समाधि पर्व को लेकर जमुआ के खरग़डीहा स्थित लंग़टा बाबा के समाधि स्थल पर उमड़ा आस्था का सैलाब

समाधि पर्व को लेकर जमुआ के खरग़डीहा स्थित लंग़टा बाबा के समाधि स्थल पर उमड़ा आस्था का सैलाब

author Surendra Verma
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  • जमुआ के खरगडीहा स्थित लंग़टा बाबा के समाधि स्थल पर आस्था का सैलाब उमड़ा।
  • चादर पोशी के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही लगने लगी।
  • लंगटा बाबा के समाधि स्थल पर सभी धर्मों के लोग श्रद्धा से माथा टेकने आते हैं।

घटना का विवरण:
जमुआ के खरगडीहा स्थित लंग़टा बाबा के समाधि स्थल पर सोमवार को समाधि पर्व के मौके पर आस्था का अपार सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह 6 बजे से ही श्रद्धालु चादर पोशी के लिए पहुंचने लगे और यह क्रम दिनभर चलता रहेगा। हर साल पौष मास पुर्णिमा के दिन यहां भक्ति और आस्था का दृश्य देखने को मिलता है, जहां लाखों श्रद्धालु चादर पोशी के लिए एकत्र होते हैं।

लंगटा बाबा का ऐतिहासिक संदर्भ:
लंगटा बाबा ने 1910 में महासमाधि ली थी, और तब से उनकी भक्ति में इज़ाफा हुआ है। कहा जाता है कि वे 1870 के दशक में नागा साधुओं की टोली के साथ खरगडीहा पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपने चमत्कारी कार्यों से सबका दिल जीता। एक बार एक कुत्ते को ठीक करने के बाद लोग उनकी दिव्यता को मानने लगे।

लंगटा बाबा की चमत्कारी शक्तियाँ:
लंगटा बाबा ने हमेशा पीड़ित मानवता की सेवा की। एक बार, जब खरगडीहा में प्लेग रोग फैला, तो बाबा की कृपा से क्षेत्र में रोग समाप्त हो गया था। उन्होंने कभी भी किसी चीज़ को ठुकराया नहीं; जो भी वस्तु वे नहीं लेते, उसे कुएं में फेंकवाने की प्रक्रिया थी, जो आज भी समाधि स्थल के पास मौजूद है।

समाधि पर्व और मेले का आयोजन:
पौष मास पुर्णिमा के दिन बाबा के समाधि स्थल पर मेला आयोजित किया जाता है, और लाखों श्रद्धालु चादर पोशी करने आते हैं। यहां पर हर साल लंगर की व्यवस्था की जाती है और बाबा के समाधि स्थल की आकर्षक सजावट होती है। इस अवसर पर जमुआ थाना प्रभारी ने पहली चादर पोशी की, जो एक परंपरा बन गई है।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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