चैनपुर अंचल कार्यालय पर उठे गंभीर सवाल, जमीन विवाद में पक्षपात और नोटिस प्रक्रिया पर बवाल

चैनपुर अंचल कार्यालय पर उठे गंभीर सवाल, जमीन विवाद में पक्षपात और नोटिस प्रक्रिया पर बवाल

author News देखो Team
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#पलामू #प्रशासनिक_विवाद : जमीन मामले में पक्षपात और देरी से नोटिस पर बढ़ा आक्रोश।

पलामू जिले के चैनपुर अंचल कार्यालय पर जमीन विवाद से जुड़े मामलों में पक्षपात और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। एक पक्ष ने सर्किल ऑफिसर पर जमीन दर्ज कराने में एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है, जबकि दूसरे पक्ष का दावा है कि बंटवारा केस लंबित होने के बावजूद इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। नोटिस प्रक्रिया में देरी और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठे हैं। इन घटनाओं से स्थानीय लोगों में असंतोष और आक्रोश का माहौल बन गया है।

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  • चैनपुर अंचल कार्यालय पर जमीन विवाद में पक्षपात के आरोप।
  • सर्किल ऑफिसर पर एक पक्ष के पक्ष में काम करने का आरोप।
  • नोटिस जारी करने में देरी, 13 की जगह 21 तारीख को मिला नोटिस।
  • मानसिक प्रताड़ना का आरोप, प्रभावित पक्ष ने उठाए सवाल।
  • पहले भी कई विवाद और घेराव, कार्यशैली पर उठते रहे हैं सवाल।

पलामू जिले के चैनपुर अंचल कार्यालय एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला जमीन विवाद से जुड़ा है, जिसमें सर्किल ऑफिसर की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों और प्रभावित पक्षों का कहना है कि प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और मामले में पारदर्शिता की कमी साफ नजर आ रही है।

जमीन विवाद में पक्षपात के आरोप

मामले में एक पक्ष का आरोप है कि सर्किल ऑफिसर एक व्यक्ति की पूरी जमीन उसके नाम दर्ज कराने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जबकि दूसरे पक्ष के अनुसार, उसी जमीन को लेकर पहले से ही पार्टीशन सूट (बंटवारा मामला) लंबित है और तख्ता बंदी की प्रक्रिया चल रही है।

इसके बावजूद, संबंधित अधिकारी इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे विवाद और गहरा गया है। प्रभावित पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई एकतरफा है और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान नहीं किया जा रहा।

मानसिक प्रताड़ना और प्रशासनिक दबाव का आरोप

दूसरे पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें विभिन्न माध्यमों से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन कोई स्पष्ट समाधान नहीं मिल रहा।

प्रभावित पक्ष के लोगों का कहना है: “हमें न्याय के बजाय लगातार दबाव और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे विश्वास टूटता जा रहा है।”

इस तरह के आरोप प्रशासन की निष्पक्षता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

शाहपुर मामले से भी बढ़ी नाराजगी

स्थानीय लोगों ने शाहपुर क्षेत्र से जुड़े एक पुराने मामले का भी जिक्र किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक व्यक्ति की जमीन पर किसी अन्य का नाम दर्ज कर दिया गया और उसकी बाउंड्री भी तोड़ दी गई।

जब पीड़ित व्यक्ति शिकायत लेकर अंचल कार्यालय पहुंचा, तो उसे एलआरडीसी के पास जाने की सलाह दी गई।

स्थानीय लोगों ने कहा: “अगर गलती अंचल कार्यालय से हुई है, तो सुधार भी वहीं होना चाहिए, जनता को इधर-उधर क्यों भटकाया जा रहा है।”

इस तरह की घटनाओं से लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता जा रहा है।

नोटिस प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप

इस पूरे विवाद में एक और गंभीर मुद्दा नोटिस प्रक्रिया को लेकर सामने आया है। आरोप है कि 13 तारीख को जारी किया गया नोटिस संबंधित पक्ष को 21 तारीख को दिया गया।

स्थानीय लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि यह “शादी के बाद कार्ड छपने” जैसी स्थिति है।

इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि नोटिस बड़े बाबू के माध्यम से भेजा गया, जबकि अन्य कई माध्यम उपलब्ध थे। नोटिस प्राप्त करने वाले लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

कार्यशैली पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

सूत्रों के अनुसार, सर्किल ऑफिसर की कार्यशैली को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। कई बार जब लोग अपने काम के लिए कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि अधिकारी अस्वस्थ हैं या इलाज के लिए बाहर गए हैं।

हालांकि बाद में यह जानकारी सामने आई कि वे घर पर ही विश्राम कर रहे थे। इस तरह की घटनाओं ने लोगों के बीच असंतोष को और बढ़ाया है।

अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आया

जब इस पूरे मामले पर सर्किल ऑफिसर से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो जानकारी मिली कि वे मीटिंग में गए हुए हैं। इस कारण उनका पक्ष सामने नहीं आ सका है।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाती है।

न्यूज़ देखो: प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल

चैनपुर अंचल कार्यालय से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जमीन जैसे संवेदनशील मामलों में निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण होती है, लेकिन यहां लगातार आरोप सामने आ रहे हैं। अगर समय रहते जांच और सुधार नहीं किया गया, तो जनता का भरोसा और कमजोर हो सकता है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी और क्या पीड़ितों को न्याय मिलेगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक नागरिक बनें, अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं

ऐसे मामलों में समाज की जागरूकता और एकजुटता बेहद जरूरी होती है। अगर कहीं भी अन्याय या अनियमितता दिखे, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार और जिम्मेदारी है।

अपनी जमीन, अपने अधिकार और अपने भविष्य के लिए सजग रहें। सही जानकारी लें और दूसरों को भी जागरूक करें।

इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, अपनी राय कमेंट में जरूर दें और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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