
#सिमडेगा #प्रौढ़शिक्षाअभियान : मोर मिट्टी में आयोजित कार्यक्रम में मैट्रिक व इंटर उत्तीर्ण साहियाओं को किया गया सम्मानित।
सिमडेगा जिले में चल रहे प्रौढ़ शिक्षा अभियान के तहत मोर मिट्टी में साहियाओं को सम्मानित किया गया। अक्षय सिन्हा क्लासेस की पहल पर मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को स्मृति चिह्न, डायरी और पेन देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं ने अपने संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानियां साझा कीं।
- मोर मिट्टी, सिमडेगा में साहियाओं का सम्मान समारोह आयोजित।
- मैट्रिक और इंटरमीडिएट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मान।
- स्मृति चिह्न, डायरी और पेन देकर किया गया प्रोत्साहित।
- संचालक राज आनंद सिन्हा ने अभियान को बताया शिक्षा की नई मुहिम।
- महिलाओं ने मंच से साझा किए अपने प्रेरक अनुभव।
सिमडेगा जिले में चल रहे प्रौढ़ शिक्षा अभियान के अंतर्गत रविवार को मोर मिट्टी में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अक्षय सिन्हा क्लासेस से मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली साहियाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें स्मृति चिह्न के साथ डायरी और पेन प्रदान किए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं और उन्होंने शिक्षा से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
शिक्षा से बदली सोच और जीवन
अक्षय सिन्हा क्लासेस के संचालक राज आनंद सिन्हा ने बताया कि गांव-देहात की सहिया और सहिया साथियों को पढ़ाकर शिक्षा की एक नई मुहिम चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि कई ऐसी महिलाएं हैं जिनकी पढ़ाई वर्षों पहले किसी कारणवश छूट गई थी, लेकिन अब वे दोबारा पढ़ाई कर मैट्रिक और इंटर की परीक्षा पास कर रही हैं।
राज आनंद सिन्हा ने कहा: “इन महिलाओं को पढ़ाने में अलग ही आनंद मिलता है। ये सामान्य बच्चों से अधिक ध्यान और मेहनत से पढ़ती हैं और बेहतर परिणाम प्रस्तुत करती हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि इस अभियान के तहत महिलाओं को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ अपने विचार व्यक्त करने का भी मंच दिया जा रहा है।
महिलाओं ने साझा किए संघर्ष और सफलता के अनुभव
बानो की गुलनाज खातून ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि वे कभी साक्षर नहीं हो पाएंगी, लेकिन अब वे मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं और साक्षर महिलाओं में गिनी जाती हैं।
कौशल्या देवी ने बताया कि वे मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली हैं। विवाह के बाद झारखंड आने पर उन्हें भाषा की समस्या का सामना करना पड़ा। ओड़िया भाषा में पढ़ाई संभव नहीं थी, फिर भी पढ़ने की इच्छा बनी रही। प्रौढ़ शिक्षा अभियान के माध्यम से उन्होंने हिंदी पढ़ना-लिखना सीखा और आज सहिया साथी के रूप में समाज सेवा कर रही हैं।
ठेठईटांगर की सहिया अमला खातून ने कहा कि पहले उन्हें मंच पर बोलने में डर लगता था, लेकिन अब वे आत्मविश्वास के साथ अपने विचार रख पा रही हैं।
शबनम खातून ने बताया कि पहले वे किसी प्रकार का फॉर्म भी नहीं भर पाती थीं, लेकिन मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब वे सहिया का कार्य कर रही हैं, स्वयं सहायता समूह से जुड़ चुकी हैं और अपने बच्चों को भी शिक्षा के प्रति प्रेरित कर रही हैं।
शिक्षा से सशक्तिकरण की ओर कदम
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना की और कहा कि प्रौढ़ शिक्षा अभियान समाज के लिए अत्यंत उपयोगी है। इससे न केवल महिलाओं का शैक्षणिक स्तर बढ़ रहा है, बल्कि उनमें आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास भी विकसित हो रहा है।
प्रौढ़ शिक्षा के माध्यम से महिलाएं अब सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पा रही हैं, फॉर्म भर पा रही हैं और समाज में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
न्यूज़ देखो: शिक्षा से बदलती है तकदीर
सिमडेगा में चल रहा यह अभियान दर्शाता है कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती। जब अवसर और मार्गदर्शन मिलता है, तो वर्षों से अधूरी रह गई पढ़ाई भी पूरी की जा सकती है। ग्रामीण महिलाओं को दोबारा शिक्षा से जोड़ना सामाजिक परिवर्तन की दिशा में मजबूत पहल है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सीखने की कोई उम्र नहीं
अगर इच्छा मजबूत हो तो हर बाधा छोटी पड़ जाती है।
शिक्षा आत्मनिर्भरता और सम्मान की पहली सीढ़ी है।
हर महिला को पढ़ने और आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
आइए, हम भी अपने आसपास की महिलाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित करें।
आप इस पहल पर अपनी राय कमेंट में साझा करें और खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि शिक्षा की यह लौ हर गांव तक पहुंचे।






