का रास्ता अपनाते हुए जागरूकता का अनोखा संदेश दिया। हाथों में चालान बुक की जगह गुलाब के फूल और फूलों की माला लेकर खड़े अधिकारी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचते नजर आए।

इस अभियान का उद्देश्य साफ था—सड़क सुरक्षा नियमों को डर के माध्यम से नहीं, बल्कि समझदारी और सामाजिक चेतना के जरिए लोगों के दिलों तक पहुंचाना। हेलमेट पहनकर वाहन चला रहे जागरूक चालकों को जब गुलाब का फूल दिया गया, तो उनके चेहरों पर गर्व और संतोष की झलक साफ दिखी।

गांधीगिरी से बदली सोच

अभियान के दौरान बिना हेलमेट वाहन चला रहे चालकों को बीच सड़क पर प्रतीकात्मक रूप से फूलों की माला पहनाई गई। यह माला किसी अपमान के लिए नहीं, बल्कि आत्ममंथन के लिए थी। सार्वजनिक स्थान पर माला पहनते ही कई चालकों के चेहरे पर झिझक और शर्म का भाव दिखा, जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि नियम तोड़ना केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि अपनी जान को जोखिम में डालना भी है।

परिवहन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति अखबारों की सुर्खियों में दुर्घटना का शिकार बनकर नहीं आना चाहता, तो हेलमेट को बोझ समझने की आदत छोड़नी होगी। सुरक्षा नियम किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को सुरक्षित घर लौटाने के लिए हैं।

अधिकारियों का स्पष्ट संदेश

कार्यक्रम के दौरान मोटर यान निरीक्षक रॉबिन अजय सिंह ने चालकों को संबोधित करते हुए कहा:

रॉबिन अजय सिंह ने कहा: “आपकी थोड़ी सी लापरवाही किसी का घर उजाड़ सकती है, वहीं आपकी सजगता किसी की जान बचा सकती है। सड़क पर आपकी जिम्मेदारी केवल अपनी नहीं, बल्कि दूसरों की भी है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर लोग जल्दबाजी या लापरवाही में हेलमेट नहीं पहनते, लेकिन यही छोटी भूल बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनती है।

इस अभियान को सफल बनाने में प्रदीप कुमार तिर्की ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने चालकों से सीधा संवाद कर उन्हें समझाया कि नियमों का पालन करना मजबूरी नहीं, बल्कि समझदारी की निशानी है।

2030 तक हादसों में 50 प्रतिशत कमी का लक्ष्य

जिला परिवहन पदाधिकारी ज्ञान शंकर जायसवाल के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान का विजन केवल एक दिन की जागरूकता तक सीमित नहीं है। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत तक कम करना विभाग का लक्ष्य है।

इसके लिए पूरे जनवरी माह में जिलेभर में जागरूकता रथ, स्कूलों में सड़क सुरक्षा पाठशाला, चालकों के लिए विशेष शिविर और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विभाग का मानना है कि जब बच्चों और युवाओं में सड़क सुरक्षा की समझ विकसित होगी, तभी समाज में स्थायी बदलाव आएगा।

चालकों पर दिखा असर

शनिवार को हुए इस आयोजन ने गुमला के कई चालकों को आत्मचिंतन के लिए मजबूर कर दिया। कई लोगों ने स्वीकार किया कि पहली बार किसी सरकारी अभियान में उन्हें सजा नहीं, बल्कि सीख मिली। गुलाब और माला के इस प्रयोग ने यह संदेश दिया कि सुरक्षा का रास्ता डर से नहीं, बल्कि समझदारी और जिम्मेदारी से होकर गुजरता है।

न्यूज़ देखो: जब सख्ती नहीं, संवेदनशीलता बनी हथियार

गुमला में परिवहन विभाग का यह गांधीगिरी प्रयोग दिखाता है कि कानून का पालन केवल दंड से नहीं, बल्कि मानवीय तरीकों से भी कराया जा सकता है। यह पहल सड़क सुरक्षा को सामाजिक आंदोलन बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षा अपनाएं, शर्मिंदगी नहीं

सड़क पर आपकी एक छोटी सी सावधानी किसी परिवार की खुशियां बचा सकती है। हेलमेट पहनें, नियम मानें और दूसरों को भी जागरूक करें। अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और सड़क सुरक्षा की इस मुहिम का हिस्सा बनें।

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