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Jamshedpur

गोलमुरी के आर डी टाटा तकनीकी संस्थान एनटीटीएफ में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई सरस्वती पूजा

#जमशेदपुर #शैक्षणिक_संस्कृति : बसंत पंचमी पर ज्ञान, कला और अनुशासन का प्रेरक उत्सव आयोजित।

जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित आर डी टाटा तकनीकी संस्थान एनटीटीएफ में बसंत पंचमी के अवसर पर माँ सरस्वती पूजा का भव्य आयोजन किया गया। एनटीटीएफ और टाटा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूजा के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन हुआ, जिससे परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। यह आयोजन शिक्षा, संस्कार और ज्ञान के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाला रहा।

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  • एनटीटीएफ और टाटा फाउंडेशन द्वारा बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का आयोजन।
  • छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की रही सक्रिय सहभागिता।
  • संयोजक शर्मिष्ठा दास ने विद्यार्थियों को पर्व का महत्व बताया।
  • भजन, श्लोक पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा कार्यक्रम।
  • प्रसाद वितरण और प्रेरक संदेश के साथ समारोह का समापन।

जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित आर डी टाटा तकनीकी संस्थान एनटीटीएफ परिसर में बसंत पंचमी का पर्व पूरे श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही संस्थान परिसर में पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थीं, जहां विद्यार्थियों ने मिलकर माँ सरस्वती की प्रतिमा को पुष्प, वस्त्र और सजावटी सामग्रियों से भव्य रूप से सजाया।

श्रद्धा और अनुशासन के साथ पूजा-अर्चना

पूरे विधि-विधान के साथ मंत्रोच्चारण, हवन और आरती संपन्न की गई। पूजा के दौरान संस्थान का वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया, जहां छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अभिभावक एक साथ माँ सरस्वती की वंदना करते नजर आए। विद्यार्थियों ने अपनी किताबें, कॉपियां और वाद्य यंत्र माँ सरस्वती के चरणों में अर्पित कर विद्या, विवेक और सफलता का आशीर्वाद मांगा।

संयोजक ने बताया बसंत पंचमी का महत्व

इस अवसर पर विद्यालय की संयोजक शर्मिष्ठा दास ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के महत्व पर प्रकाश डाला।

शर्मिष्ठा दास ने कहा: “बसंत पंचमी विद्यार्थियों के लिए अत्यंत शुभ दिन है। माँ सरस्वती केवल विद्या की देवी ही नहीं, बल्कि बुद्धि, संस्कार और सृजनशीलता की प्रतीक हैं।”

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे शिक्षा को केवल रोजगार का माध्यम न मानकर जीवन निर्माण का आधार बनाएं।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाया उत्साह

पूजा के उपरांत संस्थान में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने भजन, श्लोक पाठ और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से माँ सरस्वती की महिमा का गुणगान किया। सुर, ताल और भक्ति के संगम ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। अभिभावकों ने भी बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए आयोजन को प्रेरणादायक बताया।

बसंत पंचमी का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

कार्यक्रम के दौरान बसंत पंचमी के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में शिक्षा और ज्ञान की उपासना का प्रतीक है। पुराणों और ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इतिहासकारों के अनुसार यह पर्व प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है और हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ता है।

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पीले रंग के वस्त्र धारण करने और पीले पकवानों की परंपरा को भी इस पर्व की विशेषता बताया गया, जो समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।

विद्यालय में उत्सव जैसा माहौल

एनटीटीएफ परिसर में पूरे दिन उत्सव जैसा माहौल बना रहा। विशेष भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने मधुर स्वर में माँ सरस्वती की वंदना की। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया, जिससे बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया।

प्रेरक संदेश और उपस्थित गणमान्य

समारोह के समापन अवसर पर संयोजक मुनमुन गोराई, श्री बिबेक नंदन प्रसाद और सुश्री मनीषा मुंडा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि माँ सरस्वती के आशीर्वाद से ज्ञान, अनुशासन और सद्गुणों का विकास होता है। उन्होंने छात्रों से निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

इस अवसर पर संस्थान की प्राचार्य प्रीता जॉन, उप प्राचार्य रमेश राय, पल्लवानी चौधरी, स्मृति, शिव प्रसाद, निरंजन कुमार, अर्पण, वीणा सिंह, निर्णय कुमार महतो, सुमन कुमार, नकुल कुमार, कौशल सहित अन्य शिक्षक एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

बसंत पंचमी और विद्यार्थियों के लिए इसका महत्व

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि बसंत पंचमी शिक्षा के शुभारंभ का पर्व है, जिसे विद्यारंभ संस्कार के रूप में भी जाना जाता है। यह दिन शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है और छात्रों के लिए विशेष प्रेरणा का स्रोत है।

न्यूज़ देखो: शिक्षा और संस्कार का जीवंत उदाहरण

एनटीटीएफ में आयोजित सरस्वती पूजा यह दर्शाती है कि तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ संस्थान सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व देता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को केवल कुशल पेशेवर ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी बनाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

ज्ञान और संस्कार से बनता है उज्ज्वल भविष्य

जब शिक्षा श्रद्धा और अनुशासन से जुड़ती है, तब समाज को मजबूत आधार मिलता है। इस तरह के आयोजनों को साझा करें, अपनी राय कमेंट में रखें और दूसरों को भी प्रेरित करें—क्योंकि ज्ञान का प्रकाश जितना फैलेगा, समाज उतना ही सशक्त बनेगा।

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