Garhwa

मेराल में सावित्रीबाई फुले की जयंती श्रद्धा और सामाजिक चेतना के साथ मनाई गई

#गढ़वा #सावित्रीबाईफुलेजयंती : अंबेडकर चौपाल में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा और सामाजिक समानता पर दिया गया जोर।

गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड में शनिवार 04 जनवरी 2026 को महिला शिक्षा की प्रणेता सावित्रीबाई फुले की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। लोवादाग स्थित अंबेडकर चौपाल में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य सावित्रीबाई फुले के शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े विचारों को जनमानस तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम में उनके संघर्षपूर्ण जीवन और समाज सुधार में योगदान को स्मरण किया गया।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • मेराल प्रखंड के लोवादाग में अंबेडकर चौपाल पर कार्यक्रम आयोजित।
  • 04 जनवरी 2026 को मनाई गई सावित्रीबाई फुले की जयंती
  • कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षक बटेश्वर राम ने की।
  • रघुराई राम ने चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
  • शिक्षा, समानता और सामाजिक चेतना पर दिया गया संदेश।
  • स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की रही भागीदारी।

गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड में देश की प्रथम महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक माता सावित्रीबाई फुले की जयंती पूरे सम्मान और वैचारिक गंभीरता के साथ मनाई गई। शनिवार को लोवादाग स्थित अंबेडकर चौपाल में आयोजित इस कार्यक्रम में सावित्रीबाई फुले के शिक्षा आंदोलन और सामाजिक समानता के संघर्ष को याद किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ना और शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षक बटेश्वर राम ने की। आयोजन की शुरुआत बामसेफ के झारखंड स्टेट को-ऑर्डिनेटर सह अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ, गढ़वा के अध्यक्ष रघुराई राम द्वारा माता सावित्रीबाई फुले और भारत रत्न डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने दोनों महान विभूतियों के योगदान को नमन किया।

सावित्रीबाई फुले का संघर्षपूर्ण जीवन

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला। बताया गया कि जब समाज में महिलाओं की शिक्षा को पाप समझा जाता था, उस दौर में सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा की मशाल जलाकर सामाजिक क्रांति की नींव रखी। उन्होंने न केवल महिलाओं के लिए स्कूल खोले, बल्कि जातिगत भेदभाव और सामाजिक रूढ़ियों के खिलाफ भी आवाज बुलंद की। उनके प्रयासों ने भारतीय समाज को नई दिशा दी।

शिक्षा को बताया सामाजिक बदलाव का आधार

अध्यक्षीय संबोधन में शिक्षक बटेश्वर राम ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा:

“शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और आत्मसम्मान का मार्ग है। सावित्रीबाई फुले ने जिस साहस के साथ शिक्षा आंदोलन शुरू किया, वही साहस आज हमें सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अपनाने की जरूरत है।”

उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से अपील की कि वे बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दें और सावित्रीबाई फुले के विचारों को व्यवहार में उतारें।

सामाजिक संगठनों की भूमिका पर चर्चा

कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि यदि समाज को वास्तव में समानता और न्याय की ओर ले जाना है, तो संगठित प्रयास आवश्यक हैं। शिक्षा, जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों के प्रसार से ही समाज में स्थायी बदलाव संभव है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने शिक्षा के अधिकार और सामाजिक न्याय को मजबूत करने का संकल्प लिया।

अंबेडकर चौपाल बना वैचारिक केंद्र

लोवादाग स्थित अंबेडकर चौपाल इस आयोजन के दौरान एक वैचारिक केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया। यहां उपस्थित लोगों ने सावित्रीबाई फुले और बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों को वर्तमान सामाजिक परिदृश्य से जोड़ते हुए चर्चा की। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम गांव स्तर पर चेतना जगाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

युवाओं और समाज के लिए संदेश

कार्यक्रम के दौरान यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि सावित्रीबाई फुले की जयंती केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सामाजिक जिम्मेदारी का अवसर है। वक्ताओं ने कहा कि आज भी समाज में शिक्षा और समानता की राह में कई चुनौतियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।

न्यूज़ देखो: शिक्षा से ही मजबूत होगा समाज

मेराल में आयोजित यह कार्यक्रम दर्शाता है कि ग्रामीण स्तर पर भी सावित्रीबाई फुले के विचार जीवित हैं। ऐसे आयोजन समाज को यह याद दिलाते हैं कि शिक्षा और सामाजिक न्याय के बिना विकास अधूरा है। अब सवाल यह है कि क्या हम इन विचारों को केवल मंचों तक सीमित रखेंगे या अपने व्यवहार में भी उतारेंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

विचारों को अपनाने से ही सच्ची श्रद्धांजलि

सावित्रीबाई फुले को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब हम शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाएं।
महिलाओं और वंचित वर्गों को समान अवसर देने का संकल्प लें।
इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में लिखें और शिक्षा व समानता की इस सोच को आगे बढ़ाएं।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

IMG-20250723-WA0070
IMG-20251223-WA0009
आगे पढ़िए...

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Shamsher Ansari

मेराल, गढ़वा

Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: