
#सिमडेगा #ओबीसी_आरक्षण : नगर परिषद चुनाव में आरक्षण शून्य किए जाने के खिलाफ आयोग को सौंपा गया ज्ञापन।
सिमडेगा नगर परिषद चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण शून्य किए जाने के फैसले के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। इसी क्रम में सिमडेगा पिछड़ा जाति नगर निकाय संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने इसे ओबीसी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया है। यह मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर संवैधानिक संस्थाओं तक पहुंच चुका है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा बढ़ गई है।
- सिमडेगा नगर परिषद चुनाव में ओबीसी आरक्षण शून्य किया गया।
- पिछड़ा जाति नगर निकाय संघर्ष समिति ने आयोग को सौंपा ज्ञापन।
- रामजी यादव व बजरंग प्रसाद ने निर्णय को बताया असंवैधानिक।
- जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की उठी मांग।
- ओबीसी समुदाय में गहरा असंतोष और आंदोलन की चेतावनी।
सिमडेगा नगर परिषद क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण शून्य किए जाने के फैसले ने राजनीतिक और सामाजिक माहौल को गर्मा दिया है। नगर निकाय चुनाव से ठीक पहले लिए गए इस निर्णय को लेकर ओबीसी समुदाय खुद को हाशिये पर महसूस कर रहा है। इसी मुद्दे को लेकर सिमडेगा पिछड़ा जाति नगर निकाय संघर्ष समिति के अध्यक्ष रामजी यादव और बजरंग प्रसाद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को औपचारिक रूप से ज्ञापन सौंपा।
आयोग के समक्ष रखा गया पक्ष
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से कहा कि सिमडेगा नगर परिषद क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी बड़ी संख्या में निवास करती है। इसके बावजूद यदि नगर परिषद चुनाव में उनके लिए एक भी वार्ड आरक्षित नहीं किया जाता है, तो यह न केवल सामाजिक न्याय की अवधारणा के खिलाफ है, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों का भी सीधा उल्लंघन है।
रामजी यादव ने आयोग के समक्ष कहा कि ओबीसी समुदाय लंबे समय से स्थानीय निकायों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष करता आ रहा है, लेकिन इस तरह का निर्णय समुदाय को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की मंशा को दर्शाता है।
बिना सर्वे आरक्षण समाप्त करने पर सवाल
रामजी यादव ने कहा:
“बिना उचित सर्वे, तथ्य और पारदर्शी आंकड़ों के ओबीसी आरक्षण को शून्य करना पूरी तरह से अनुचित है। यह निर्णय संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।”
उन्होंने आयोग से मांग की कि इस मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए सिमडेगा नगर परिषद चुनाव प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और ओबीसी समुदाय को उनका संवैधानिक हक दिलाया जाए।
जनसंख्या अनुपात में आरक्षण की मांग
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि नगर परिषद क्षेत्र में निवास करने वाली आबादी के अनुपात में ओबीसी समुदाय को आरक्षण दिया जाए, ताकि स्थानीय निकाय चुनावों में उनकी वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। प्रतिनिधियों का कहना है कि आरक्षण का उद्देश्य केवल सीटें देना नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन में सभी वर्गों की समान भागीदारी सुनिश्चित करना है।
बढ़ता असंतोष, आंदोलन के संकेत
नगर परिषद क्षेत्र में इस फैसले को लेकर आम जनता, विशेषकर ओबीसी समुदाय में गहरा असंतोष देखा जा रहा है। बजरंग प्रसाद ने कहा कि यह मुद्दा केवल एक चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सम्मान और अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है। यदि समय रहते इस पर सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
सड़क से संवैधानिक मंच तक संघर्ष
रामजी यादव ने स्पष्ट किया कि ओबीसी समुदाय अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर संवैधानिक संस्थाओं तक संघर्ष करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे ओबीसी समाज की है, जिसे एकजुट होकर लड़ा जाएगा।
सामाजिक न्याय पर उठते सवाल
स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि स्थानीय निकाय चुनावों में बड़े सामाजिक वर्ग को प्रतिनिधित्व से वंचित किया जाता है, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ें कमजोर होती हैं। सिमडेगा जैसे आदिवासी बहुल जिले में पिछड़ा वर्ग भी सामाजिक ताने-बाने का अहम हिस्सा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
न्यूज़ देखो: लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व नहीं, तो भागीदारी कैसी?
सिमडेगा नगर परिषद चुनाव में ओबीसी आरक्षण शून्य किया जाना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की कसौटी भी है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के समक्ष उठाया गया यह मुद्दा अब शासन और प्रशासन की जवाबदेही तय करेगा। क्या आयोग इस मामले में हस्तक्षेप कर संतुलन स्थापित करेगा, या ओबीसी समुदाय को लंबा संघर्ष करना पड़ेगा—यह देखने वाली बात होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकारों की रक्षा तभी संभव है, जब आवाज संगठित हो
लोकतंत्र में हर वर्ग की भागीदारी उसकी ताकत होती है। यदि किसी समुदाय को उसके अधिकारों से वंचित किया जाता है, तो सवाल उठाना जरूरी है। सामाजिक न्याय तभी मजबूत होगा, जब सभी वर्ग समान रूप से प्रतिनिधित्व पाएंगे।





