
#सिमडेगा #पुस्तक_मेला : साहित्य और रंगमंच के संगम से शिक्षा संस्कृति को मिला बढ़ावा।
सिमडेगा नगर भवन में झारखंड शिक्षा परियोजना और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन नगर परिषद अध्यक्ष ऑलिवर लकड़ा ने किया। मेले में विभिन्न स्टॉल और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों को आकर्षित किया। विशेष रूप से ‘हाँ, मैं सावित्रीबाई फुले’ नाटक ने दर्शकों को प्रभावित किया।
- सिमडेगा नगर भवन में भव्य पुस्तक मेले का आयोजन।
- ऑलिवर लकड़ा ने फीता काटकर किया उद्घाटन।
- मुंबई से आई कलाकारों ने प्रस्तुत किया ‘हाँ मैं सावित्रीबाई फुले’ नाटक।
- शिक्षा और साहित्य से जुड़े विभिन्न स्टॉल लगाए गए।
- अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और झारखंड शिक्षा परियोजना का संयुक्त आयोजन।
सिमडेगा में शिक्षा और साहित्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर भवन परिसर में एक भव्य पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। झारखंड शिक्षा परियोजना और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन नगर परिषद अध्यक्ष ऑलिवर लकड़ा द्वारा फीता काटकर किया गया।
यह आयोजन न केवल पुस्तकों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने का प्रयास था, बल्कि कला और रंगमंच के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाने का भी मंच बना।
नाटक ने छोड़ी गहरी छाप
पुस्तक मेले का मुख्य आकर्षण मुंबई से आईं कलाकार शुभांगी भुजबल और शिल्पा साने द्वारा प्रस्तुत नाटक रहा। यह नाटक प्रसिद्ध लेखिका सुषमा देशपांडे द्वारा लिखित और निर्देशित ‘हाँ, मैं सावित्रीबाई फुले’ पर आधारित था।
कलाकारों ने मंचन के दौरान सावित्रीबाई फुले के संघर्ष, शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज सुधार में उनके योगदान को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
दर्शकों ने इस नाटक को खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
स्टॉलों में दिखी शिक्षा और नवाचार की झलक
नगर भवन परिसर में विभिन्न शैक्षणिक और साहित्यिक स्टॉल लगाए गए थे, जहां बच्चों और अभिभावकों को नई-नई किताबों और शिक्षण सामग्री की जानकारी मिली।
इस दौरान नगर परिषद अध्यक्ष ऑलिवर लकड़ा ने ‘OUR WORK IN CRECHE’ स्टॉल का उद्घाटन किया। स्टॉल संचालक भरत सिंह ने उन्हें क्रेच की कार्यप्रणाली और बच्चों के समग्र विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
शिक्षा के महत्व पर दिया गया संदेश
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों और युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करने में मदद करते हैं।
वक्ताओं ने कहा: “पुस्तक मेले जैसे कार्यक्रम ज्ञान के विस्तार और समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का माध्यम होते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य और शिक्षा का संगम ही समाज को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।
विद्यार्थियों और नागरिकों की रही भागीदारी
इस पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया और पुस्तकों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद लिया।
इस आयोजन ने सिमडेगा में शिक्षा और साहित्य के प्रति एक नई ऊर्जा का संचार किया।
न्यूज़ देखो: शिक्षा और संस्कृति का संगम ही विकास की कुंजी
सिमडेगा में आयोजित यह पुस्तक मेला यह साबित करता है कि जब शिक्षा और संस्कृति साथ चलते हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव आता है। नाटक और साहित्य के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रेरित करना एक सराहनीय पहल है। अब जरूरत है कि ऐसे आयोजन नियमित रूप से होते रहें और अधिक लोगों तक पहुंचें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
किताबों से जुड़ें, ज्ञान की रोशनी फैलाएं
पढ़ाई केवल परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को समझने का माध्यम है।
किताबें हमें सोचने, सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
आइए, हम भी पढ़ने की आदत को अपनाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
बच्चों को मोबाइल से दूर कर किताबों से जोड़ना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
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