
#कर्रा #कृषि_प्रशिक्षण : कृषि विज्ञान केंद्र खूंटी और डब्ल्यूसीएसएफ फाउंडेशन के सहयोग से किसानों को दी गई वैज्ञानिक खेती की जानकारी।
खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड में किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के उद्देश्य से कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र खूंटी एवं डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से दो अलग-अलग गांवों में प्रशिक्षण संपन्न हुआ। कार्यक्रमों में वैज्ञानिक खेती, फसल प्रबंधन और आयवर्धन तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी गई। सौ से अधिक किसानों की भागीदारी ने इस पहल की उपयोगिता को रेखांकित किया।
- कर्रा प्रखंड के ग्राम कोसांबी और ग्राम केदली में आयोजित हुआ प्रशिक्षण।
- कृषि विज्ञान केंद्र, खूंटी के वैज्ञानिकों ने दी आधुनिक खेती की जानकारी।
- डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन ने किया कार्यक्रम का समन्वय।
- सौ से अधिक किसानों ने प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी की।
- वैज्ञानिक खेती, फसल विविधीकरण और बाजारोन्मुख उत्पादन पर जोर।
कर्रा प्रखंड में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। कृषि विज्ञान केंद्र, खूंटी द्वारा डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन के सक्रिय सहयोग से किसानों के लिए दो अलग-अलग स्थानों पर कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी कृषि की ओर प्रेरित करना रहा।
ग्राम कोसांबी में हुआ पहला कृषि प्रशिक्षण
पहला कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम कर्रा प्रखंड के ग्राम कोसांबी में आयोजित किया गया। कोसांबी पंचायत अंतर्गत कोसांबी स्कूल के सामने स्थित चबूतरे पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक श्री जिब्रेज राज शर्मा ने किसानों को आधुनिक खेती, फसल प्रबंधन, मृदा संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने कहा:
जिब्रेज राज शर्मा ने कहा: “यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें तो कम लागत में अधिक और स्थायी उत्पादन संभव है। मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रयोग और उन्नत बीज किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।”
इस अवसर पर पंचायत महिला मित्र दशमी बड़ा की सक्रिय भूमिका रही, जिन्होंने किसानों को प्रशिक्षण से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं प्रखंड समन्वयक शशि देवी ने कार्यक्रम के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी निभाई।
ग्राम केदली में किसानों को मिला उन्नत तकनीकों का ज्ञान
इसी क्रम में दूसरा कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम कर्रा प्रखंड के ग्राम केदली (पोस्ट छाता, थाना कर्रा) में आयोजित किया गया। गांव के चबूतरे पर आयोजित इस प्रशिक्षण में छाता पंचायत सहित आसपास के गांवों से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
यहां कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. निखिल राज ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण, आय बढ़ाने के उपाय और बाजारोन्मुख खेती के महत्व पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ नई फसलों और आधुनिक तरीकों को अपनाने की सलाह दी।
डॉ. निखिल राज ने कहा: “फसल विविधीकरण और बाजार की मांग के अनुसार खेती करने से किसानों की आमदनी में स्थायी वृद्धि संभव है। किसानों को जोखिम कम करने के लिए मिश्रित और बहु-फसली खेती अपनानी चाहिए।”
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान भी प्राप्त किए, जिससे कार्यक्रम और अधिक व्यवहारिक एवं उपयोगी बन सका।
डब्ल्यूसीएसएफ फाउंडेशन की सक्रिय भूमिका
दोनों प्रशिक्षण कार्यक्रमों में डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था की ओर से एलिन गुड़िया एवं जसिंता गुड़िया ने प्रोग्राम मैनेजर के रूप में सक्रिय योगदान दिया। उन्होंने किसानों को संस्था द्वारा कृषि, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी और प्रशिक्षण में मिली जानकारियों को खेतों में लागू करने के लिए किसानों को प्रेरित किया।
पूरे आयोजन का नेतृत्व डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन की स्टेट कोऑर्डिनेटर सुश्री प्रियंका कुमारी सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने दोनों स्थानों पर किसानों से संवाद करते हुए कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और समन्वय को प्रभावी ढंग से संचालित किया।
सौ से अधिक किसानों की भागीदारी
दोनों स्थानों पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कुल मिलाकर सौ से अधिक किसानों ने भाग लिया। किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र और डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण उन्हें नई तकनीकों से जोड़ने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
भविष्य में भी जारी रहेगा प्रशिक्षण अभियान
संस्था की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि भविष्य में भी कृषि विज्ञान केंद्र जैसे वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से किसानों तक सही, उपयोगी और व्यवहारिक जानकारी पहुंचाने का कार्य निरंतर जारी रहेगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण कृषि व्यवस्था को सशक्त बनाते हुए किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है।

न्यूज़ देखो: वैज्ञानिक खेती की दिशा में मजबूत कदम
कर्रा प्रखंड में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दर्शाता है कि यदि वैज्ञानिक संस्थान और सामाजिक संगठन मिलकर कार्य करें, तो ग्रामीण किसानों तक आधुनिक तकनीकें प्रभावी रूप से पहुंचाई जा सकती हैं। ऐसे प्रयास किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सवाल यह है कि क्या ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता सुनिश्चित की जाएगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
किसान सशक्तिकरण से ही मजबूत होगा ग्रामीण भारत
खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान और तकनीक का क्षेत्र भी है। सही जानकारी और प्रशिक्षण से किसान अपनी मेहनत का बेहतर फल पा सकते हैं।
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जय किसान, जय कृषि, जय भारत।







