साहिबगंज में भी ‘फूल प्रसाद योजना’: चालान नहीं, माला और गुलाब से सुधारेंगे आदतें

साहिबगंज में भी ‘फूल प्रसाद योजना’: चालान नहीं, माला और गुलाब से सुधारेंगे आदतें

author News देखो Team
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  • साहिबगंज पुलिस ने लातेहार की तर्ज पर ‘फूल प्रसाद योजना’ शुरू की।
  • राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत ‘रोज ऐट रोड’ कार्यक्रम का आयोजन।
  • लातेहार पुलिस द्वारा कल ट्रैफिक नियम उल्लंघन करने वालों को माला और गुलाब देकर जागरूक किया गया।
  • साहिबगंज में भी चालान की जगह वाहन चालकों को गुलाब और माला पहनाकर नियम पालन की सीख दी गई।
  • प्रेम और प्रोत्साहन से सामाजिक बदलाव की उम्मीद।

साहिबगंज पुलिस ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत एक अनोखी पहल शुरू की है। ‘फूल प्रसाद योजना’ के तहत, नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों को चालान काटने के बजाय गुलाब और माला पहनाकर जागरूक किया जा रहा है। यह योजना लातेहार पुलिस से प्रेरित होकर तैयार की गई है, जिन्होंने कल एक कार्यक्रम में ट्रैफिक नियम उल्लंघन करने वालों को गुलाब और माला देकर जागरूक किया।

गुलाब के फूल से अपराध का समाधान

साहिबगंज में आयोजित ‘रोज ऐट रोड‘ कार्यक्रम के दौरान, हेलमेट न पहनने वालों को गुलाब का फूल भेंट किया गया और हेलमेट पहनने के फायदे समझाए गए। वहीं, सीट बेल्ट का उपयोग न करने वालों को माला पहनाकर कानून पालन की शपथ दिलाई गई। यह पहल लातेहार पुलिस के कल के कार्यक्रम से प्रेरित है, जिसमें उन्होंने प्रेम और प्रोत्साहन के जरिए सामाजिक बदलाव का प्रयास किया।

डीसी का बयान: प्रेम से बदलेंगे सोच

“हमें लगा कि चालान और दंड से कुछ खास नहीं बदल रहा। इसलिए ‘फूल प्रसाद योजना’ शुरू की गई है। अब जो नियम तोड़ेगा, उसे गुलाब देकर समझाया जाएगा कि नियम पालन कितना जरूरी है।” – साहिबगंज के डीसी

चालकों की प्रतिक्रियाएं

कार्यक्रम में शामिल एक वाहन चालक ने कहा:

“पहले चालान से डर लगता था, अब गुलाब लेने का मन करता है। फूल लेकर मैं खुद सोच रहा हूं कि हेलमेट पहनना शुरू कर दूं।”

फूल प्रसाद योजना: व्यंग्य या बदलाव?

इस पहल को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ इसे प्रशंसनीय मान रहे हैं, तो कुछ इसे व्यंग्यात्मक कदम कह रहे हैं। हालांकि, साहिबगंज प्रशासन का कहना है कि जब चालक अपने गुलाब को मुरझाते देखेंगे, तो नियम तोड़ने का ख्याल भी मुरझा जाएगा।

लातेहार और साहिबगंज पुलिस के इन प्रयासों ने यह दिखाया है कि प्यार और प्रोत्साहन से भी सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है। क्या यह तरीका पूरी तरह सफल होगा, यह तो वक्त ही बताएगा।

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