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छात्र संघ में इलेक्शन की जगह सिलेक्शन होना लोकतंत्र का गला घोंटना है: राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 पर अभाविप नेता प्रिन्स कुमार सिंह का तीखा हमला

#गढ़वा #शिक्षानीति : अभाविप प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य प्रिन्स ने राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 को असंवैधानिक बताया और छात्र संघ चुनाव खत्म करने के प्रयास का विरोध किया
  • राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 को अभाविप ने बताया असंवैधानिक
  • राज्यपाल से अधिकार छीनकर सरकार को सौंपने का प्रावधान विवादों में।
  • प्रिन्स कुमार सिंह ने इसे संविधान और संघीय ढांचे पर हमला करार दिया।
  • छात्र संघ चुनाव की जगह चयन की व्यवस्था को लोकतंत्र विरोधी बताया गया।
  • सरकार पर JAC, JSSC, JPSC में विफलता और भ्रष्टाचार के आरोप दोहराए गए।

गढ़वा जिले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य प्रिन्स कुमार सिंह ने झारखंड विधानसभा में पारित राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका कहना है कि यह विधेयक न केवल विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर प्रहार है बल्कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद की भूमिका और अधिकारों का भी हनन करता है। प्रिन्स ने साफ कहा कि इस विधेयक का अभाविप कड़ा विरोध करेगा।

विधेयक पर अभाविप का कड़ा विरोध

प्रिन्स कुमार सिंह ने कहा कि सरकार ने विश्वविद्यालयों में कुलपति, प्रति कुलपति, वित्तीय सलाहकार और परीक्षा नियंत्रक जैसे पदों पर नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल से लेकर अपने पास रखने का निर्णय किया है, जो पूरी तरह असंवैधानिक है। उनके अनुसार यह कदम भारत के संविधान की मूल भावना और संघीय ढांचे के खिलाफ है।

प्रिन्स कुमार सिंह ने कहा: “यह विधेयक न केवल विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर प्रहार है, बल्कि एक संवैधानिक पद के अधिकारों में सीधा हस्तक्षेप है, जो संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक परंपरा का गला घोंटने जैसा है।”

विश्वविद्यालय सेवा आयोग का सीमित समर्थन

अभाविप ने इस विधेयक में प्रस्तावित झारखंड राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन का स्वागत किया, लेकिन स्पष्ट किया कि इसका अधिकार क्षेत्र केवल शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति और प्रमोशन तक ही सीमित होना चाहिए। कुलपति और प्रति कुलपति जैसे संवैधानिक पदों की नियुक्ति राज्यपाल के अधीन ही रहनी चाहिए।

सरकार पर भ्रष्टाचार और विफलता के आरोप

प्रिन्स ने कहा कि राज्य सरकार पहले से ही झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC), झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) जैसी संस्थाओं को सही ढंग से नहीं चला पा रही है। बार-बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द और भ्रष्टाचार की घटनाएं सरकार की नाकामी को उजागर करती हैं। ऐसे में सरकार पर यह भरोसा नहीं किया जा सकता कि वह विश्वविद्यालयों में निष्पक्ष और पारदर्शी नियुक्ति कर सकेगी।

छात्र संघ चुनाव पर हमला

प्रिन्स कुमार सिंह ने विशेष रूप से सरकार द्वारा छात्र संघ चुनाव की जगह चयन की व्यवस्था लागू करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव लोकतांत्रिक परंपरा की आत्मा हैं, जिनके माध्यम से कई स्वाभाविक और योग्य नेतृत्व समाज और राजनीति को दिशा देते हैं। सरकार इस प्रक्रिया को रोककर छात्रों की आवाज दबाना चाहती है।

प्रिन्स कुमार सिंह ने कहा: “सरकार लोकतांत्रिक तरीके से कैंपस में होने वाले छात्र संघ चुनाव को खत्म कर नए नेतृत्व के उभरने की संभावना को कुचल रही है। यह न केवल छात्रों का अधिकार छीनना है बल्कि लोकतंत्र का गला घोंटना है।”

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शिक्षा पर राजनीति का साया

प्रिन्स ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार विश्वविद्यालयों को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेकर उन्हें राजनीतिक और भ्रष्टाचार का अड्डा बनाना चाहती है। उनके अनुसार यह विधेयक शिक्षा के साथ खिलवाड़ है और संविधान की गरिमा का अपमान है।

न्यूज़ देखो: शिक्षा की स्वायत्तता पर खतरा

यह विधेयक शिक्षा व्यवस्था की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक परंपराओं को चुनौती देता है। सरकार को चाहिए कि छात्रों और शिक्षाविदों की राय लेकर ही ऐसे निर्णय करे। विश्वविद्यालय केवल ज्ञान का केंद्र नहीं बल्कि लोकतांत्रिक नेतृत्व की नर्सरी भी होते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

युवाओं की आवाज बनेगी बदलाव की ताकत

अब समय है कि छात्र, शिक्षक और समाज मिलकर शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता के लिए आवाज उठाएं। अपनी राय कमेंट करें और इस खबर को साझा करें ताकि जागरूकता फैले और सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए मजबूर किया जा सके।

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