
#धनबाद #ऊर्जा_मित्र : स्मार्ट मीटर व्यवस्था से रोजगार पर संकट, सम्मेलन में स्थायीकरण की मांग।
धनबाद में झारखंड राज्य ऊर्जा मित्र संघ का द्वितीय वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो शामिल हुए। सम्मेलन की शुरुआत बलियापुर स्थित विनोद धाम से लाई गई पावन मिट्टी को नमन कर की गई। इस दौरान स्मार्ट मीटर व्यवस्था से उत्पन्न रोजगार संकट पर गंभीर चर्चा हुई। ऊर्जा मित्रों ने अपनी आजीविका को लेकर गहरी चिंता जताई और सरकार से ठोस समाधान की मांग की।
- धनबाद में झारखंड राज्य ऊर्जा मित्र संघ का द्वितीय वार्षिक सम्मेलन आयोजित।
- सम्मेलन की शुरुआत विनोद धाम की पावन मिट्टी को नमन कर हुई।
- स्मार्ट मीटर से ऊर्जा मित्रों के रोजगार पर संकट की चिंता।
- ऊर्जा मित्रों ने स्थायीकरण और उचित वेतनमान की मांग रखी।
- विधायक जयराम कुमार महतो ने सड़क से सदन तक लड़ाई का आश्वासन दिया।
धनबाद में आयोजित झारखंड राज्य ऊर्जा मित्र संघ का द्वितीय वार्षिक सम्मेलन राज्यभर के ऊर्जा मित्रों के लिए अहम साबित हुआ। सम्मेलन में बड़ी संख्या में ऊर्जा मित्र शामिल हुए और स्मार्ट मीटर व्यवस्था के कारण उत्पन्न हो रहे रोजगार संकट पर खुलकर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में माननीय डुमरी विधायक श्री जयराम कुमार महतो की उपस्थिति ने ऊर्जा मित्रों को संबल और भरोसा दिया।
सम्मेलन की शुरुआत बलियापुर स्थित विनोद धाम से लाई गई पावन मिट्टी को नमन कर की गई, जिससे कार्यक्रम को सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व मिला। इसके बाद ऊर्जा मित्रों ने अपनी समस्याएं, आशंकाएं और मांगें एक स्वर में मंच के माध्यम से सामने रखीं।
स्मार्ट मीटर से बढ़ता रोजगार संकट
सम्मेलन का मुख्य विषय स्मार्ट मीटर व्यवस्था के कारण उत्पन्न रोजगार संकट रहा। ऊर्जा मित्रों ने बताया कि वे वर्षों से घर-घर जाकर मीटर रीडिंग और बिजली बिलिंग का कार्य करते आ रहे हैं। इस कार्य के माध्यम से हजारों परिवारों की आजीविका चल रही है।
ऊर्जा मित्रों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद पारंपरिक मीटर रीडिंग और बिलिंग कार्य समाप्त होने की कगार पर है। इससे उन्हें काम से हटाए जाने का डर सता रहा है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
ऊर्जा मित्रों की प्रमुख मांगें
सम्मेलन में ऊर्जा मित्रों ने सरकार के समक्ष अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखीं। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था लागू होने से पहले उनके भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ऊर्जा मित्रों ने मांग की कि उन्हें स्थायी किया जाए, उचित वेतनमान दिया जाए और 60 वर्ष की आयु तक समायोजन सुनिश्चित किया जाए। उनका तर्क है कि वर्षों की सेवा के बाद उन्हें अचानक बेरोजगार करना अन्यायपूर्ण होगा।
विधायक जयराम कुमार महतो का संबोधन
सम्मेलन को संबोधित करते हुए डुमरी विधायक श्री जयराम कुमार महतो ने ऊर्जा मित्रों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए उनके संघर्ष में साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया।
जयराम कुमार महतो ने कहा: “ऊर्जा मित्रों के अधिकारों और रोजगार की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी। इस मुद्दे को आगामी विधानसभा सत्र में प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि ऊर्जा मित्र राज्य की बिजली व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके साथ अन्याय किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। विधायक ने भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाया जाएगा।
सम्मेलन का राज्यस्तरीय महत्व
यह सम्मेलन केवल धनबाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव पूरे झारखंड में कार्यरत ऊर्जा मित्रों से जुड़ा हुआ है। सम्मेलन में राज्यभर से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति साझा की और एकजुट होकर आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की।
ऊर्जा मित्र संघ ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
आजीविका और सम्मान का सवाल
सम्मेलन में बार-बार यह बात सामने आई कि ऊर्जा मित्र केवल रोजगार नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा की भी मांग कर रहे हैं। वर्षों की सेवा के बावजूद अनिश्चित भविष्य ने उन्हें मानसिक तनाव में डाल दिया है।
ऊर्जा मित्रों ने कहा कि स्मार्ट मीटर जैसी तकनीकी व्यवस्था लागू करते समय मानव संसाधन के पुनर्वास और समायोजन की ठोस नीति बनाई जानी चाहिए।
न्यूज़ देखो: तकनीक बनाम रोजगार का अहम सवाल
धनबाद में आयोजित यह सम्मेलन यह सवाल खड़ा करता है कि तकनीकी प्रगति के साथ रोजगार सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। ऊर्जा मित्रों की आशंका और मांगें पूरी तरह वाजिब प्रतीत होती हैं। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार स्मार्ट मीटर व्यवस्था के साथ-साथ इन हजारों परिवारों की आजीविका को लेकर क्या ठोस कदम उठाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकारों की लड़ाई में एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत
ऊर्जा मित्रों का यह सम्मेलन हमें याद दिलाता है कि रोजगार केवल आजीविका नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का सवाल भी है। तकनीक के साथ मानव हितों का संतुलन बनाना समय की मांग है।
यदि आप भी इस मुद्दे को महत्वपूर्ण मानते हैं, तो अपनी आवाज बुलंद करें।
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सजग रहें, एकजुट रहें और न्यायपूर्ण व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाएं।



