#झारखंड #परीक्षा_विवाद : जेईटी परीक्षा में अव्यवस्था से अभ्यर्थियों का प्रदर्शन।
झारखंड पात्रता परीक्षा 2026 के दौरान रांची और बोकारो के दो केंद्रों पर पेपर गड़बड़ी के कारण भारी हंगामा हुआ। प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं होने और अस्पष्ट होने की शिकायत पर अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को देखते हुए आयोग ने दो विषयों की परीक्षा रद्द कर दी। इस घटना ने परीक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- रांची और बोकारो के दो केंद्रों पर परीक्षा रद्द।
- सदर पटेल पब्लिक स्कूल, सेक्टर 9 बोकारो में पेपर नहीं पहुंचा।
- शिक्षा (कोड 009) और ओड़िया (कोड 023) विषय की परीक्षा रद्द।
- अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी।
- भारी संख्या में पुलिस बल तैनात, स्थिति नियंत्रित की गई।
- आयोग ने नई तारीख जल्द घोषित करने की बात कही।
झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) 2026 के दौरान राज्य के दो प्रमुख परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था सामने आने से परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। रांची और बोकारो में प्रश्नपत्र से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण अभ्यर्थियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और अंततः आयोग को दो विषयों की परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
बोकारो में पेपर नहीं पहुंचने से मचा बवाल
बोकारो के सेक्टर 9 स्थित सरदार पटेल पब्लिक स्कूल में उस समय हंगामा शुरू हो गया जब परीक्षा के लिए आवश्यक प्रश्नपत्र समय पर केंद्र तक नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार, एक सेट के 32 प्रश्नपत्र केंद्र तक नहीं पहुंचे थे।
अभ्यर्थियों को दोपहर करीब 12:30 बजे यह जानकारी दी गई कि प्रश्नपत्र गलती से धनबाद भेज दिया गया है। इस सूचना के बाद अभ्यर्थियों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने केंद्र पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
रांची में भी सामने आई समस्या
रांची के एक परीक्षा केंद्र पर भी अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र स्पष्ट न होने और पढ़ने में कठिनाई होने की शिकायत की। इससे वहां भी परीक्षा बाधित हुई और अभ्यर्थियों में नाराजगी देखी गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने बोकारो में शिक्षा विषय (कोड 009) और रांची में ओड़िया विषय (कोड 023) की परीक्षा रद्द कर दी।
प्रशासन और पुलिस ने संभाली स्थिति
हंगामे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।
अभ्यर्थियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। कई अभ्यर्थियों ने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा में इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है।
अभ्यर्थियों की नाराजगी और परेशानी
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए कई अभ्यर्थी झारखंड के बाहर से भी आए थे। अचानक परीक्षा रद्द होने से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
एक अभ्यर्थी ने कहा: “हम लंबी दूरी तय करके यहां पहुंचे थे, अचानक परीक्षा रद्द होने से काफी नुकसान हुआ है।”
कई अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने इस परीक्षा के लिए विशेष तैयारी की थी, क्योंकि यह परीक्षा लगभग 18 वर्षों के बाद आयोजित की जा रही थी।
आयोग ने दी सफाई
झारखंड लोक सेवा आयोग ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि प्रभावित विषयों की परीक्षा की नई तारीख, समय और केंद्र की जानकारी जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।
आयोग ने कहा: “अभ्यर्थी किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें।”
राज्यभर में शांतिपूर्ण रहा परीक्षा आयोजन
हालांकि दो केंद्रों पर विवाद की स्थिति बनी, लेकिन राज्य के अन्य जिलों में परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। विशेष रूप से धनबाद में 70 केंद्रों पर परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई।
पूरे राज्य में कुल 435 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें रांची, बोकारो, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग और देवघर शामिल थे।
आधुनिक तकनीक से निगरानी
परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी केंद्रों पर बायोमेट्रिक उपस्थिति और आईरिस वेरिफिकेशन प्रणाली लागू की गई थी। प्रशासन और पुलिस की टीम लगातार निगरानी में जुटी रही।
अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र को संतुलित और शोध आधारित बताया, जिससे परीक्षा की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रतिक्रिया भी सामने आई।
उच्च शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा
यह परीक्षा झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाती है, जो विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर बनने के लिए पात्रता निर्धारित करती है। साथ ही यह पीएचडी में प्रवेश के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
परीक्षा के सफल आयोजन के बाद अब अभ्यर्थी इसके परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, जो उनके शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य को प्रभावित करेगा।
न्यूज़ देखो: परीक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने झारखंड में परीक्षा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर 18 साल बाद परीक्षा आयोजित होना सकारात्मक पहल है, वहीं दूसरी ओर ऐसी अव्यवस्था पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है। क्या आयोग भविष्य में ऐसी गलतियों से सबक लेगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
छात्रों की मेहनत का सम्मान जरूरी
परीक्षा सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों से जुड़ी होती है। ऐसे में हर स्तर पर पारदर्शिता और जिम्मेदारी जरूरी है।
अगर आप भी छात्र हैं, तो अपने अधिकारों और समस्याओं को उठाने में पीछे न हटें। जागरूकता ही बदलाव की शुरुआत है।
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