Gumla

बारडीह पारिश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया संत इग्नाशियूस का पर्व

#Gumla #ChristianCommunity : बारडीह पारिश में भक्ति और सांस्कृतिक रंगों से सजा पर्व
  • बारडीह पारिश में मंगलवार को संत इग्नाशियूस का पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा से मनाया गया।
  • विशेष मिशा पूजा का आयोजन चर्च परिसर में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
  • पूजा के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं ने पारंपरिक गीत-नृत्यों की प्रस्तुति दी।
  • फादर ललित ने कहा—संत इग्नाशियूस का जीवन मानव सेवा और ईश्वर की महिमा के लिए समर्पित था।
  • फादर अलेक्जेंडर तिर्की ने समाज में जागरूकता और सेवा भावना को मजबूत करने पर बल दिया।

संत इग्नाशियूस पर्व का महत्व

जारी प्रखंड अंतर्गत बारडीह पारिश में मंगलवार को संत इग्नाशियूस का पर्व बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। यह पर्व कैथोलिक समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह संत इग्नाशियूस की शिक्षाओं और जीवन मूल्यों को याद करने का अवसर प्रदान करता है।

चर्च में हुआ विशेष मिशा पूजा का आयोजन

सुबह चर्च परिसर में विशेष मिशा पूजा का आयोजन हुआ। इसमें कैथोलिक समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए और सामूहिक प्रार्थना कर समाज व राष्ट्र की उन्नति की कामना की। पूजा के दौरान पूरे वातावरण में भक्ति और शांति का भाव नजर आया।

बच्चों और युवाओं ने सजाया सांस्कृतिक मंच

पूजा के बाद बारडीह विद्यालय परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। इस दौरान बच्चों और युवाओं ने पारंपरिक गीतों और रंगारंग नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियाँ दीं, जिसने सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में स्थानीय संस्कृति और सामूहिक एकता की झलक दिखाई दी।

फादर ललित का संदेश

फादर ललित ने कहा: “यह पर्व हमें संत इग्नाशियूस की शिक्षाओं और आदर्शों की याद दिलाता है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन ईश्वर की महिमा और मानव सेवा को समर्पित किया था। हमें भी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में सकारात्मक कार्य करना चाहिए।”

सेवा भावना को बढ़ाने पर जोर

समारोह में फादर अलेक्जेंडर तिर्की ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता और सेवा भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। इस अवसर पर पारिश समिति, विद्यालय के शिक्षकगण तथा स्थानीय ग्रामीणों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी बना। ऐसे कार्यक्रम समाज में भाईचारे और मानवीय मूल्यों को सशक्त करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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Shahjeb Ansari

जारी, गुमला

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