
#विश्रामपुर #विश्वहिंदीदिवस : महाविद्यालय सभागार में शिक्षकों और छात्रों ने हिंदी के वैश्विक भविष्य पर रखे विचार।
विश्रामपुर प्रखंड के रेहला स्थित संत तुलसीदास महाविद्यालय में आज विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय के सभागार हॉल में संपन्न हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य कृष्ण कुमार चौबे ने की। इस अवसर पर हिंदी भाषा की वैश्विक भूमिका, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा हुई। शिक्षकों और छात्रों ने हिंदी को विश्व की अग्रणी भाषा बनाने के संकल्प को दोहराया।
- संत तुलसीदास महाविद्यालय रेहला के सभागार में हुआ आयोजन।
- कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य कृष्ण कुमार चौबे ने की।
- संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम पदाधिकारी राकेश कुमार शुक्ला ने किया।
- हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ श्याम मिश्रा ने हिंदी को वैश्विक स्तर पर प्रथम स्थान दिलाने का आह्वान किया।
- शिक्षक, कर्मचारी और दर्जनों छात्र-छात्राओं ने विचार गोष्ठी में भाग लिया।
विश्रामपुर के रेहला स्थित संत तुलसीदास महाविद्यालय में आज विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के सभागार हॉल में संपन्न हुआ, जिसमें शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी भाषा के महत्व, उसकी वैश्विक स्वीकार्यता और आने वाले समय में उसकी भूमिका को लेकर जागरूकता फैलाना रहा। पूरे आयोजन में हिंदी भाषा के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन
इस विशेष अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य कृष्ण कुमार चौबे ने की। वहीं कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी राकेश कुमार शुक्ला ने किया। मंच संचालन के दौरान कार्यक्रम की रूपरेखा, वक्ताओं का परिचय और विषय की प्रासंगिकता को सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे उपस्थित श्रोताओं का जुड़ाव बना रहा।
प्रभारी प्राचार्य का संबोधन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी प्राचार्य कृष्ण कुमार चौबे ने हिंदी भाषा के बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
कृष्ण कुमार चौबे ने कहा: “विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि हिंदी अब केवल भारत की भाषा नहीं रही, बल्कि यह पूरे विश्व को जोड़ने वाली भाषा बनती जा रही है। आज मैं इस बदलाव को देखकर अत्यंत खुशी और गर्व से अभिभूत हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि हिंदी की सरलता, भावनात्मक गहराई और व्यापक स्वीकार्यता ने इसे वैश्विक मंच पर एक सशक्त माध्यम बना दिया है। शिक्षा संस्थानों की यह जिम्मेदारी है कि वे हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में निरंतर सक्रिय भूमिका निभाएं।
हिंदी विभागाध्यक्ष का विचार
कार्यक्रम में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ श्याम मिश्रा ने हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा पर सारगर्भित विचार रखे। उन्होंने कहा:
डॉ श्याम मिश्रा ने कहा: “आज हिंदी भाषा विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है, लेकिन हम सब मिलकर प्रयास करें तो इसे पहले स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि हिंदी को सरल, सहज और संवाद की भाषा के रूप में पूरे विश्व में स्थापित किया जाए।”
उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे हिंदी को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि दैनिक जीवन, शोध, तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी इसका अधिकाधिक उपयोग करें।
शिक्षकों और कर्मचारियों की सहभागिता
इस अवसर पर महाविद्यालय के कई शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनमें संतोष शुक्ला, कुमारी संगीता, शबनम निशा, ज्योति कुमारी, अजय ओझा, त्रिपुरारी तिवारी, आशा कुमारी और अमित कुमार प्रमुख रूप से शामिल थे। सभी ने हिंदी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार को लेकर अपने विचार साझा किए और ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
छात्र-छात्राओं ने रखे अपने विचार
कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता रही छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी। इस दौरान तबस्सुम खातून, सुमन कुमारी, छाया कुमारी, शुभम कुमार, सनी कुमार, आशीष पांडे, अंजली कुमारी, गौतम राम सहित दर्जनों छात्र-छात्राओं ने मंच से हिंदी भाषा के महत्व, अपने अनुभव और भविष्य की अपेक्षाओं को साझा किया। छात्रों ने कहा कि हिंदी न केवल संवाद की भाषा है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, पहचान और सोच को भी प्रतिबिंबित करती है।
हिंदी भाषा और युवा पीढ़ी
कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि वर्तमान डिजिटल युग में हिंदी भाषा किस प्रकार नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। सोशल मीडिया, मोबाइल एप्लिकेशन, ऑनलाइन शिक्षा और सरकारी कार्यों में हिंदी की बढ़ती उपस्थिति को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यदि युवा पीढ़ी हिंदी को आत्मसात करती है, तो इसका वैश्विक विस्तार और तेज़ी से संभव है।
न्यूज़ देखो: शिक्षा संस्थानों से मजबूत हो रही हिंदी की वैश्विक भूमिका
संत तुलसीदास महाविद्यालय रेहला में आयोजित यह कार्यक्रम दर्शाता है कि हिंदी के प्रचार-प्रसार में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। शिक्षकों और छात्रों की साझा भागीदारी यह संकेत देती है कि हिंदी केवल अकादमिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और वैश्विक संवाद का सशक्त माध्यम बन रही है। ऐसे आयोजन यह सवाल भी उठाते हैं कि क्या हिंदी को तकनीक और रोजगार से और अधिक जोड़ा जा रहा है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हिंदी से ही बनेगी वैश्विक पहचान
हिंदी हमारी अभिव्यक्ति, संस्कृति और आत्मसम्मान की भाषा है। जब शिक्षक, छात्र और समाज मिलकर इसके विकास के लिए प्रयास करते हैं, तभी इसका वास्तविक विस्तार संभव होता है। ऐसे कार्यक्रम हमें अपनी भाषाई जिम्मेदारियों की याद दिलाते हैं और सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं।
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