
#चाईबासा #नक्सल_मुठभेड़ : सारंडा के कुमड़ी इलाके में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच घंटों चली मुठभेड़।
झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के चाईबासा स्थित सारंडा जंगल में 22 जनवरी 2026 की सुबह सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता अनल दा समेत 15 नक्सली मारे गए। यह अभियान नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
- सारंडा जंगल के कुमड़ी इलाके में सुबह करीब 6 बजे मुठभेड़ शुरू हुई।
- सीआरपीएफ कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई।
- मुठभेड़ में 15 नक्सली ढेर, जिनमें पतिराम मांझी उर्फ अनल दा शामिल।
- अनल दा पर झारखंड, ओडिशा और एनआईए द्वारा कुल 2 करोड़ से अधिक का इनाम घोषित।
- घटनास्थल से हथियार, गोला-बारूद और दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद।
- कोई सुरक्षाकर्मी हताहत नहीं, सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी।
झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में एक बार फिर सुरक्षाबलों ने बड़ी सफलता हासिल की है। पश्चिम सिंहभूम जिले के चाईबासा क्षेत्र अंतर्गत सारंडा जंगल में हुई इस मुठभेड़ को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में गिना जा रहा है। सुरक्षाबलों की सतर्कता और सटीक रणनीति के चलते नक्सलियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस घटना से इलाके में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को करारा झटका लगा है।
कैसे शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षाबलों को यह पुख्ता खुफिया जानकारी मिली थी कि सारंडा जंगल के कुमड़ी क्षेत्र में शीर्ष माओवादी नेताओं की मौजूदगी है। इसके बाद सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और स्थानीय पुलिस बल की संयुक्त टीम ने तड़के सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सुबह करीब 6 बजे जैसे ही सुरक्षाबल संदिग्ध इलाके में पहुंचे, छिपे नक्सलियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी।
घंटों चली भीषण मुठभेड़
नक्सलियों की ओर से की गई फायरिंग का सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी से जवाब दिया। जंगल और पहाड़ी इलाके में मुठभेड़ कई घंटों तक चली। दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई, लेकिन बेहतर रणनीति और इलाके की घेराबंदी के चलते सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को पीछे हटने का मौका नहीं दिया। मुठभेड़ के बाद पूरे क्षेत्र में सघन सर्च अभियान शुरू किया गया, जो अब भी जारी है।
एक करोड़ का इनामी अनल दा ढेर
इस मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम पतिराम मांझी उर्फ अनल दा का है। वह झारखंड में सक्रिय शीर्ष माओवादी नेताओं में से एक था। अनल दा पर झारखंड सरकार द्वारा 1 करोड़ रुपये, ओडिशा सरकार द्वारा 1.20 करोड़ रुपये और एनआईए द्वारा 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह 149 से अधिक नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड रहा है।
हथियार और सामग्री की बरामदगी
मुठभेड़ स्थल से सुरक्षाबलों ने बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियार, गोला-बारूद, वायरलेस सेट, और नक्सलियों की दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की है। इससे यह साफ होता है कि नक्सली लंबे समय से इस इलाके को अपना ठिकाना बनाए हुए थे। बरामद सामग्री की जांच की जा रही है, जिससे अन्य नक्सली नेटवर्क की जानकारी मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों की पुष्टि
कोल्हान डिवीजन के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए कहा:
अनुरंजन किस्पोट्टा ने कहा: “सारंडा क्षेत्र में चलाए गए ऑपरेशन में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है और अभियान अभी जारी है।”
नक्सल विरोधी अभियान का अहम हिस्सा
सारंडा जंगल लंबे समय से नक्सलियों का गढ़ माना जाता रहा है। यह कार्रवाई केंद्र सरकार के उस लक्ष्य से जुड़ी है, जिसके तहत 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है। इस मुठभेड़ में किसी भी सुरक्षाकर्मी के हताहत न होने की सूचना ने बलों का मनोबल और मजबूत किया है।
स्थानीय सुरक्षा पर पड़ेगा असर
इस कार्रवाई के बाद इलाके में नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नक्सलियों के भय के कारण विकास कार्य लंबे समय से प्रभावित थे। शीर्ष नेताओं के मारे जाने से नक्सली संगठन की कमर टूट सकती है और प्रशासनिक पकड़ मजबूत होगी।
न्यूज़ देखो: नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक संदेश
सारंडा की यह मुठभेड़ दर्शाती है कि सुरक्षाबल अब नक्सलियों के गढ़ में घुसकर निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम हैं। एक करोड़ के इनामी नेता का मारा जाना नक्सली नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है। अब जरूरत है कि सर्च ऑपरेशन के साथ क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास को प्राथमिकता दी जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षा से विकास तक, सारंडा के लिए नया सवेरा
सारंडा जैसे दुर्गम इलाकों में शांति बहाल होना स्थानीय लोगों के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
जब सुरक्षा मजबूत होती है, तभी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के रास्ते खुलते हैं।
नक्सलवाद के खिलाफ यह सफलता केवल एक कार्रवाई नहीं, बल्कि भरोसे की शुरुआत है।
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