
#आनंदपुर #शोक_समाचार : समीज गांव के संकीर्तन गुरु लक्ष्मण दास का हृदयगति रुकने से निधन।
पश्चिम सिंहभूम जिले के आनंदपुर प्रखंड अंतर्गत समीज गांव निवासी 73 वर्षीय लक्ष्मण दास का हृदयगति रुकने से निधन हो गया। वे समीज संकीर्तन मंडली के गुरु और धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्तित्व थे। उनके निधन से कोल्हान प्रमंडल पान-तांती समाज में शोक की लहर है। वे अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
- लक्ष्मण दास (73 वर्ष) का हृदयगति रुकने से निधन।
- निवासी – समीज गांव, आनंदपुर प्रखंड।
- संकीर्तन मंडली के गुरु और संस्थापक भूमिका।
- कोल्हान प्रमंडल पान-तांती समाज में शोक।
- तीन पुत्र और तीन पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार।
पश्चिम सिंहभूम जिला के आनंदपुर प्रखंड अंतर्गत समीज गांव में उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब 73 वर्षीय लक्ष्मण दास के निधन की खबर सामने आई। बताया गया कि उनका निधन हृदयगति रुकने के कारण हुआ। उनके आकस्मिक निधन से परिवारजनों सहित पूरे क्षेत्र में गहरा दुख व्याप्त है।
धार्मिक और मिलनसार व्यक्तित्व
स्वर्गीय लक्ष्मण दास एक धार्मिक प्रवृत्ति और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। गांव और आसपास के क्षेत्रों में उनका व्यवहार सभी के प्रति स्नेहपूर्ण और प्रेरणादायी था। वे सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते थे और समाज को एकजुट रखने का प्रयास करते थे।
संकीर्तन मंडली के गुरु
समीज गांव में संकीर्तन मंडली के गठन में स्व लक्ष्मण दास की प्रमुख भूमिका रही। वे इस मंडली के गुरु थे और भजन-कीर्तन की परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी अगुवाई में मंडली ने कई धार्मिक कार्यक्रमों और आयोजनों में भाग लिया, जिससे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण को मजबूती मिली।
ग्रामीणों का कहना है कि वे न केवल एक गुरु थे, बल्कि नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक भी थे।
पान-तांती समाज ने जताया शोक
कोल्हान प्रमंडल पान-तांती समाज ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मनोहरपुर-आनंदपुर प्रखंड कमिटी के सचिव मनोज दास, जो स्वर्गीय लक्ष्मण दास के पुत्र हैं, ने बताया कि उनके पिता ने समाज को संगठित रखने में हमेशा सकारात्मक भूमिका निभाई।
समाज के सदस्यों ने कहा कि लक्ष्मण दास का निधन सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र की अपूरणीय क्षति है।
भरा-पूरा परिवार छोड़ गए
स्व लक्ष्मण दास अपने पीछे तीन पुत्र और तीन पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और समाज के लोगों ने शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
गांव में शोक का माहौल है और लोग उनके द्वारा किए गए सामाजिक और धार्मिक कार्यों को याद कर भावुक हो रहे हैं।
न्यूज़ देखो: समाज के लिए समर्पित जीवन की विरासत
लक्ष्मण दास जैसे व्यक्तित्व किसी भी गांव और समाज की पहचान होते हैं। उन्होंने संकीर्तन और धार्मिक परंपरा को जीवित रखने में जो योगदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। उनका जीवन सादगी, सेवा और समर्पण का उदाहरण था। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
समाज को जोड़ने वाली विरासत को आगे बढ़ाएं
धार्मिक और सामाजिक परंपराएं हमारी पहचान हैं।
ऐसे प्रेरक व्यक्तित्वों की सीख को अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
नई पीढ़ी को संस्कार और संस्कृति से जोड़ना हमारी जिम्मेदारी है।
समाज की एकता और भाईचारा बनाए रखें।
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