#उंटारीरोड #शतचंडी_महायज्ञ : नवनिर्मित देवी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भव्य कलश यात्रा निकली
पलामू जिले के उंटारी रोड प्रखंड अंतर्गत मुरमा कला गांव में नवनिर्मित देवी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा सह श्री शतचंडी महायज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता के साथ कलश यात्रा निकाली गई। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बन गया।
- मुरमा कला गांव में नवनिर्मित देवी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा सह श्री शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ।
- हजारों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं की भागीदारी के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई।
- कोयल नदी संगम तट से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंत्रपूजित जल भरकर यज्ञशाला में कलश स्थापना।
- स्वामी अभिषेक शास्त्री जी महाराज के सान्निध्य में चल रहा महायज्ञ, 10 मार्च को होगी पूर्णाहुति।
- महायज्ञ में डॉ. धनंजय सिंह, श्यामबिहारी सिंह, सोनू सिंह, दिलीप सिंह और धनजी सिंह मुख्य यजमान बने।
पलामू जिले के उंटारी रोड प्रखंड के मुरमा कला गांव में नवनिर्मित देवी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा सह श्री शतचंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन शुरू हो गया है। इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत गुरुवार को भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे गांव में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
कलश यात्रा में महिला-पुरुष, युवक-युवतियां और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी श्रद्धालु रंग-बिरंगे पारंपरिक वस्त्रों में सिर पर कलश लेकर यात्रा में शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के बीच निकली यह कलश यात्रा पूरे गांव के लिए आस्था और उत्साह का केंद्र बन गई।
कोयल नदी संगम से लाया गया पवित्र जल
कलश यात्रा उंटारी स्थित कोयल नदी के संगम तट तक पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं ने मंत्रपूजित जल भरा। इसके बाद श्रद्धालु जल से भरे कलश लेकर यज्ञशाला परिसर लौटे और वहां विधिवत कलश स्थापना की गई।
कलश स्थापना के साथ ही महायज्ञ के धार्मिक अनुष्ठानों की विधिवत शुरुआत हो गई। यज्ञशाला में वैदिक मंत्रों की गूंज और हवन की सुगंध से वातावरण पूरी तरह पवित्र और भक्तिमय बन गया।
संतों के सान्निध्य में हो रहा महायज्ञ
यह श्री शतचंडी महायज्ञ स्वामी अभिषेक शास्त्री जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित किया जा रहा है। कलश यात्रा के दौरान स्वामी अभिषेक शास्त्री जी महाराज स्वयं रथ पर सवार होकर श्रद्धालुओं के साथ शामिल हुए।
इसके अलावा इस धार्मिक आयोजन में स्वामी धर्मध्वजा जी महाराज समेत कई विद्वान संत भी पहुंचे हैं। महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन श्रद्धालुओं को संतों के प्रवचन का लाभ मिलेगा। प्रवचन के माध्यम से धर्म, संस्कृति और मानव जीवन के मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
आयोजकों ने बताया कि यह धार्मिक आयोजन 10 मार्च तक चलेगा और उसी दिन विधिवत पूर्णाहुति के साथ महायज्ञ का समापन होगा।
मुख्य यजमान और गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस महायज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में डॉ. धनंजय सिंह, श्यामबिहारी सिंह, सोनू सिंह, दिलीप सिंह और धनजी सिंह शामिल हुए। उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
कलश यात्रा में बाजे-गाजे और रथ के साथ श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखने को मिली। इस अवसर पर कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां भी मौजूद रहीं।
मुख्य रूप से स्वामी विष्णुचित्त जी महाराज, सांसद प्रतिनिधि डॉ. योगेंद्र सिंह, पूर्व जिला पार्षद मनोज सिंह, पलामू एसोसिएशन अध्यक्ष रुद्र प्रताप सिंह, पूर्व मुखिया राजमणि सिंह, भृगुनाथ सिंह, अरुण कुमार वर्मा, सुरेश पासवान, अजय गुप्ता, शंकर सिंह, महिला नेत्री, रमेश सिंह, अजय सिंह, साकेत पासवान, पवन कुमार, श्यामनारायण सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
पूरे गांव में दिखा उत्साह और आस्था
कलश यात्रा के दौरान पूरे गांव का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भक्ति गीत गाते हुए और जयकारे लगाते हुए यात्रा में शामिल हुए। घरों की छतों और रास्तों पर खड़े लोग भी इस भव्य धार्मिक यात्रा का स्वागत करते नजर आए।
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के धार्मिक आयोजन से गांव में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोगों के बीच आपसी एकता और सद्भाव भी मजबूत होता है।
न्यूज़ देखो: आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण
मुरमा कला गांव में आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत उदाहरण है। ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करते हैं और लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। आस्था, श्रद्धा और सामूहिक भागीदारी से ही समाज की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ समाज में एकता का संदेश फैलाएं
धार्मिक आयोजन हमें सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं बल्कि समाज में प्रेम और सहयोग का संदेश भी देते हैं।
आइए हम सब मिलकर ऐसे आयोजनों को सफल बनाएं और समाज में एकता व भाईचारे को मजबूत करें।
परंपराओं को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को उनसे जोड़ने की जिम्मेदारी हम सभी की है।
अगर आपके क्षेत्र में भी कोई धार्मिक या सामाजिक आयोजन हो रहा है, तो उसकी जानकारी हमें जरूर भेजें और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें।