गिरिडीह की ग्रामीण बेटियों ने लगातार दूसरे साल जीती राष्ट्रीय छात्रवृत्ति, कुडको स्कूल बना मेधा का केंद्र

गिरिडीह की ग्रामीण बेटियों ने लगातार दूसरे साल जीती राष्ट्रीय छात्रवृत्ति, कुडको स्कूल बना मेधा का केंद्र

author Surendra Verma
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#गिरिडीह #शिक्षा : पीरटांड़ के कुडको स्कूल की छात्राओं ने लगातार दूसरे साल जीती राष्ट्रीय छात्रवृत्ति — गांव के नाम की देशभर में गूंजी गूंज
  • छह छात्राओं ने राष्ट्रीय एनएमएमएस परीक्षा में पाई सफलता।
  • लगातार दूसरे वर्ष छह विद्यार्थियों ने रचा इतिहास।
  • प्रत्येक चयनित छात्र को ₹12,000 प्रतिवर्ष छात्रवृत्ति अगले चार वर्षों तक।
  • लड़कियों की भागीदारी रही खास — बेटियों ने दिखाया मेधा का दम।
  • विद्यालय और शिक्षकों में उमंग — ग्रामीण शिक्षा को नई दिशा।

ग्रामीण प्रतिभा की चमक: दोहराया गया कीर्तिमान

गिरिडीह जिला के पीरटांड़ प्रखंड स्थित उच्च मध्य विद्यालय कुडको एक बार फिर चर्चा में है। वजह है यहां की छात्राओं की अद्भुत सफलता। इस स्कूल के छह छात्रों ने राष्ट्रीय साधन सह मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा (एनएमएमएस) 2024-25 में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लगातार दूसरा वर्ष है जब इसी विद्यालय के छह छात्रों ने चयन सूची में जगह बनाई है। इस बार भी सफलता की बागडोर बच्चियों ने संभाली है, जिन्होंने गांव, विद्यालय और जिले का नाम ऊंचा किया है।

चयनित छात्रों को चार साल तक मिलेगी छात्रवृत्ति

इस परीक्षा में चयनित विद्यार्थियों को केंद्र सरकार द्वारा चार वर्षों तक हर साल ₹12,000 की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। लक्खी कुमारी, रिया कुमारी, कुलदीप कुमार महतो, सोनी कुमारी, अंजू कुमारी और रूपा कुमारी इस वर्ष चयनित छात्र हैं। इन सभी को अब माध्यमिक शिक्षा की राह में आर्थिक सहारा मिलेगा।

शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों की मजबूत भागीदारी

इस उपलब्धि की एक और खास बात यह है कि छह में से पांच सफल छात्राएं हैं, जो यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां अब किसी भी स्तर पर पीछे नहीं हैं। यह बदलाव सिर्फ परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सोच में भी एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने कहा: “यह उपलब्धि पूरे विद्यालय परिवार की मेहनत और बच्चों की लगन का परिणाम है। यह साबित करता है कि यदि दिशा और अवसर मिले, तो ग्रामीण बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।”

शिक्षकों की मेहनत और बच्चों की लगन

विद्यालय के शिक्षकों ने बच्चों को लगातार मार्गदर्शन दिया। परीक्षा की तैयारी के लिए अतिरिक्त कक्षाएं, प्रैक्टिस टेस्ट और शैक्षणिक सहयोग जैसे प्रयास किए गए, जिससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ा। यह सफलता केवल छात्रों की नहीं, बल्कि विद्यालय, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयास की गवाही देती है।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण शिक्षा से निकल रही सफलता की नई रोशनी

‘न्यूज़ देखो’ यह मानता है कि गिरिडीह के इस ग्रामीण स्कूल की सफलता एक मॉडल बन सकती है। जब सीमित संसाधनों वाले बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर जगह बना रहे हैं, तो यह स्थानीय प्रशासन, समाज और सरकार के लिए भी प्रेरणा है कि ग्रामीण शिक्षा को अधिक संसाधन, ध्यान और समर्थन मिले
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षित बेटियां, मजबूत समाज — आइए करें भागीदारी

इन बेटियों की सफलता हम सभी के लिए प्रेरणा है। समाज तभी आगे बढ़ेगा जब हर बच्चा, हर गांव, हर स्कूल को बराबर अवसर मिलेगा।
आप भी इस खबर को शेयर करें, कॉमेंट कर के अपने विचार बताएं, और अपने गांव या मोहल्ले के स्कूलों को प्रोत्साहित करें — क्योंकि परिवर्तन वहीं से शुरू होता है।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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