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मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग बानो में श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई सरस्वती पूजा

#बानो #सरस्वती_पूजा : कॉलेज परिसर में विधि विधान से मां सरस्वती की पूजा, शिक्षकों और छात्राओं ने ज्ञान व सद्बुद्धि की कामना की।

सिमडेगा जिले के बानो स्थित मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग परिसर में सरस्वती पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई। कार्यक्रम में कॉलेज प्रबंधन, शिक्षक शिक्षिकाएं और छात्र छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं। विधि विधान से पूजा अर्चना कर ज्ञान, विवेक और उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। पूजा आयोजन ने शैक्षणिक वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर किया।

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  • मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग बानो में सरस्वती पूजा का आयोजन।
  • कॉलेज निदेशक डॉ. प्रह्लाद मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति।
  • एएनएम प्राचार्या एरेन बेक और प्राचार्या निशि डुंगडुंग सहित शिक्षक उपस्थित।
  • छात्र छात्राओं द्वारा पुष्प अर्पण और दीप प्रज्वलन
  • भक्ति संध्या और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न।

सिमडेगा जिले के प्रतिष्ठित मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग, बानो में विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा पूरे विधि विधान, श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाई गई। शैक्षणिक संस्थान में आयोजित इस धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम ने शिक्षा और संस्कार के समन्वय को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। सुबह से ही कॉलेज परिसर में उत्साह और भक्ति का वातावरण देखने को मिला।

विधि विधान से हुआ पूजा आयोजन

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। उपस्थित सभी शिक्षक शिक्षिकाओं और छात्र छात्राओं ने मां सरस्वती से ज्ञान, सद्बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मंत्रोच्चारण और पूजा विधि के दौरान पूरे परिसर में अनुशासन और श्रद्धा का भाव बना रहा।

निदेशक की गरिमामयी उपस्थिति

पूजा कार्यक्रम में कॉलेज के निदेशक डॉ. प्रह्लाद मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें नैतिकता, अनुशासन और सेवा भाव भी शामिल होना चाहिए।

कॉलेज निदेशक डॉ. प्रह्लाद मिश्रा ने कहा: “मां सरस्वती की आराधना हमें ज्ञान के साथ संस्कार और जिम्मेदारी का भी बोध कराती है।”

शिक्षकों और शिक्षिकाओं की सहभागिता

पूजा कार्यक्रम में एएनएम प्राचार्या एरेन बेक, प्राचार्या निशि डुंगडुंग, व्याख्याता कविता कुमारी, ऋचा हेंब्रम, ट्यूटर अमृता लवली, अल्बिना टोपनो, वंदना धनवार, आईवी सुप्रभा, खुशबू कुमारी, सरिता कैथा, लीलावती साहू, माटिल्डा प्रिया, बिनीता ब्रजभूषण सहित अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। सभी ने छात्राओं के साथ मिलकर पूजा अर्चना की और कार्यक्रम को सफल बनाया।

छात्र छात्राओं की सक्रिय भागीदारी

कॉलेज की सभी संकाय की छात्राओं ने पूजा में सक्रिय भूमिका निभाई। पूजा स्थल की सजावट, व्यवस्था संचालन और अनुशासन बनाए रखने में छात्राओं का योगदान सराहनीय रहा। इससे छात्राओं में सांस्कृतिक मूल्यों और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती दिखाई दी।

प्रसाद वितरण और सौहार्द

पूजा अर्चना के पश्चात सभी उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान शिक्षक और छात्राओं के बीच आत्मीयता और सौहार्द का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शैक्षणिक संस्थान केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण का भी माध्यम हैं।

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शाम को भक्ति संध्या का आयोजन

शाम के समय कॉलेज परिसर में भक्ति संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें संस्थान की सभी शिक्षिकाओं और छात्राओं ने भाग लिया। भक्ति गीतों और स्तुति से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। भक्ति संध्या ने दिनभर चले पूजा कार्यक्रम को भावनात्मक समापन प्रदान किया।

शैक्षणिक वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा

सरस्वती पूजा के आयोजन से पूरे कॉलेज परिसर में सकारात्मक ऊर्जा और अनुशासन का वातावरण देखने को मिला। इस तरह के आयोजनों से छात्राओं में मानसिक संतुलन, एकाग्रता और नैतिक मूल्यों का विकास होता है, जो नर्सिंग जैसे सेवा आधारित पेशे के लिए अत्यंत आवश्यक है।

न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कार का संदेश

मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग में आयोजित सरस्वती पूजा यह दर्शाती है कि शैक्षणिक संस्थान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन बना रहे हैं। शिक्षकों और छात्राओं की संयुक्त भागीदारी से कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया। ऐसे आयोजनों से न केवल सांस्कृतिक चेतना मजबूत होती है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में भी मदद मिलती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

ज्ञान, सेवा और संस्कार की ओर बढ़ता कदम

नर्सिंग जैसे सेवा प्रधान क्षेत्र में अध्ययनरत छात्राओं के लिए संस्कार और अनुशासन उतने ही आवश्यक हैं जितना शैक्षणिक ज्ञान। सरस्वती पूजा जैसे आयोजन इसी संतुलन को मजबूत करते हैं।
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Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

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