Simdega

बालसेरा गांव में पीसीसी पथ निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, ग्रामीणों में रोष

#सिमडेगा #निर्माण_गुणवत्ता : एनआरपी विभाग की पीसीसी सड़क में घटिया सामग्री के आरोप लगे।

सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड अंतर्गत कोरोमियां पंचायत के बालसेरा गांव में निर्माणाधीन पीसीसी पथ की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। ग्रामीणों की सूचना पर पंचायत मुखिया सह समाजसेवी दीपक लकड़ा ने स्थल निरीक्षण किया, जहां निर्माण में अनियमितताएं पाई गईं। आरोप है कि घटिया सीमेंट और अत्यधिक बालू का उपयोग किया गया, जिससे सड़क की मजबूती पर सवाल खड़े हुए। मामले में जिला प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

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  • बालसेरा गांव में एनआरपी विभाग द्वारा निर्माणाधीन पीसीसी पथ पर गुणवत्ता के आरोप।
  • दीपक लकड़ा, पंचायत मुखिया सह समाजसेवी ने किया स्थल निरीक्षण।
  • घटिया सीमेंट और मसाले में अत्यधिक बालू उपयोग का आरोप।
  • पहले भी मुखिया रेणुका सोरेंग ने जताई थी आपत्ति।
  • ग्रामीणों ने दोषी संवेदक पर कार्रवाई की मांग की।
  • उपायुक्त सिमडेगा को लिखित शिकायत देने की तैयारी।

सिमडेगा जिले में ग्रामीण सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। ठेठईटांगर प्रखंड की कोरोमियां पंचायत के बालसेरा गांव में बन रहे पीसीसी पथ को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे भविष्य में यह सड़क टिकाऊ नहीं रहेगी। शिकायत मिलने पर पंचायत मुखिया सह समाजसेवी दीपक लकड़ा ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और स्थिति का जायजा लिया।

निरीक्षण में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं

स्थल निरीक्षण के दौरान पीसीसी पथ निर्माण में कई खामियां उजागर हुईं। ग्रामीणों और मुखिया द्वारा यह पाया गया कि सड़क निर्माण में उपयोग किए जा रहे सीमेंट की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं है। इसके साथ ही मसाले में बालू की मात्रा अत्यधिक पाई गई, जिससे कंक्रीट की मजबूती प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह निर्माण कार्य जारी रहा, तो कुछ ही समय में सड़क में दरारें आ सकती हैं और बारिश के मौसम में इसका हाल और भी खराब हो सकता है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा।

जनहित के कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: दीपक लकड़ा

निरीक्षण के बाद पंचायत मुखिया सह समाजसेवी दीपक लकड़ा ने निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:

दीपक लकड़ा ने कहा: “जनहित से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया है, तो इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की जाएगी।”

उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले की लिखित शिकायत उपायुक्त, सिमडेगा को दी जाएगी, ताकि निष्पक्ष जांच कराई जा सके और दोषियों पर कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी राशि से होने वाले कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।

पहले भी उठ चुकी है गुणवत्ता पर आपत्ति

यह पहली बार नहीं है जब बालसेरा गांव के इस पीसीसी पथ को लेकर सवाल उठे हों। इससे पूर्व भी कोरोमियां पंचायत की मुखिया श्रीमती रेणुका सोरेंग द्वारा इस पथ निर्माण की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई जा चुकी है। उस समय भी निर्माण कार्य में सुधार की मांग की गई थी, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार कोई ठोस सुधार नहीं किया गया

ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार आपत्ति और शिकायत के बावजूद यदि निर्माण कार्य की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तो यह सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही और संवेदक की मनमानी को दर्शाता है।

ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग

बालसेरा गांव के ग्रामीणों में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि गांव में यह सड़क आवागमन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसी सड़क से बच्चे स्कूल जाते हैं, बीमार लोग अस्पताल पहुंचते हैं और ग्रामीण अपनी दैनिक जरूरतों के लिए बाजार जाते हैं।

ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि दोष सिद्ध होता है, तो दोषी संवेदक पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, निर्माण कार्य को मानकों के अनुसार दोबारा कराया जाए, ताकि भविष्य में सड़क टिकाऊ और सुरक्षित रह सके।

सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर असर

ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। जब विकास के नाम पर घटिया निर्माण होता है, तो आम लोगों का भरोसा प्रशासन और योजनाओं से उठने लगता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि वह मामले को गंभीरता से लेकर त्वरित कदम उठाएगा।

जांच और पारदर्शिता की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, तकनीकी जांच और स्थानीय निगरानी बेहद जरूरी है। इससे न केवल निर्माण की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही पर भी अंकुश लगता है।

बालसेरा गांव का मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है या नहीं।

न्यूज़ देखो: विकास के नाम पर लापरवाही पर सख्ती जरूरी

यह खबर बताती है कि ग्रामीण विकास की असली परीक्षा निर्माण की गुणवत्ता से होती है, न कि केवल योजनाओं की संख्या से। बालसेरा गांव में उठे सवाल प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए चेतावनी हैं। यदि समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। अब जरूरी है कि जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करे और भविष्य में ऐसी लापरवाही पर रोक लगाए।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मजबूत सड़कें, मजबूत भरोसा यही विकास की पहचान

ग्रामीण इलाकों में सड़क केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि विकास और सुविधा की जीवनरेखा होती है। घटिया निर्माण से न केवल पैसे की बर्बादी होती है, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है। जब जनता सवाल उठाती है, तो प्रशासन का दायित्व है कि वह जवाबदेही सुनिश्चित करे।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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