सदर अस्पताल बना यमराज का द्वार, इलाज के अभाव में महिला की दर्दनाक मौत

सदर अस्पताल बना यमराज का द्वार, इलाज के अभाव में महिला की दर्दनाक मौत

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #स्वास्थ्यव्यवस्थापर_सवाल

लापरवाही, डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और दलालों की सक्रियता ने ले ली 25 वर्षीय महिला की जान — जांच के नाम पर लीपापोती शुरू

  • धुरकी की ललिता देवी की इलाज के अभाव में हुई दर्दनाक मौत
  • सदर अस्पताल में घंटों दौड़ाया गया, इलाज शुरू होने से पहले तोड़ा दम
  • दलालों ने अल्ट्रासाउंड के नाम पर गुमराह किया परिजनों को
  • परिजनों का आरोप — डॉक्टरों ने गंभीर मरीज को समय पर नहीं देखा
  • अस्पताल प्रशासन ने जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ा

मौत की वजह बना सिस्टम का ‘विलंबित इलाज’

गढ़वा: गढ़वा जिले का सदर अस्पताल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यहां की अव्यवस्था, डॉक्टरों की गैरहाजिरी और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण बुधवार को एक महिला की जान चली गई। धुरकी थाना क्षेत्र के धुरकी गांव निवासी राजू कोरवा की 25 वर्षीय पत्नी ललिता देवी की मौत इलाज के अभाव में सदर अस्पताल में हो गई। यह घटना न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करती है बल्कि अस्पताल में सक्रिय दलालों के जाल को भी सामने लाती है।

परिजनों के अनुसार, ललिता देवी का 20 दिन पूर्व धुरकी अस्पताल में सामान्य प्रसव हुआ था। प्रसव के बाद उसकी तबीयत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। मंगलवार शाम से तबीयत और अधिक खराब हो गई, जिसके बाद बुधवार सुबह परिजन उसे इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे।

अस्पताल पहुंचने के बाद पहले पर्ची काउंटर से उसे गायनी वार्ड भेजा गया। लेकिन वहां मौजूद स्टाफ ने उसे फिर नीचे बैठे चिकित्सक के पास भेज दिया। इस चक्कर में कीमती समय निकल गया। इसी दौरान अस्पताल में मौजूद एक दलाल सक्रिय हो गया और परिजनों को बहकाते हुए कहा कि पहले अल्ट्रासाउंड करा लो, नहीं तो डॉक्टर दोबारा भेज देंगे और तब तक डॉक्टर चले जाएंगे।

दलाल की बातों में आकर परिजन ललिता को अल्ट्रासाउंड कराने ले गए, लेकिन उसकी हालत पहले से ही गंभीर थी। इस भागदौड़ के बीच महिला की स्थिति और बिगड़ती गई और अंततः इलाज शुरू होने से पहले ही उसकी मौत हो गई।

इस दर्दनाक घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। मृतका की चाची शिवकुमारी देवी ने रोते हुए कहा कि “हम सुबह 9 बजे अस्पताल आए थे, लेकिन किसी डॉक्टर ने सही से देखा तक नहीं। एक जगह से दूसरी जगह दौड़ाते रहे। अगर समय पर इलाज मिल जाता तो शायद मेरी बहू बच जाती।”

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इलाज के अभाव में किसी की मौत हुई हो। सदर अस्पताल में डॉक्टरों की समय पर अनुपस्थिति, नर्सों की मनमानी और दलालों की सक्रियता आम बात हो गई है।

इस संबंध में जब अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. हरेन चंद्र महतो से बात की गई तो उन्होंने कहा,

“मामले की जानकारी मिली है, जांच कराई जा रही है। यदि कोई दोषी पाया गया तो उस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

न्यूज़ देखो: इंसाफ से पहले क्यों आती है लापरवाही?

स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जब व्यवस्था ही बेजान हो जाए, तो आम जनता कहां जाएगी?
गढ़वा सदर अस्पताल में हुआ यह हादसा एक संकेत है कि स्वास्थ्य तंत्र में गहराई से सड़न आ चुकी है। डॉक्टर समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते, स्टाफ संवेदनहीन हो चुका है और दलाल सिस्टम का हिस्सा बन गए हैं।
न्यूज़ देखो ऐसे मामलों को सतह पर लाकर, सिस्टम से जवाब मांगने का साहस करता है।
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गढ़वा

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