
#गुमला #स्कूलवाहनजांच : डीसी-एसपी के निर्देश पर नोटरेडेम व शिशु मंदिर स्कूल के पास वाहनों की कड़ी जाँच, अनियमितताओं पर कार्रवाई की चेतावनी
- स्कूली वाहन जाँच में दो गाड़ियाँ जब्त, एक ओमनी वैन शामिल।
- कई वाहन चालकों के पास लाइसेंस, परमिट, बीमा, फिटनेस, टैक्स, पॉल्यूशन तक नहीं मिले।
- अभिभावक–प्रिंसिपल पर भी कार्रवाई की चेतावनी; बिना हेलमेट आए अभिभावकों की तस्वीरें सुरक्षित।
- दर्जनों टेंपो–ऑटो चालक जाँच से पहले ही नदारद, बच्चे स्कूल में फंसे।
- डीटीओ, जिला शिक्षा अधीक्षक और एमवीआई टीम अभियान में मौजूद।
गुमला: उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित और पुलिस अधीक्षक हारिश बिन जमा के संयुक्त निर्देश पर बुधवार को नोटरेडेम स्कूल और शिशु मंदिर स्कूल के पास स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की सघन जाँच की गई। जाँच जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) के नेतृत्व में की गई, जिसमें जिला शिक्षा अधीक्षक और मोटर यान निरीक्षक भी शामिल रहे।
कार्यवाही के दौरान बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर उल्लंघन सामने आए। कई वाहन चालक तो जाँच की सूचना पाकर स्कूल पहुँचे ही नहीं। इससे दर्जनों बच्चे विद्यालय परिसर में फँसे रहे और अभिभावकों को हड़बड़ी में स्कूल आकर उन्हें घर ले जाना पड़ा।
जाँच अभियान से खुली पोल: चालकों की लापरवाही और बच्चों की जान से खिलवाड़
जाँच के समय पाया गया कि कई वाहनों में आवश्यक दस्तावेज तक मौजूद नहीं थे।
लाइसेंस, बीमा, परमिट, फिटनेस, पॉल्यूशन, टैक्स—अधिकांश में कमी पाई गई। एक ओमनी वैन सहित दो वाहन मौके पर ही जब्त कर लिए गए।
डीटीओ ने कड़े शब्दों में कहा कि बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने बिना हेलमेट आए कई अभिभावकों की वीडियो–फोटो संरक्षित कराई और कहा—
“हेलमेट जुर्माने से बचने के लिए नहीं, दुर्घटना से बचने के लिए पहनें। सिर की कीमत अनमोल है।”
स्कूल प्रबंधन पर भी गिरी गाज
जिला शिक्षा अधीक्षक ने मौके पर मौजूद प्रिंसिपलों से जवाब तलब किया और कहा कि यदि अनियमितताएँ दूर नहीं हुईं तो स्कूल की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी।
स्कूलों के कागजात भी तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया।
इस पर विद्यालय प्रबंधन ने आरोप लगाया कि कई बार अभिभावक स्वयं ही ओवरलोडिंग के लिए दबाव डालते हैं ताकि “दो पैसे बच जाएं”।
इस पर DTO ने कहा कि कमर्शियल नंबर की अनदेखी का कारण भी यही मानसिकता है, जबकि कमर्शियल नंबर पर बीमा क्लेम आसान होता है, जो बच्चों की सुरक्षा हेतु अत्यंत आवश्यक है।
डीटीओ द्वारा जारी नए सख्त निर्देश
जिला परिवहन पदाधिकारी ने सभी स्कूलों और वाहन चालकों को निर्देश दिया:
1. कमर्शियल नंबर अनिवार्य
सभी स्कूल वाहनों पर पीला नंबर प्लेट आवश्यक है।
एक हफ्ते के भीतर सुधार नहीं होने पर कार्रवाई तय।
2. क्षमता का पालन
वाहन में निर्धारित सीटों से अधिक बच्चे नहीं बैठेंगे।
ओवरलोडिंग पर तत्काल कार्रवाई।
3. स्कूल प्राधिकरण पत्र
हर चालक के पास स्कूल परमिशन लेटर और ऑथोराइजेशन लेटर अनिवार्य होगा।
4. सभी दस्तावेज पूरे हों
लाइसेंस, बीमा, परमिट, फिटनेस, टैक्स और पॉल्यूशन प्रमाणपत्र के बिना कोई वाहन नहीं चलेगा।
5. बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
बच्चों को जोखिम में डालने वालों पर निरंतर अभियान चलेगा।
6. आचरण प्रमाण पत्र
स्कूली बच्चों को ढोने वाले सभी चालकों को चरित्र/आचरण प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है।
जाँच टीम में शामिल अधिकारी
अभियान में जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, मोटर यान निरीक्षक रॉबिन अजय सिंह, प्रदीप तिर्की और संबंधित कर्मी मौजूद रहे।
डीटीओ ने कहा कि भविष्य में बिना कागजात वाले वाहनों पर नियमित और कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
न्यूज़ देखो: बच्चों की सुरक्षा पर प्रशासन की पैनी नजर
बढ़ती दुर्घटनाओं और लापरवाही के बीच गुमला प्रशासन का यह कदम अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। स्कूलों और चालकों की जवाबदेही तय होने से बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिलेगी। यह सख्त अभियान भविष्य में स्कूल वाहनों की व्यवस्था को और मजबूत करेगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी—हम सबकी
स्कूली वाहन सुरक्षा सिर्फ प्रशासन का नहीं, हर अभिभावक और चालक का कर्तव्य है।
बच्चों को किसी भी असुरक्षित वाहन में न भेजें, कमर्शियल नंबर और दस्तावेज अवश्य जांचें।
यदि आप भी बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, तो इस खबर को साझा करें और कमेंट कर अपने सुझाव दें।







