शहीद नीलांबर-पीतांबर के आदर्शों पर चलना जरूरी – सांसद कालीचरण सिंह

#लातेहार – स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि:

वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

लातेहार जिले के प्रखंड सरयू में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा नीलांबर-पीतांबर के शहादत दिवस पर एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। चतरा लोकसभा सांसद कालीचरण सिंह ने शहीदों की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

“वीर शहीद नीलांबर-पीतांबर का बलिदान झारखंड के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा है। हमें उनके बताए मार्ग पर चलने की जरूरत है।”सांसद कालीचरण सिंह

उन्होंने कहा कि नीलांबर-पीतांबर ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी थी और उनके विद्रोह को दबाने के लिए ब्रिटिश सरकार को बड़ी सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी थी।

अंग्रेजों के खिलाफ नीलांबर-पीतांबर का संघर्ष

भावी विधायक सुभाष सिंह ने कहा कि नीलांबर-पीतांबर स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा थे। 21 अक्टूबर 1857 को उन्होंने चैनपुर, शाहपुर और लेस्लीगंज स्थित अंग्रेजों के कैंपों पर आक्रमण किया, जिससे अंग्रेजी हुकूमत हिल गई थी।

“देश की आजादी की लड़ाई में नीलांबर-पीतांबर का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।”सुभाष सिंह, भावी विधायक

पलामू किले पर अंग्रेजी सेना का हमला

जिला परिषद अध्यक्ष पूनम देवी ने बताया कि 27 जनवरी 1858 को ब्रिटिश अधिकारी डाल्टन ने पलामू किले पर बड़ा आक्रमण किया। अंग्रेजी सेना ने किले को तीनों ओर से घेरकर तोपों से गोलाबारी की और विद्रोह को दबाने के लिए भारी सेना तैनात की।

“नीलांबर-पीतांबर ने झारखंड के लोगों को अंग्रेजों के खिलाफ गोलबंद किया और आजादी के लिए संघर्ष किया।”पूनम देवी, जिला परिषद अध्यक्ष

कार्यक्रम में गणमान्य लोगों की उपस्थिति

इस श्रद्धांजलि सभा में जिला परिषद सदस्य कन्हाई सिंह, बुद्धेश्वर उरांव, खरवार एकता संघ के पदाधिकारी, मुखिया संघ के जिला अध्यक्ष और कई गणमान्य लोग शामिल हुए। सभी ने एकमत होकर कहा कि नीलांबर-पीतांबर का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा

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वीर शहीद नीलांबर-पीतांबर की शौर्यगाथा झारखंड के इतिहास में अमर है। हमें उनके बलिदान को याद रखते हुए उनके सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।

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