शहादत की छाया में अमर हुए महिमानंद, कुंदरी में स्मृति-पट्टिका का हुआ अनावरण

शहादत की छाया में अमर हुए महिमानंद, कुंदरी में स्मृति-पट्टिका का हुआ अनावरण

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #श्रद्धांजलि_समारोह : शहीद के विद्यालय में गूंजा बलिदान का संदेश, पत्नी और शिक्षकों को किया गया सम्मानित

  • 172 बटालियन CRPF ने शहीद हवलदार महिमानंद शुक्ला की स्मृति में किया स्मृति-पट्टिका का अनावरण
  • शहीद की पत्नी वीर नारी प्रिया देवी ने पुष्प अर्पित कर दी भावभीनी श्रद्धांजलि
  • गुरुजनों ने साझा की छात्र महिमानंद की यादें, छात्रों को दी देशभक्ति की प्रेरणा
  • समारोह में सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी, जवान और स्थानीय लोग हुए शामिल
  • कुंदरी विद्यालय से की थी शहीद ने पढ़ाई, वहीं आयोजित हुआ आयोजन
  • दंतेवाड़ा लैंड माइंस हमले में वीरगति को प्राप्त हुए थे शहीद

कुंदरी विद्यालय में गूंजा बलिदान का संदेश

गढ़वा जिले के राजकीय उच्च विद्यालय, कुंदरी में मंगलवार को एक गंभीर और गर्वित करने वाला क्षण सामने आया, जब 172 बटालियन सीआरपीएफ द्वारा शहीद हवलदार महिमानंद शुक्ला की स्मृति में स्मृति-पट्टिका का अनावरण किया गया। यहीं से महिमानंद ने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की थी, और अब उसी विद्यालय प्रांगण में उनका बलिदान अमर कर दिया गया।

वीर नारी की श्रद्धांजलि और गुरुजनों की भावुक यादें

शहीद की पत्नी प्रिया देवी ने पुष्प अर्पित कर स्मृति-पट्टिका पर माल्यार्पण किया और अपने पति को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में शहीद के शिक्षक सत्यनारायण प्रसाद और शालिग्राम सिंह भी उपस्थित थे। उन्होंने भावुक होकर शहीद के छात्र जीवन की कहानियां सुनाईं।

“महिमानंद बेहद अनुशासित और समर्पित छात्र थे। उन्हें हमेशा देशसेवा की भावना प्रेरित करती थी,”
शिक्षक शालिग्राम सिंह

सेना के अधिकारी और स्थानीय लोग हुए शामिल

इस गौरवशाली कार्यक्रम में सीआरपीएफ 172 बटालियन के द्वितीय कमान अधिकारी कुलदीप कुमार, उप कमांडेंट उमा रमन रामेश्वरम सहित बल के अन्य पदाधिकारी, जवान और स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। समारोह में शहीद की पत्नी और दोनों शिक्षकों को सम्मानित भी किया गया, जिससे माहौल गर्व और श्रद्धा से भर उठा

बलिदान की वो आखिरी कहानी

11 फरवरी 2025 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली इलाके में हुए लैंड माइंस विस्फोट में हवलदार महिमानंद शुक्ला गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल एम्स दिल्ली लाया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद 20 फरवरी 2025 को उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनके बलिदान की गाथा आज भी प्रेरणास्त्रोत बन गई है।

“बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता। महिमानंद जैसे शहीदों की स्मृति हमारे दिलों में सदा जीवित रहेगी,”
उप कमांडेंट उमा रमन रामेश्वरम

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गढ़वा

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