
#मनिका #सरस्वती_पूजा : बसंत पंचमी पर श्रद्धा और परंपरा के साथ निकली भव्य विसर्जन जुलूस।
लातेहार जिले के मनिका प्रखंड में बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती की पूजा हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। पूजा उपरांत शनिवार को सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों, मंदिरों और गांव-टोला के पूजा पंडालों से भव्य विसर्जन जुलूस निकाले गए। गाजे-बाजे, झांकियों और भक्तिमय माहौल के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिली। पूरे आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन की सतर्क निगरानी में शांति और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
- मनिका प्रखंड मुख्यालय में बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा श्रद्धापूर्वक आयोजित।
- सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों, मंदिरों और गांव-टोला से निकली विसर्जन जुलूस।
- स्कूली बच्चे, महिलाएं, पुरुष और युवा बड़ी संख्या में जुलूस में शामिल।
- आकर्षक झांकियों और गाजे-बाजे के साथ श्रद्धालु झूमते-नाचते दिखे।
- थाना प्रभारी प्रभात कुमार दास के निर्देश पर पुलिस की कड़ी निगरानी।
बसंत पंचमी के पावन अवसर पर मनिका प्रखंड मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा पूरे विधि-विधान और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुई। सुबह से ही पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई, जहां बच्चों, युवाओं और अभिभावकों ने मां सरस्वती से विद्या, विवेक और संस्कार का आशीर्वाद मांगा। पूजा के बाद हवन एवं वैदिक अनुष्ठान संपन्न कर श्रद्धालुओं ने मां की प्रतिमा विसर्जन की तैयारी शुरू की।
पूजा पंडालों में दिखी भक्ति और उल्लास की छटा
मनिका प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों, मंदिर परिसरों और गांव-टोला में स्थापित पूजा पंडालों में विशेष रौनक देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना की और पूरे दिन भजन-कीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे। बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने मां सरस्वती की आराधना के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भी भाग लिया।
गाजे-बाजे के साथ निकली भव्य विसर्जन जुलूस
पूजा कार्यक्रम संपन्न होने के बाद शनिवार को क्षेत्र के सभी पूजा स्थलों से बारी-बारी से विसर्जन जुलूस निकाले गए। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक गीतों के साथ निकली जुलूस ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में बदल दिया। स्कूली बच्चे-बच्चियां, महिलाएं, पुरुष एवं भारी संख्या में युवाओं ने जुलूस में भाग लेकर आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया।
आकर्षक झांकियों ने मोहा मन
गांव-टोला की पूजा समितियों द्वारा मां सरस्वती की झांकियों को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रंग-बिरंगी रोशनी, पारंपरिक सजावट और सजीव कलाकारी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कई स्थानों पर झांकियों को देखने के लिए लोग रुकते नजर आए और श्रद्धालुओं की नजरें उन पर से हट नहीं रही थीं।
नाचते-गाते श्रद्धालुओं ने बढ़ाया उत्साह
विसर्जन जुलूस के दौरान श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते और नाचते नजर आए। युवाओं के साथ-साथ महिलाएं और बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ जुलूस में शामिल हुए। यह दृश्य सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया, जहां सभी वर्गों के लोग एक साथ मां सरस्वती की विदाई में सहभागी बने।
विसर्जन स्थल पर नम आंखों से विदाई
जुलूस पूरे क्षेत्र का भ्रमण करते हुए निर्धारित विसर्जन स्थल पर पहुंचा। वहां पुरोहितों द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजा संपन्न कर श्रद्धालुओं ने मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन किया। नम आंखों से विदाई देते हुए श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष पुनः मां के आगमन की कामना की।
सुरक्षा और शांति व्यवस्था रही चाक-चौबंद
पूरे विसर्जन जुलूस के दौरान सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना प्रभारी प्रभात कुमार दास के निर्देशानुसार पुलिस बल की कड़ी निगरानी रही। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की तैनाती की गई थी, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो। प्रशासनिक सतर्कता के चलते पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।

न्यूज़ देखो: आस्था और अनुशासन का संतुलित उदाहरण
मनिका प्रखंड में आयोजित सरस्वती पूजा और विसर्जन जुलूस यह दर्शाता है कि धार्मिक आयोजन अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ भी संपन्न किए जा सकते हैं। श्रद्धालुओं की व्यापक भागीदारी और पुलिस प्रशासन की सतर्कता ने आयोजन को सफल बनाया। यह आयोजन सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के साथ सामाजिक सौहार्द को भी मजबूत करता है। आने वाले समय में ऐसे आयोजनों में प्रशासन और समाज के बीच बेहतर समन्वय की अपेक्षा की जा सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सांस्कृतिक परंपराओं को संजोने की जिम्मेदारी हम सबकी
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सहभागिता समाज को जोड़ने का माध्यम बनती है। मनिका में सरस्वती पूजा का आयोजन यह संदेश देता है कि परंपरा, अनुशासन और सुरक्षा एक साथ चल सकते हैं। ऐसे आयोजनों में सहयोग और जागरूकता से ही सामाजिक एकता मजबूत होती है।
आप भी अपनी क्षेत्रीय परंपराओं को सहेजने में सक्रिय भूमिका निभाएं। खबर पर अपनी राय साझा करें, लेख को आगे बढ़ाएं और संस्कृति व सामाजिक जिम्मेदारी के इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।







