भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान को किया नमन, बानो में श्रद्धांजलि सभा में गूंजे जल जंगल और जमीन के अधिकारों के स्वर

भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान को किया नमन, बानो में श्रद्धांजलि सभा में गूंजे जल जंगल और जमीन के अधिकारों के स्वर

author Shivnandan Baraik
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#बानो #बिरसा_पुण्यतिथि : जनप्रतिनिधियों ने महान जननायक के संघर्ष को याद किया।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में सोमवार को भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने उनके संघर्ष, बलिदान और आदिवासी अधिकारों के लिए किए गए योगदान को याद किया। कार्यक्रम में लोगों ने उनके आदर्शों पर चलने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।

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  • बानो में भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई।
  • जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
  • बिरजो कंडुलना ने बिरसा मुंडा के त्याग और बलिदान को अविस्मरणीय बताया।
  • रफीक अंसारी ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उनके संघर्ष को याद किया।
  • उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों को अपनाने और समाज जागरूक करने का संकल्प लिया।
  • कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में महान जननायक भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं सरकारी अधिकारी एकत्रित हुए और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और समाज के लिए किए गए योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने उनके आदर्शों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया। श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित लोगों ने उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया।

श्रद्धांजलि सभा में जुटे जनप्रतिनिधि और समाज के लोग

भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य सह झामुमो केंद्रीय सदस्य बिरजो कंडुलना, बीस सूत्री प्रखंड अध्यक्ष बिदेशिया बड़ाईक, बानो प्रखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रफीक अंसारी, प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ. दुलमु बुडिउली, आदिवासी एकता मंच बानो के अध्यक्ष आनंद मसीह टोपनो, कोनसौदे मुखिया सीता कुमारी, उकौली मुखिया कृपा हेमरोम, अनूप मिंज सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

सभी ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह श्रद्धा, सम्मान और प्रेरणा से भरा हुआ था।

संघर्ष और बलिदान की मिसाल थे बिरसा मुंडा

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज के सम्मान, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। उन्होंने अन्याय, शोषण और दमन के खिलाफ संघर्ष करते हुए समाज को एक नई दिशा दी।

बिरजो कंडुलना ने कहा: “भगवान बिरसा मुंडा के त्याग और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका जीवन आज भी समाज को संघर्ष, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए खड़े होने की प्रेरणा देता है।”

उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं बल्कि एक विचारधारा हैं, जो समाज को जागरूक और संगठित रहने का संदेश देती है।

जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए किया संघर्ष

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने विशेष रूप से बिरसा मुंडा के उस संघर्ष को याद किया, जिसके माध्यम से उन्होंने आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आंदोलन खड़ा किया था।

रफीक अंसारी ने कहा: “बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष आज भी समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है।”

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी बिरसा मुंडा के विचारों की प्रासंगिकता बनी हुई है और नई पीढ़ी को उनके जीवन से सीख लेकर समाज और देश के विकास में योगदान देना चाहिए।

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं भगवान बिरसा मुंडा

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बेहद कम उम्र में समाज के लिए बड़े संघर्ष किए और अपने नेतृत्व से लाखों लोगों को जागरूक किया।

वक्ताओं का मानना था कि आज के युवाओं को उनके जीवन से साहस, नेतृत्व, संघर्ष और सामाजिक जिम्मेदारी की सीख लेनी चाहिए। यदि युवा उनके आदर्शों को अपनाएं तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने केवल श्रद्धांजलि अर्पित ही नहीं की, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया। वक्ताओं ने कहा कि उनके विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सामाजिक एकता, अधिकारों की रक्षा, शिक्षा के प्रसार और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।

मौन रखकर दी गई श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर भगवान बिरसा मुंडा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पूरे वातावरण में सम्मान और कृतज्ञता की भावना दिखाई दी।

लोगों ने कहा कि महान जननायक के बलिदान को याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके विचारों को व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

न्यूज़ देखो: आज भी प्रासंगिक हैं बिरसा मुंडा के विचार

भगवान बिरसा मुंडा का जीवन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, अधिकार और स्वाभिमान की जीवंत प्रेरणा है। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित ऐसे कार्यक्रम समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। जल, जंगल और जमीन की रक्षा का उनका संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनके समय में था। आने वाली पीढ़ियों तक उनके विचारों को पहुंचाना समाज और व्यवस्था दोनों की जिम्मेदारी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

युवाओं को प्रेरणा देने वाले महापुरुषों को याद रखना भी जिम्मेदारी

महापुरुषों का सम्मान केवल एक दिन की श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके विचारों को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। समाज के अधिकारों, शिक्षा, जागरूकता और एकता के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष हमें अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का एहसास कराता है।

अपने क्षेत्र में होने वाले ऐसे प्रेरणादायक कार्यक्रमों में भाग लें, युवाओं को इतिहास से जोड़ें और समाज में जागरूकता फैलाएं। इस खबर पर अपनी राय कमेंट में जरूर दें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और महान जननायकों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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